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Yamuna Nagar News: नसबंदी तो दूर कुत्तों का वैक्सीनेशन भी नहीं करा पाया निगम
Sun, 22 Dec 2024 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 22 Dec 2024 11:51 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर में बढ़ती कुत्तों की संख्या ने लोगों की नाक में दम कर दिया है। पता नहीं गलियों में घूम रहे बेसहारा कुत्ते कब अचानक हमला कर दें। नगर निगम के अधिकारी कुत्तों नसबंदी कराने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। नसबंदी कराना तो दूर आज तक शहर में घूम रहे बेसहारा कुत्तों को एंटी रैबीज की वैक्सीन भी अधिकारियों ने नहीं लगवाई है।
लोगों का आरोप है कि निगम के अधिकारियों का ध्यान लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स, एनर्जी टैक्स समेत अन्य कर वसूलने की तरफ है। लोगों को कुत्तों से सुरक्षित वातावरण देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। करीब 50 हजार बेसहारा कुत्ते शहर में खुलेआम घूम रहे हैं। इन कुत्तों का काटना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि इन कुत्तों को एंटी रैबीज टीके नहीं लगे हैं।
इंसानों को एंटी रैबीज का टीका सिर्फ कुत्ते, बंदर, बिल्ली आदि जानवरों के काटने के बाद ही लगाया जाता है। यह टीका शरीर में रैबीज वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बनाता है। अगर कुत्ते ने नहीं काटा है तो शरीर में रैबीज वायरस का कोई खतरा नहीं होता है, इसलिए टीका लगाने की जरूरत नहीं होती है।
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पशुओं के प्रति लोगों के बदलते व्यवहार की वजह से शहर में बेसहारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अगर शरीर में एक बार रैबीज संक्रमण फैल गया तो उस मरीज को बचाना मुश्किल होता है। रैबीज एक बार नर्वस सिस्टम के अंदर पहुंच जाए तो वायरस मस्तिष्क में तीव्र सूजन पैदा करता है, जिससे जल्द ही कोमा और मौत हो सकती है।
गत वर्ष आई गाइडलाइन के अनुसार बेसहारा कुत्तों को उनके मूल स्थान से हटाकर कहीं दूसरी जगह नहीं छोड़ा जा सकता। परंतु अधिकारी कुत्तों की नसबंदी कराने के अलावा उन्हें एंटी रैबीज वैक्सीन तो लगवा ही सकते हैं। अधिकारी तो इस काम में भी पूरी तरह से विफल रहे हैं। 2016 में आखिरी बार 16170 कुत्तों की नसबंदी कराई गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई।
बच्चों व बुजुर्गाें के पीछे दौड़ते हैं कुत्ते : बृजपाल
सीनियर सिटीजन डे केयर क्लब सेक्टर-17 के सचिव बृजपाल सिंह का कहना है कि बेसहारा कुत्तों से सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों व बुजुर्गों को हो रही है। बच्चे व बुजुर्ग दोनों ही कुत्तों के हमले से बचकर भाग नहीं सकते। यहां तक की पार्कों में भी सारा दिन कुत्ते घूमते रहते हैं। कई बार कुत्ते पार्कों में बच्चों पर हमला कर चुके हैं। इसलिए जिला प्रशासन को बेसहारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए, क्योंकि इनकी संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।
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यमुनानगर। शहर में बढ़ती कुत्तों की संख्या ने लोगों की नाक में दम कर दिया है। पता नहीं गलियों में घूम रहे बेसहारा कुत्ते कब अचानक हमला कर दें। नगर निगम के अधिकारी कुत्तों नसबंदी कराने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। नसबंदी कराना तो दूर आज तक शहर में घूम रहे बेसहारा कुत्तों को एंटी रैबीज की वैक्सीन भी अधिकारियों ने नहीं लगवाई है।
लोगों का आरोप है कि निगम के अधिकारियों का ध्यान लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स, एनर्जी टैक्स समेत अन्य कर वसूलने की तरफ है। लोगों को कुत्तों से सुरक्षित वातावरण देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। करीब 50 हजार बेसहारा कुत्ते शहर में खुलेआम घूम रहे हैं। इन कुत्तों का काटना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि इन कुत्तों को एंटी रैबीज टीके नहीं लगे हैं।
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इंसानों को एंटी रैबीज का टीका सिर्फ कुत्ते, बंदर, बिल्ली आदि जानवरों के काटने के बाद ही लगाया जाता है। यह टीका शरीर में रैबीज वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बनाता है। अगर कुत्ते ने नहीं काटा है तो शरीर में रैबीज वायरस का कोई खतरा नहीं होता है, इसलिए टीका लगाने की जरूरत नहीं होती है।
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पशुओं के प्रति लोगों के बदलते व्यवहार की वजह से शहर में बेसहारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अगर शरीर में एक बार रैबीज संक्रमण फैल गया तो उस मरीज को बचाना मुश्किल होता है। रैबीज एक बार नर्वस सिस्टम के अंदर पहुंच जाए तो वायरस मस्तिष्क में तीव्र सूजन पैदा करता है, जिससे जल्द ही कोमा और मौत हो सकती है।
गत वर्ष आई गाइडलाइन के अनुसार बेसहारा कुत्तों को उनके मूल स्थान से हटाकर कहीं दूसरी जगह नहीं छोड़ा जा सकता। परंतु अधिकारी कुत्तों की नसबंदी कराने के अलावा उन्हें एंटी रैबीज वैक्सीन तो लगवा ही सकते हैं। अधिकारी तो इस काम में भी पूरी तरह से विफल रहे हैं। 2016 में आखिरी बार 16170 कुत्तों की नसबंदी कराई गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई।
बच्चों व बुजुर्गाें के पीछे दौड़ते हैं कुत्ते : बृजपाल
सीनियर सिटीजन डे केयर क्लब सेक्टर-17 के सचिव बृजपाल सिंह का कहना है कि बेसहारा कुत्तों से सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों व बुजुर्गों को हो रही है। बच्चे व बुजुर्ग दोनों ही कुत्तों के हमले से बचकर भाग नहीं सकते। यहां तक की पार्कों में भी सारा दिन कुत्ते घूमते रहते हैं। कई बार कुत्ते पार्कों में बच्चों पर हमला कर चुके हैं। इसलिए जिला प्रशासन को बेसहारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए, क्योंकि इनकी संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।