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शहर में 25 दिन झमाझम बारिश, भूमिगत जलस्तर में पांच फीट की बढ़ोतरी
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इस वर्ष मानसून सीजन में बारिश भले ही कम हुई हो, लेकिन भूमिगत जलस्तर में पांच से दस फीट तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। पश्चिमी यमुना नहर के आसपास के इलाके में भूमिगत जलस्तर 10 फीट पर उपलब्ध है। वहीं शहर में 60 से 70 फीट तक पहुंच गया है, जबकि गर्मियों में यह 70 से 80 फीट पर होता है। यह स्थिति तब हैं जब पिछले चार साल के मुकाबले इस साल आधी बारिश ही हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार बरसात के सीजन में एक साथ बारिश होने की बजाय रुक-रुक कर बारिश हुई है। जून के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के पहले सप्ताह तक 25 दिन बारिश हुई है। यह भूमिगत जलस्तर के लिए काफी फायदेमंद रही, जिसके चलते जमीन में नमी बनी रही और बारिश का 70 फीसदी से ज्यादा पानी व्यर्थ नहीं गया। प्रति बारिश 0.50 इंच पानी जमीन में चला गया। जनस्वास्थ्य विभाग के जगाधरी परिमंडल के एक्सईएन पारिक गर्ग का कहना है कि लगातार दूसरे साल जलस्तर में सुधार हुआ है। पेयजल सप्लाई के लिए ट्यूबवेलों में भी भरपूर पानी आ रहा है। कई जगहों पर पांच फीट तो कई जगहों पर 10 फीट तक भूमिगत जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। पश्चिमी यमुना नहर के आसपास फिलहाल केवल 10 फिट पर भी पानी उपलब्ध है।
खेती के साथ भूजल के लिए फायदेमंद
- कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह का कहना है कि इस सीजन में करीब एक सप्ताह देरी से मानसून पहुंचा, लेकिन रुक रुक हुई बारिश ने फसलों के साथ भूजल स्तर को फायदा पहुंचाया। जिले में दो खंड डार्क जोन में आते हैं। इन जगहों पर भी धान के सीजन में जलस्तर में कमी देखने को नहीं मिली।
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उन्होंने बताया कि पिछले साल 10 बार बहुत ज्यादा बारिश हुई, लेकिन इस बार सिर्फ दो दिन ही भारी बारिश हुई। मौसम विज्ञान के तय मापदंडों के मुताबिक ढाई इंच से ज्यादा बारिश को भारी बारिश माना जाता है।
तीन महीने बारिश की स्थिति
महीना जिले का औसत शहर में
जून 51 एमएम 70 एमएम
जुलाई 243 एमएम 450 एमएम
अगस्त 127 एमएम 350 एमएम
09 सितंबर तक 45 एमएम 200 एमएम
चार साल की स्थिति
साल औसत बारिश
2018 1052 एमएम
2019 1915 एमएम
2020 2599 एमएम
2021 800 एमएम -9 सितंबर तक
-जल संसाधनों के प्रयोग को लेकर जागरूकता जरूरी
-जल संसाधन मामलों की जिला सलाहकार रजनी गोयल का कहना है कि जल संसाधनों के प्रयोग को लेकर जागरूकता की बहुत आवश्यकता है। खासकर बारिश के पानी को इकट्ठा करके प्रयोग करने की आदत डालनी पड़ेगी। वहीं भूमिगत जल का अंधाधुंध प्रयोग भी रोकना होगा।
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विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार बरसात के सीजन में एक साथ बारिश होने की बजाय रुक-रुक कर बारिश हुई है। जून के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के पहले सप्ताह तक 25 दिन बारिश हुई है। यह भूमिगत जलस्तर के लिए काफी फायदेमंद रही, जिसके चलते जमीन में नमी बनी रही और बारिश का 70 फीसदी से ज्यादा पानी व्यर्थ नहीं गया। प्रति बारिश 0.50 इंच पानी जमीन में चला गया। जनस्वास्थ्य विभाग के जगाधरी परिमंडल के एक्सईएन पारिक गर्ग का कहना है कि लगातार दूसरे साल जलस्तर में सुधार हुआ है। पेयजल सप्लाई के लिए ट्यूबवेलों में भी भरपूर पानी आ रहा है। कई जगहों पर पांच फीट तो कई जगहों पर 10 फीट तक भूमिगत जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। पश्चिमी यमुना नहर के आसपास फिलहाल केवल 10 फिट पर भी पानी उपलब्ध है।
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खेती के साथ भूजल के लिए फायदेमंद
- कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह का कहना है कि इस सीजन में करीब एक सप्ताह देरी से मानसून पहुंचा, लेकिन रुक रुक हुई बारिश ने फसलों के साथ भूजल स्तर को फायदा पहुंचाया। जिले में दो खंड डार्क जोन में आते हैं। इन जगहों पर भी धान के सीजन में जलस्तर में कमी देखने को नहीं मिली।
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उन्होंने बताया कि पिछले साल 10 बार बहुत ज्यादा बारिश हुई, लेकिन इस बार सिर्फ दो दिन ही भारी बारिश हुई। मौसम विज्ञान के तय मापदंडों के मुताबिक ढाई इंच से ज्यादा बारिश को भारी बारिश माना जाता है।
तीन महीने बारिश की स्थिति
महीना जिले का औसत शहर में
जून 51 एमएम 70 एमएम
जुलाई 243 एमएम 450 एमएम
अगस्त 127 एमएम 350 एमएम
09 सितंबर तक 45 एमएम 200 एमएम
चार साल की स्थिति
साल औसत बारिश
2018 1052 एमएम
2019 1915 एमएम
2020 2599 एमएम
2021 800 एमएम -9 सितंबर तक
-जल संसाधनों के प्रयोग को लेकर जागरूकता जरूरी
-जल संसाधन मामलों की जिला सलाहकार रजनी गोयल का कहना है कि जल संसाधनों के प्रयोग को लेकर जागरूकता की बहुत आवश्यकता है। खासकर बारिश के पानी को इकट्ठा करके प्रयोग करने की आदत डालनी पड़ेगी। वहीं भूमिगत जल का अंधाधुंध प्रयोग भी रोकना होगा।