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राज-वैभव त्याग संन्यस्त हुए भगवान पार्श्वनाथ : डॉ. स्वाति

Wed, 18 Sep 2024 03:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 18 Sep 2024 03:46 AM IST
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Lord Parshvanath renounced royal luxuries and became a monk: Dr. Swati
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 60वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के जाप का आरंभ करते हुए उनके बारे में बताया। कहा कि भगवान पार्श्वनाथ सत्य की तलाश में राज वैभव को त्याग कर संसार में संन्यस्त हुए।
उन्होंने कठिन तप तक पहुंचकर अपने जीए गए सच को भाषा दी। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर के रूप में उन्होंने वास्तविक धर्म को स्थापित कर उपदेश दिया कि यदि धर्म इस जन्म में शांति व सुख नहीं देता है तो उससे पारलौकिक शांति की कल्पना व्यर्थ है। उन्होंने हमारी आस्था को नए आयाम दिए।
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उन्होंने कहा है कि हमारे भीतर अनंत शक्ति व असीम क्षमता है, इसलिए उन्होंने उपासनापरक व क्रियाकांड युक्त धर्म को महत्व न देकर जीवंत धर्म की प्रतिस्थापना की। अज्ञान, अंधकार, आडम्बर व क्रिया कांड के मध्य में क्रांति का बीज बनकर पृथ्वी पर विचरण करते हुए उन्होंने धर्म का सही अर्थ समझाया।
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पार्श्वनाथ के जीए गए वह सारे सत्य धर्म के व्याख्या सूत्र बने हैं, जिन्हें उन्होंने ओढ़ा नहीं था, साधना व तप की गहराइयों में उतरकर आत्मचेतना के तल पर पाया था। उनके धर्म का शाश्वत संदेश यही है कि स्वयं द्वारा स्वयं को खोजें। भगवान पार्श्वनाथ तापस परंपरा में क्रांति व ज्वाला की तरह ऐसे प्रकट हुए जैसे वर्षों तप में लीन रहने के बाद सहसा ज्ञान का तीसरा नेत्र खुल जाता है।
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