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Yamuna Nagar News: मशीन के दाम बढ़े, मूल औजारों पर लौटे कारीगर
Fri, 19 Jun 2026 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 19 Jun 2026 12:37 AM IST
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रजनीश कुमार।
अशोक कुमार
यमुनानगर। भवन निर्माण में उपयोग होने वाले बिजली उपकरणों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब मिस्त्रियों और कारीगरों की दिखाई देने लगा है। आधुनिक मशीनों के आने से फिटिंग, कटिंग और ड्रिलिंग जैसे कार्य कम समय में आसानी से पूरे हो जाते थे। अब उपकरणों की बढ़ती कीमत के कारण कई कारीगर फिर से हाथों के औजारों का सहारा लेने लगे हैं।
कारीगर परमजीत, असवंत कुमार, नरेश कुमार का कहना है कि पहले प्लास, पेंचकस और हाथ से चलने वाले उपकरणों से काम किया जाता था। बाद में ड्रिल मशीन, कटर और अन्य आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से काम की गति बढ़ी,। अब महंगाई ने इन सुविधाओं को महंगा बना दिया है। कई मिस्त्री अब उपकरण किराये पर लेकर काम करने को मजबूर हैं।
चेन पुली ब्लॉक की कीमत पहले 2,500 से 4,500 रुपये थी, जो अब बढ़कर 3,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गई है। दो से पांच टन क्षमता वाले ब्लॉक 9 हजार से 25 हजार रुपये तक बिक रहे हैं। औद्योगिक गियर पहले 400 से 2,500 रुपये में मिल जाते थे, जबकि बड़े गियर सेट अब 5,000 से 15,000 हजार रुपये तक पहुंच चुके हैं।
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फैक्टरियों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के दामों में भी 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लेथ मशीन छह माह पहले 55 हजार रुपये से शुरू होती थी, जो अब लगभग 65 हजार रुपये से शुरू हो रही है। उन्नत सीएनसी लेथ मशीनों की कीमत 15 लाख से 80 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
मिलिंग मशीन पहले 1.20 लाख से 1.30 लाख रुपये में उपलब्ध थी, जबकि अब इसकी कीमत 1.50 लाख रुपये से शुरू होकर 7.75 लाख रुपये तक पहुंच गई है। रेडियल ड्रिल मशीन की कीमत 3 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 4 लाख रुपये हो गई है। कटिंग मशीनों के दामों में भी 10 हजार से 40 हजार रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है। संवाद
स्पेयर पार्ट्स का खर्च बढ़ा
प्रह्लादपुरी आईटीआई के इलेक्ट्रीशियन सुशील कुमार का कहना है कि मशीनों और बिजली उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर तकनीकी क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। पहले मिस्त्री और इलेक्ट्रीशियन आसानी से आधुनिक उपकरण खरीद लेते थे, लेकिन अब उनकी लागत काफी बढ़ गई है। मशीन खराब होने पर मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स का खर्च भी पहले की तुलना में अधिक हो गया है।
कारीगरों की मुश्किलें बढ़ी
अरोड़ा इलेक्ट्रीकल स्टोर के संचालक राजीव कुकरेजा का कहना है कि मशीनों से काम जल्दी और बेहतर गुणवत्ता के साथ होता है। बढ़ती महंगाई और मरम्मत खर्च ने छोटे कारीगरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका मानना है कि यदि मशीनों और हार्डवेयर सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि होती रही तो छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगरों के लिए व्यवसाय चलाना और कठिन हो जाएगा।
खुर्दी गांव के इलेक्ट्रीशियन रजनीश कुमार ने बताया कि मशीनों ने काम आसान बनाया। अब महंगाई के कारण कई कारीगर किराये के उपकरण लेकर या पारंपरिक तरीके से काम करने को मजबूर हैं। इंडस्ट्रियल क्षेत्र में पैनल रिपेयर करने वाले तकनीशियन मुकेश कुमार ने कहा कि उपकरण और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स महंगे हो गए हैं। कई बार ग्राहक अधिक खर्च से बचने के लिए काम टाल देते हैं।
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यमुनानगर। भवन निर्माण में उपयोग होने वाले बिजली उपकरणों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब मिस्त्रियों और कारीगरों की दिखाई देने लगा है। आधुनिक मशीनों के आने से फिटिंग, कटिंग और ड्रिलिंग जैसे कार्य कम समय में आसानी से पूरे हो जाते थे। अब उपकरणों की बढ़ती कीमत के कारण कई कारीगर फिर से हाथों के औजारों का सहारा लेने लगे हैं।
कारीगर परमजीत, असवंत कुमार, नरेश कुमार का कहना है कि पहले प्लास, पेंचकस और हाथ से चलने वाले उपकरणों से काम किया जाता था। बाद में ड्रिल मशीन, कटर और अन्य आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से काम की गति बढ़ी,। अब महंगाई ने इन सुविधाओं को महंगा बना दिया है। कई मिस्त्री अब उपकरण किराये पर लेकर काम करने को मजबूर हैं।
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चेन पुली ब्लॉक की कीमत पहले 2,500 से 4,500 रुपये थी, जो अब बढ़कर 3,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गई है। दो से पांच टन क्षमता वाले ब्लॉक 9 हजार से 25 हजार रुपये तक बिक रहे हैं। औद्योगिक गियर पहले 400 से 2,500 रुपये में मिल जाते थे, जबकि बड़े गियर सेट अब 5,000 से 15,000 हजार रुपये तक पहुंच चुके हैं।
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फैक्टरियों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के दामों में भी 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लेथ मशीन छह माह पहले 55 हजार रुपये से शुरू होती थी, जो अब लगभग 65 हजार रुपये से शुरू हो रही है। उन्नत सीएनसी लेथ मशीनों की कीमत 15 लाख से 80 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
मिलिंग मशीन पहले 1.20 लाख से 1.30 लाख रुपये में उपलब्ध थी, जबकि अब इसकी कीमत 1.50 लाख रुपये से शुरू होकर 7.75 लाख रुपये तक पहुंच गई है। रेडियल ड्रिल मशीन की कीमत 3 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 4 लाख रुपये हो गई है। कटिंग मशीनों के दामों में भी 10 हजार से 40 हजार रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है। संवाद
स्पेयर पार्ट्स का खर्च बढ़ा
प्रह्लादपुरी आईटीआई के इलेक्ट्रीशियन सुशील कुमार का कहना है कि मशीनों और बिजली उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर तकनीकी क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। पहले मिस्त्री और इलेक्ट्रीशियन आसानी से आधुनिक उपकरण खरीद लेते थे, लेकिन अब उनकी लागत काफी बढ़ गई है। मशीन खराब होने पर मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स का खर्च भी पहले की तुलना में अधिक हो गया है।
कारीगरों की मुश्किलें बढ़ी
अरोड़ा इलेक्ट्रीकल स्टोर के संचालक राजीव कुकरेजा का कहना है कि मशीनों से काम जल्दी और बेहतर गुणवत्ता के साथ होता है। बढ़ती महंगाई और मरम्मत खर्च ने छोटे कारीगरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका मानना है कि यदि मशीनों और हार्डवेयर सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि होती रही तो छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगरों के लिए व्यवसाय चलाना और कठिन हो जाएगा।
खुर्दी गांव के इलेक्ट्रीशियन रजनीश कुमार ने बताया कि मशीनों ने काम आसान बनाया। अब महंगाई के कारण कई कारीगर किराये के उपकरण लेकर या पारंपरिक तरीके से काम करने को मजबूर हैं। इंडस्ट्रियल क्षेत्र में पैनल रिपेयर करने वाले तकनीशियन मुकेश कुमार ने कहा कि उपकरण और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स महंगे हो गए हैं। कई बार ग्राहक अधिक खर्च से बचने के लिए काम टाल देते हैं।

रजनीश कुमार।

रजनीश कुमार।

रजनीश कुमार।

रजनीश कुमार।