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Yamuna Nagar News: मृगा पुत्र के जीवन चरित्र से कराया अवगत
Tue, 05 Nov 2024 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 05 Nov 2024 02:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 107 वें दिन महासाध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने मृगा पुत्र के जीवन चरित्र से श्रद्धालुओं को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें संसार से विरक्ति हुई तथा किस प्रकार माता-पिता की आज्ञा लेते समय वाद संवाद से उन्होंने माता-पिता को दीक्षा के लिए मनाया।
डॉ. स्वाति ने कहा कि मृगा पुत्र के माता-पिता उसके सक्षम संयम महाव्रत एवं साधु धर्म पालन के बड़े-बड़े कष्टों और दुखों का वर्णन करने लगे और अंत में उसके समक्ष प्रस्ताव रखा कि यदि दीक्षा लेनी ही है तो उपलब्ध भोगों को भोगकर भुक्तभोगी बन कर लेना,अभी क्या जल्दी है। इस प्रकार भोगों का अनेक प्रलोभन देने पर भी मृगा पुत्र किस प्रकार अपने निश्चय पर अटल रहे यह बड़ा मार्मिक विवरण है।
कहने का भाव यही है यदि आप तपस्या के रास्ते पर चलना चाहते हो तो आपको भोग विलास से विरक्ति लेनी पड़ेगी। यदि आप चाहोगे कुछ समय भोग विलास में रहकर जीवन का आनंद ले लो उसके पर पश्चात वृद्धावस्था में मैं धर्म-कर्म कर लूंगा,तो उस धर्म कर्म का कोई फायदा नहीं है साधना और तपस्या की लहर तो जब मन में आए आप अपने आप को तपस्या के पथ पर मोड़ ले और पूरे निश्चय के साथ दृढ़ता के साथ इस राह पर आगे चल पड़े ताकि आपकी आत्मा को भटकने से मुक्ति मिल सके।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 107 वें दिन महासाध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने मृगा पुत्र के जीवन चरित्र से श्रद्धालुओं को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें संसार से विरक्ति हुई तथा किस प्रकार माता-पिता की आज्ञा लेते समय वाद संवाद से उन्होंने माता-पिता को दीक्षा के लिए मनाया।
डॉ. स्वाति ने कहा कि मृगा पुत्र के माता-पिता उसके सक्षम संयम महाव्रत एवं साधु धर्म पालन के बड़े-बड़े कष्टों और दुखों का वर्णन करने लगे और अंत में उसके समक्ष प्रस्ताव रखा कि यदि दीक्षा लेनी ही है तो उपलब्ध भोगों को भोगकर भुक्तभोगी बन कर लेना,अभी क्या जल्दी है। इस प्रकार भोगों का अनेक प्रलोभन देने पर भी मृगा पुत्र किस प्रकार अपने निश्चय पर अटल रहे यह बड़ा मार्मिक विवरण है।
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कहने का भाव यही है यदि आप तपस्या के रास्ते पर चलना चाहते हो तो आपको भोग विलास से विरक्ति लेनी पड़ेगी। यदि आप चाहोगे कुछ समय भोग विलास में रहकर जीवन का आनंद ले लो उसके पर पश्चात वृद्धावस्था में मैं धर्म-कर्म कर लूंगा,तो उस धर्म कर्म का कोई फायदा नहीं है साधना और तपस्या की लहर तो जब मन में आए आप अपने आप को तपस्या के पथ पर मोड़ ले और पूरे निश्चय के साथ दृढ़ता के साथ इस राह पर आगे चल पड़े ताकि आपकी आत्मा को भटकने से मुक्ति मिल सके।
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