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Yamuna Nagar News: गांवों में गूंजने दीजिए लाडो की किलकारी
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यमुनानगर।
स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले के बहुत से गांवों में लिंगानुपात बिगड़ा हुआ है। जिले में कुल 655 गांव हैं, जिनमें से 225 गांव ऐसे हैं, जहां लिंगानुपात की स्थिति काफी खराब है।
इन गांवों में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 800 से भी कम है। स्वास्थ्य विभाग अब इन गांवों पर अपनी विशेष नजर रखेगा। विशेष अभियान चलाकर यह पता लगाया जाएगा कि इन गांवों में लिंगानुपात कम होने की बड़ी वजह क्या है। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक भी किया जाएगा। इसके लिए टीमें बनाई जा रही हैं, जो गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी।
सभी 20 पीएचसी में से कोई भी ऐसी नहीं है, जिसके अंतर्गत कम लिंगानुपात वाले गांव न हों। इनमें पीएचसी बिलासपुर के अंतर्गत आने वाले गांवों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। बिलासपुर के 18 गांव ऐसे हैं जिनमें लिंगानुपात 800 से कम है।
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इसी तरह रसूलपुर पीएचसी के 17, नाहरपुर, भंभौल, प्रतापनगर व अंटावा के 15-15 गांव शामिल हैं। सबसे कम बूड़िया पीएचसी के तीन गांव हैं। वर्ष 2017 में आखिरी बार जिले का लिंगानुपात 944 पर पर पहुंचा था। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आ रही है। कुछ गांव ऐसे हैं जिनमें सालभर में 10 से 15 लड़कों ने जन्म लिया लेकिन लड़की केवल एक ही पैदा हुई। यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
वर्ष 2023 में तो लिंगानुपात 920 पर आ गया। वर्ष 2024 में अब तक जनवरी से अप्रैल माह तक की रिपोर्ट के अनुसार लिंगानुपात 941 पर पहुंच गया है। 1000 लड़कों के मुकाबले लिंगानुपात की बात करें तो जनवरी में 920, फरवरी में 990, मार्च में 900 व अप्रैल 955 लड़कियों ने जन्म लिया। यह गत 11 वर्षों में जनवरी से अप्रैल तक चार माह का सबसे बड़ा सुधार है। हालांकि अभी इस साल में मई से दिसंबर तक रिपोर्ट आना अभी बाकी है। जिसमें पता चलेगा कि सालभर में लिंगानुपात कितना रहा। संवाद
गांवों में घटता लिंगानुपात चिंता का विषय
जिन गांवाें में लिंगानुपात की हालत सबसे ज्यादा खराब है उनमें सटारी, खेड़ा खुर्द, सबिलपुर जटान, गौतम नगर, चबूतरों, स्वाबड़ी, रामपुर गेंडा, काठगढ़, परभौली, ताहरपुर, रामपुर कांबोज, अजीजपुर खुर्द, मारवा खुर्द, धर्मकोट, हरतौल, कपालमोचन, मोहड़ी, आंबवाला, टेहा, टेही, ककड़ौनी, चंदाखेड़ी, संधाली, लालछप्पर, मारूपुर, पोबारी, मंधार, माधोबांस, मोहड़ी, रतनगढ़, रादौर, पलाका, खजूरी, इस्माईलपुर, मसाना रांगड़ान, काबुलपुर, घिलौर, डेरा मगड़ा, बीरबलसुआ, जमालपुर, भूरे का माजरा, हुड़ियों, रामबांस, ब्राह्मण माजरा, रगड़ माजरा, माली माजरा, नंदगढ़, उधमगढ़, भगवानपुर, हसनपुर, खानपुर, तिहानो, शेरपुर, दसौरा, मुंडाखेड़ा, बागपता, कलेसर, नैनावाली, अकालगढ़, कैल, दराजपुर, टेही, खुंडेवाला, भाटली, अजीजपुर, टीन का माजरा, लाहड़पुर, डूमावाला, ठसका, कल्याणपुर, पहाड़ीपुर, झींवरमाजरा, तुंबी, सत्तूवाला, सरांवी, रामगढ़, सुखनगरी, मिसरी का माजरा, अकालगढ़, कांसली, ससौली, हरिपुर, गुलाबगढ़, कुंजल, हरनौल, हरगढ़, भूतमाजरा गांव शामिल हैं।
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लोगों को करेंगे जागरूक : विपिन गोंदवाल
पीएनडीटी के नोडल ऑफिसर डॉक्टर विपिन गोंदवाल ने बताया कि जिन गांवों में लिंगानुपात 800 से कम है वहां पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष निगरानी की जाएगी। वहां के लोगों को जागरूक किया जाएगा। जो लोग गर्भ में भ्रूण की लिंग जांच करते हैं, उन पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई की जाती है। वहीं अल्ट्रासाउंड केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखी जा रही है।
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जनवरी से दिसंबर 2023 तक 800 से कम लिंगानुपात वाले गांवों
पीएचसी गांव
पीएचसी हैबतपुर 09
पीएचसी मुगलवाली 15
पीएचसी बिलासपुर 18
पीएचसी अलाहर 11
पीएचसी रादौर 11
पीएचसी अंटावा 15
पीएचसी खदरी 11
पीएचसी खारवन 06
पीएचसी कोट 11
पीएचसी छछरौली 10
पीएचसी प्रतापनगर 15
पीएचसी भंभौल 15
पीएचसी अरनौली 06
पीएचसी सरस्वतीनगर 09
पीएचसी रसूलपुर 17
पीएचसी साढौरा 12
पीएचसी कलानौर 09
पीएचसी साबापुर 07
पीएचसी बूड़िया 03
पीएचसी नाहरपुर 15
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2014 से लेकर 2024 तक का लिंगानुपात
वर्ष लिंगानुपात
2014 856
2015 871
2016 898
2017 944
2018 925
2019 936
2020 926
2021 915
2022 924
2023 920
2024 941 जनवरी से अप्रैल माह तक।
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स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले के बहुत से गांवों में लिंगानुपात बिगड़ा हुआ है। जिले में कुल 655 गांव हैं, जिनमें से 225 गांव ऐसे हैं, जहां लिंगानुपात की स्थिति काफी खराब है।
इन गांवों में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 800 से भी कम है। स्वास्थ्य विभाग अब इन गांवों पर अपनी विशेष नजर रखेगा। विशेष अभियान चलाकर यह पता लगाया जाएगा कि इन गांवों में लिंगानुपात कम होने की बड़ी वजह क्या है। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक भी किया जाएगा। इसके लिए टीमें बनाई जा रही हैं, जो गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी।
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सभी 20 पीएचसी में से कोई भी ऐसी नहीं है, जिसके अंतर्गत कम लिंगानुपात वाले गांव न हों। इनमें पीएचसी बिलासपुर के अंतर्गत आने वाले गांवों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। बिलासपुर के 18 गांव ऐसे हैं जिनमें लिंगानुपात 800 से कम है।
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इसी तरह रसूलपुर पीएचसी के 17, नाहरपुर, भंभौल, प्रतापनगर व अंटावा के 15-15 गांव शामिल हैं। सबसे कम बूड़िया पीएचसी के तीन गांव हैं। वर्ष 2017 में आखिरी बार जिले का लिंगानुपात 944 पर पर पहुंचा था। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आ रही है। कुछ गांव ऐसे हैं जिनमें सालभर में 10 से 15 लड़कों ने जन्म लिया लेकिन लड़की केवल एक ही पैदा हुई। यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
वर्ष 2023 में तो लिंगानुपात 920 पर आ गया। वर्ष 2024 में अब तक जनवरी से अप्रैल माह तक की रिपोर्ट के अनुसार लिंगानुपात 941 पर पहुंच गया है। 1000 लड़कों के मुकाबले लिंगानुपात की बात करें तो जनवरी में 920, फरवरी में 990, मार्च में 900 व अप्रैल 955 लड़कियों ने जन्म लिया। यह गत 11 वर्षों में जनवरी से अप्रैल तक चार माह का सबसे बड़ा सुधार है। हालांकि अभी इस साल में मई से दिसंबर तक रिपोर्ट आना अभी बाकी है। जिसमें पता चलेगा कि सालभर में लिंगानुपात कितना रहा। संवाद
गांवों में घटता लिंगानुपात चिंता का विषय
जिन गांवाें में लिंगानुपात की हालत सबसे ज्यादा खराब है उनमें सटारी, खेड़ा खुर्द, सबिलपुर जटान, गौतम नगर, चबूतरों, स्वाबड़ी, रामपुर गेंडा, काठगढ़, परभौली, ताहरपुर, रामपुर कांबोज, अजीजपुर खुर्द, मारवा खुर्द, धर्मकोट, हरतौल, कपालमोचन, मोहड़ी, आंबवाला, टेहा, टेही, ककड़ौनी, चंदाखेड़ी, संधाली, लालछप्पर, मारूपुर, पोबारी, मंधार, माधोबांस, मोहड़ी, रतनगढ़, रादौर, पलाका, खजूरी, इस्माईलपुर, मसाना रांगड़ान, काबुलपुर, घिलौर, डेरा मगड़ा, बीरबलसुआ, जमालपुर, भूरे का माजरा, हुड़ियों, रामबांस, ब्राह्मण माजरा, रगड़ माजरा, माली माजरा, नंदगढ़, उधमगढ़, भगवानपुर, हसनपुर, खानपुर, तिहानो, शेरपुर, दसौरा, मुंडाखेड़ा, बागपता, कलेसर, नैनावाली, अकालगढ़, कैल, दराजपुर, टेही, खुंडेवाला, भाटली, अजीजपुर, टीन का माजरा, लाहड़पुर, डूमावाला, ठसका, कल्याणपुर, पहाड़ीपुर, झींवरमाजरा, तुंबी, सत्तूवाला, सरांवी, रामगढ़, सुखनगरी, मिसरी का माजरा, अकालगढ़, कांसली, ससौली, हरिपुर, गुलाबगढ़, कुंजल, हरनौल, हरगढ़, भूतमाजरा गांव शामिल हैं।
लोगों को करेंगे जागरूक : विपिन गोंदवाल
पीएनडीटी के नोडल ऑफिसर डॉक्टर विपिन गोंदवाल ने बताया कि जिन गांवों में लिंगानुपात 800 से कम है वहां पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष निगरानी की जाएगी। वहां के लोगों को जागरूक किया जाएगा। जो लोग गर्भ में भ्रूण की लिंग जांच करते हैं, उन पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई की जाती है। वहीं अल्ट्रासाउंड केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखी जा रही है।
जनवरी से दिसंबर 2023 तक 800 से कम लिंगानुपात वाले गांवों
पीएचसी गांव
पीएचसी हैबतपुर 09
पीएचसी मुगलवाली 15
पीएचसी बिलासपुर 18
पीएचसी अलाहर 11
पीएचसी रादौर 11
पीएचसी अंटावा 15
पीएचसी खदरी 11
पीएचसी खारवन 06
पीएचसी कोट 11
पीएचसी छछरौली 10
पीएचसी प्रतापनगर 15
पीएचसी भंभौल 15
पीएचसी अरनौली 06
पीएचसी सरस्वतीनगर 09
पीएचसी रसूलपुर 17
पीएचसी साढौरा 12
पीएचसी कलानौर 09
पीएचसी साबापुर 07
पीएचसी बूड़िया 03
पीएचसी नाहरपुर 15
2014 से लेकर 2024 तक का लिंगानुपात
वर्ष लिंगानुपात
2014 856
2015 871
2016 898
2017 944
2018 925
2019 936
2020 926
2021 915
2022 924
2023 920
2024 941 जनवरी से अप्रैल माह तक।