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Yamuna Nagar News: महिला के पेट में पट्टी छोड़ने की फिर होगी जांच
Sat, 15 Nov 2025 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 15 Nov 2025 01:23 AM IST
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कष्ट निवारण समिति की बैठक में अपना पक्ष रखती महिला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक जिला सचिवालय में हुई। बैठक में पहले से निर्धारित 15 परिवाद रखे गए, जिनमें से मंत्री ने 11 परिवादों का मौके पर ही समाधान करके फाइल कर दिया। शेष चार परिवादों को आगामी बैठक तक हल करने के निर्देश दिए। बैठक में सबसे पहले से लंबित सिजेरियन डिलीवरी के दौरान महिला के पेट में पट्टी छोड़ने और शिक्षकों को ब्लैकमेल करने पर चर्चा हुई।
बैठक में शिकायतकर्ता उस वक्त हैरान रह गए जब मेडिकल बोर्ड ने अपनी जांच में पेट में पट्टी छोड़ने के मामले में एक नई महिला डॉक्टर की एंट्री कर दी। इस पर परिजनों ने एतराज जताते हुए अधिकारियों पर आरोपी डॉक्टर को बचाने के आरोप लगाए। अधिकारी इस बार भी अपनी जांच को पूरा नहीं कर पाए। वहीं शिक्षकों से संबंधित मामले में मंत्री ने डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी।
जांच कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम जगाधरी विश्वनाथ ने मंत्री को बताया कि बीबीपुर गांव निवासी महिला मेहर खातून के पेट में सर्जिकल पट्टी छोड़ने के मामले में जांच के लिए गठित मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एसपी अस्पताल जगाधरी में सिजेरियन डिलीवरी के दौरान दो महिला डॉक्टरों से लापरवाही हुई थी। बोर्ड ने यह भी रिपोर्ट में कहा है कि डिलीवरी के दौरान महिला डॉक्टर के पति स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डिप्टी सिविल सर्जन (अब सेवानिवृत्त) डॉ. अनूप गोयल ऑपरेशन थिएटर में मौजूद नहीं थे।
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इस पर महिला के परिजनों ने रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सब झूठ है। डॉ. अनूप गोयल ने ही मेहर खातून को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया था। परिजन उस वक्त हैरान रह गए जब एसडीएम ने मंत्री को यह बताया कि बोर्ड की रिपोर्ट में ऑपरेशन के दौरान डाॅ. सोना गोयल के साथ ऑपरेशन थिएटर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या सारस्वत की मौजूदगी थी। परिजनों ने मंत्री के सामने कहा कि वह डॉ. दिव्या का नाम आज पहली बार सुन रहे हैं। यह सब आरोपी डॉक्टर को बचाने के लिए किया जा रहा है।
डॉ. दिव्या को जानबूझकर इस केस में जोड़ा गया, क्योंकि डॉ. सोना गोयल के पास सिर्फ अल्ट्रासाउंड की डिग्री है। ऐसे में वह सर्जरी नहीं कर सकती। वहीं जिन डॉक्टरों ने महिला का अल्ट्रासाउंड किया था उनकी संलिप्तता भी बोर्ड ने नकार दी। मामले को गंभीरता से सुनते हुए मंत्री कृष्ण बेदी ने शिकायतकर्ता द्वारा अंकित इन सभी प्वाइंट पर जांच करने को कहा। परिजनों ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी की जांच करने और तकनीकी सबूतों को जुटाने की मांग की।
शिक्षकों के ब्लैकमेल की एसआईटी करेगी जांच
शिक्षकों को ब्लैकमेल करने के मामले में इंडियन प्रेस ट्रस्ट के महासचिव भूपिंदर कुमार व शिक्षा विभाग से सस्पेंड चल रहे पीजीटी कॉमर्स संभव गर्ग पर शिक्षकों ने मंत्री कृष्ण बेदी के सामने फिर से आरोप लगाए। भारत सेवक नगर निवासी प्रवीन गुप्ता व अन्य शिक्षकों ने मंत्री को बताया कि इन दोनों ने उन्हें परेशान कर दिया है। जो भी अधिकारी इनकी जांच करता है यह उसी के खिलाफ विभाग से जांच बिठवा देते हैं। ऐसे में जांच सही तरीके से नहीं हो पाती। मंत्री ने कहा कि यह गंभीर मामला है। इसलिए इसकी जांच एसआईटी से करवानी होगी। इस पर मंत्री ने डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी। एसआईटी में इंस्पेक्टर व समिति के सदस्य भी शामिल होंगे।
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यमुनानगर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक जिला सचिवालय में हुई। बैठक में पहले से निर्धारित 15 परिवाद रखे गए, जिनमें से मंत्री ने 11 परिवादों का मौके पर ही समाधान करके फाइल कर दिया। शेष चार परिवादों को आगामी बैठक तक हल करने के निर्देश दिए। बैठक में सबसे पहले से लंबित सिजेरियन डिलीवरी के दौरान महिला के पेट में पट्टी छोड़ने और शिक्षकों को ब्लैकमेल करने पर चर्चा हुई।
बैठक में शिकायतकर्ता उस वक्त हैरान रह गए जब मेडिकल बोर्ड ने अपनी जांच में पेट में पट्टी छोड़ने के मामले में एक नई महिला डॉक्टर की एंट्री कर दी। इस पर परिजनों ने एतराज जताते हुए अधिकारियों पर आरोपी डॉक्टर को बचाने के आरोप लगाए। अधिकारी इस बार भी अपनी जांच को पूरा नहीं कर पाए। वहीं शिक्षकों से संबंधित मामले में मंत्री ने डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी।
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जांच कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम जगाधरी विश्वनाथ ने मंत्री को बताया कि बीबीपुर गांव निवासी महिला मेहर खातून के पेट में सर्जिकल पट्टी छोड़ने के मामले में जांच के लिए गठित मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एसपी अस्पताल जगाधरी में सिजेरियन डिलीवरी के दौरान दो महिला डॉक्टरों से लापरवाही हुई थी। बोर्ड ने यह भी रिपोर्ट में कहा है कि डिलीवरी के दौरान महिला डॉक्टर के पति स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डिप्टी सिविल सर्जन (अब सेवानिवृत्त) डॉ. अनूप गोयल ऑपरेशन थिएटर में मौजूद नहीं थे।
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इस पर महिला के परिजनों ने रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सब झूठ है। डॉ. अनूप गोयल ने ही मेहर खातून को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया था। परिजन उस वक्त हैरान रह गए जब एसडीएम ने मंत्री को यह बताया कि बोर्ड की रिपोर्ट में ऑपरेशन के दौरान डाॅ. सोना गोयल के साथ ऑपरेशन थिएटर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या सारस्वत की मौजूदगी थी। परिजनों ने मंत्री के सामने कहा कि वह डॉ. दिव्या का नाम आज पहली बार सुन रहे हैं। यह सब आरोपी डॉक्टर को बचाने के लिए किया जा रहा है।
डॉ. दिव्या को जानबूझकर इस केस में जोड़ा गया, क्योंकि डॉ. सोना गोयल के पास सिर्फ अल्ट्रासाउंड की डिग्री है। ऐसे में वह सर्जरी नहीं कर सकती। वहीं जिन डॉक्टरों ने महिला का अल्ट्रासाउंड किया था उनकी संलिप्तता भी बोर्ड ने नकार दी। मामले को गंभीरता से सुनते हुए मंत्री कृष्ण बेदी ने शिकायतकर्ता द्वारा अंकित इन सभी प्वाइंट पर जांच करने को कहा। परिजनों ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी की जांच करने और तकनीकी सबूतों को जुटाने की मांग की।
शिक्षकों के ब्लैकमेल की एसआईटी करेगी जांच
शिक्षकों को ब्लैकमेल करने के मामले में इंडियन प्रेस ट्रस्ट के महासचिव भूपिंदर कुमार व शिक्षा विभाग से सस्पेंड चल रहे पीजीटी कॉमर्स संभव गर्ग पर शिक्षकों ने मंत्री कृष्ण बेदी के सामने फिर से आरोप लगाए। भारत सेवक नगर निवासी प्रवीन गुप्ता व अन्य शिक्षकों ने मंत्री को बताया कि इन दोनों ने उन्हें परेशान कर दिया है। जो भी अधिकारी इनकी जांच करता है यह उसी के खिलाफ विभाग से जांच बिठवा देते हैं। ऐसे में जांच सही तरीके से नहीं हो पाती। मंत्री ने कहा कि यह गंभीर मामला है। इसलिए इसकी जांच एसआईटी से करवानी होगी। इस पर मंत्री ने डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी। एसआईटी में इंस्पेक्टर व समिति के सदस्य भी शामिल होंगे।

कष्ट निवारण समिति की बैठक में अपना पक्ष रखती महिला। संवाद

कष्ट निवारण समिति की बैठक में अपना पक्ष रखती महिला। संवाद

कष्ट निवारण समिति की बैठक में अपना पक्ष रखती महिला। संवाद