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गंगा की तरह पूजन, फिर भी यमुना उपेक्षा का शिकार
yamunanagar Bureau
Updated Wed, 28 Oct 2015 12:37 AM IST
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यमुना नदी लगातार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रही है। पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को दो अक्तूबर को एक वर्ष पूरा हो चुका है। अभियान के बाद भी यमुना की स्वच्छता के लिए प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा है। हालांकि इस दिशा में नगर निगम, नहरी विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई कर सकते हैं। हालात यह है कि नहर के किनारों व घाटों पर गंदगी जमा है और सीवरेज व नालों का दूषित पानी लगातार इसमें गिर रहा है। तीज-त्यौहारों पर पूजन व अन्य रस्मों के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु आहत हो रहे हैं। उधार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कई बार नोटिस देने पर भी जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग कुछ भी करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। विभाग चाहकर भी दोनों ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता को नहीं बढ़ा पा रहा है, जबकि नए ट्रीटमेंट प्लांट का काम बजट आवंटन न होने से अधर में लटका हुआ है।
यह है यमुना एक्शन प्लान
यमुना एक्शन प्लान के तहत वर्ष 2000 में कैंप के जम्मू कॉलोनी में 25 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था। वर्ष 2002 में 10 एमएलडी का एक प्लांट बाड़ीमाजरा पुल के पास लगाया गया था। सूत्रों की मानें तो दोनों ट्रीटमेंट प्लांटों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। जम्मू कॉलोनी के प्लांट की क्षमता 25 एमएलडी है, जबकि इस पर 28-27 एमएलडी दूषित पानी को साफ करने का बौझ पड़ रहा है। इसी प्रकार बाडीमाजरा पुल के पास लगे प्लांट की क्षमता 10 एमएलडी है। इस पर 12-13 एमएलडी पानी आ रहा है। क्षमता से ज्यादा गंदा पानी आने पर उसे सही तरह से ट्रीट करने में दिक्कत आ रही है। कुछ हद तक दुषित पानी सीधे नहर में जा रहा है।
बॉक्स
सीधे नहर में गिर रहा नालों का पानी
पश्चिमी यमुना नहर की पटरी चिट्टा मंदिर रोड पर आजाद नगर से निकलते नाले का दूषित पानी नहर में गिर रहा है। इसी प्रकार गुरुनानक खालसा कॉलेज से लगती यमुना विहार कॉलोनी से गुजरते नाले का गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है। वहीं, जगाधरी और यमुनानगर की विभिन्न कॉलोनियों से बाइपास होकर जम्मू कॉलोनी में पश्चिमी यमुना नहर में मिलते शहर का सबसे बड़े नाले का दूषित पानी भी ठीक से ट्रीट न होने से नहर के पानी को दूषित कर रहा है।
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अधर में लटकी ये दो योजनाएं
जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग ने जगाधरी के सीवरेजों के पानी को जगाधरी की तरफ से ही ट्रीट कर नहर में छोड़ने की योजना बनाई गई थी। गांव परवालो में 40 एमएलडी का प्लांट लगाया जाना है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण और चारदीवारी के बाद निर्धारित 100 करोड़ के बजट आवंटन नहीं होने से मामला बीच में अटका पड़ा है। इसी प्रकार जम्मू कॉलोनी में पश्चिमी यमुना नहर में गिरते नाले को रुख मोड कर डिच-ड्रेन में जरिये गंदे पानी को साफ कर थोड़ी दूरी पश्चिमी यमुना में छोड़ा जाना था। यह योजना भी अधर में लटकी पड़ी है।
वर्जन..
त्यौहारी सीजन करीब है, जिसमें यमुना नहर पर हजारों लोग धार्मिक अनुष्ठान व अन्य रस्मों के लिए पहुंचेंगे। इसमें श्रद्धालु यमुना किनारे व घाटों पर पूजन के साथ यमुना के जल से आचमन व स्नान करते हैं। ऐसे में नहर का स्वच्छ होना जरूरी है। समिति द्वारा कई बार प्रशासन से मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाई है। प्रशासन को चाहिए कि समय रहते यमुना की स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए।
महेंद्र कुमार मित्तल, प्रदेश संयोजक, यमुना बचाओ समिति।
वर्जन...
प्रशासन व सरकार द्वारा पश्चिमी यमुना नहर सहित नदी की स्वच्छता पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि समिति अपने स्तर पर इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार व प्रशासन यमुना की स्वच्छता के लिए योजना तैयार करे और सीधे गिर रहे नालों को तुरंत बंद कराए, ताकि गंगा की तरह पूजनीय यमुना को भी पूर्ण रूप से स्वच्छ रखा जा सके।
किरणपाल राणा, प्रधान, यमुना बचाओ सेवा समिति।
वर्जन
शहर की जनसंख्या बढने के साथ मौजूदा दोनों ट्रीटमेंट प्लांट पर दबाव बढ़ा है। दोनों प्लांट पर क्षमता से अधिक दूषित पानी आ रहा है, इसलिए तीसरे प्लांट के लिए एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। जबकि नहर में गिर रहे नालों को पास के ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने के लिए नगर निगम से बातचीत चल रही है।
अरविंद रोहिला, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग।
........
वर्जन
त्यौहारी सीजन के मद्देनजर यमुना नहर के किनारों व घाटों पर सफाई के लिए तैयारी है। कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं, निगम द्वारा समय रहते कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. अरविंद बालियान, ईओ, नगर निगम।
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यह है यमुना एक्शन प्लान
यमुना एक्शन प्लान के तहत वर्ष 2000 में कैंप के जम्मू कॉलोनी में 25 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था। वर्ष 2002 में 10 एमएलडी का एक प्लांट बाड़ीमाजरा पुल के पास लगाया गया था। सूत्रों की मानें तो दोनों ट्रीटमेंट प्लांटों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। जम्मू कॉलोनी के प्लांट की क्षमता 25 एमएलडी है, जबकि इस पर 28-27 एमएलडी दूषित पानी को साफ करने का बौझ पड़ रहा है। इसी प्रकार बाडीमाजरा पुल के पास लगे प्लांट की क्षमता 10 एमएलडी है। इस पर 12-13 एमएलडी पानी आ रहा है। क्षमता से ज्यादा गंदा पानी आने पर उसे सही तरह से ट्रीट करने में दिक्कत आ रही है। कुछ हद तक दुषित पानी सीधे नहर में जा रहा है।
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सीधे नहर में गिर रहा नालों का पानी
पश्चिमी यमुना नहर की पटरी चिट्टा मंदिर रोड पर आजाद नगर से निकलते नाले का दूषित पानी नहर में गिर रहा है। इसी प्रकार गुरुनानक खालसा कॉलेज से लगती यमुना विहार कॉलोनी से गुजरते नाले का गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है। वहीं, जगाधरी और यमुनानगर की विभिन्न कॉलोनियों से बाइपास होकर जम्मू कॉलोनी में पश्चिमी यमुना नहर में मिलते शहर का सबसे बड़े नाले का दूषित पानी भी ठीक से ट्रीट न होने से नहर के पानी को दूषित कर रहा है।
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अधर में लटकी ये दो योजनाएं
जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग ने जगाधरी के सीवरेजों के पानी को जगाधरी की तरफ से ही ट्रीट कर नहर में छोड़ने की योजना बनाई गई थी। गांव परवालो में 40 एमएलडी का प्लांट लगाया जाना है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण और चारदीवारी के बाद निर्धारित 100 करोड़ के बजट आवंटन नहीं होने से मामला बीच में अटका पड़ा है। इसी प्रकार जम्मू कॉलोनी में पश्चिमी यमुना नहर में गिरते नाले को रुख मोड कर डिच-ड्रेन में जरिये गंदे पानी को साफ कर थोड़ी दूरी पश्चिमी यमुना में छोड़ा जाना था। यह योजना भी अधर में लटकी पड़ी है।
वर्जन..
त्यौहारी सीजन करीब है, जिसमें यमुना नहर पर हजारों लोग धार्मिक अनुष्ठान व अन्य रस्मों के लिए पहुंचेंगे। इसमें श्रद्धालु यमुना किनारे व घाटों पर पूजन के साथ यमुना के जल से आचमन व स्नान करते हैं। ऐसे में नहर का स्वच्छ होना जरूरी है। समिति द्वारा कई बार प्रशासन से मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कार्रवाई नहीं हो पाई है। प्रशासन को चाहिए कि समय रहते यमुना की स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए।
महेंद्र कुमार मित्तल, प्रदेश संयोजक, यमुना बचाओ समिति।
वर्जन...
प्रशासन व सरकार द्वारा पश्चिमी यमुना नहर सहित नदी की स्वच्छता पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि समिति अपने स्तर पर इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार व प्रशासन यमुना की स्वच्छता के लिए योजना तैयार करे और सीधे गिर रहे नालों को तुरंत बंद कराए, ताकि गंगा की तरह पूजनीय यमुना को भी पूर्ण रूप से स्वच्छ रखा जा सके।
किरणपाल राणा, प्रधान, यमुना बचाओ सेवा समिति।
वर्जन
शहर की जनसंख्या बढने के साथ मौजूदा दोनों ट्रीटमेंट प्लांट पर दबाव बढ़ा है। दोनों प्लांट पर क्षमता से अधिक दूषित पानी आ रहा है, इसलिए तीसरे प्लांट के लिए एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। जबकि नहर में गिर रहे नालों को पास के ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने के लिए नगर निगम से बातचीत चल रही है।
अरविंद रोहिला, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग।
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त्यौहारी सीजन के मद्देनजर यमुना नहर के किनारों व घाटों पर सफाई के लिए तैयारी है। कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं, निगम द्वारा समय रहते कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. अरविंद बालियान, ईओ, नगर निगम।