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महावत के इशारों को समझने लगी लक्ष्मी, चंचल, लीली और जया
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Lakshmi, Chanchal, Leeli and Jaya begin to understand the gestures of the mahout.
- फोटो : Yamuna Nagar
छछरौली। चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र बन संतोर में रखी लक्ष्मी, चंचल, लीली, जया और लक्ष्मी-2 मादा हथिनियां अब महावत (केयर टेकर) के इशारों को समझने लगी हैं। इन दिनों महावत द्वारा खासतौर पर इन हथिनियों को स्पेशल टारगेट प्रैक्टिस दी जा रही है। इसमें महावत के बोलने पर उठना, बैठना, लेटना व करवट लेना आदि शामिल हैं। यह सब कुछ उनकी रोजाना की दिनचर्या के अनुसार किया जा रहा है।
बनसंतोर में प्रत्येक मादा हथनी पर एक महावत नियुक्त किया गया है। जो मादा की रोजमर्रा की दिनचर्या में नहाना, खाना खिलाना व नील ट्रीमिंग आदि कार्य करता है। बता दें हाथी पुनर्वास केंद्र बन संतोर पूर्व वन मंत्री किरण चौधरी ने बनवाया था। हाथी पुनर्वास केंद्र में मादा हथिनियों की केयर टेकर का कार्य वन विभाग द्वारा लाइव लाइफ एसओएस संस्था को सौंपा हुआ है। संवाद
मौसम के अनुसार बदलती रहती है हथिनियों की डाइट
महावत आशीष ने बताया कि मादा हथिनियों की डाइट मौसम के अनुसार बदलती रहती हैं। गर्मी के मौसम में ठंडी चीजें और सर्दी के मौसम में गर्म चीजें डाइट में दी जाती हैं। इस समय सभी हथिनियों को केला, सब्जी व खिचड़ी दिया जा रहा है। 24 घंटे में एक हथिनी की डाइट लगभग पौने तीन क्विंटल बन जाती है। सर्दी में डाइट में फेरबदल कर दिया जाता है। इनके नहाने के लिए पुनर्वास केंद्र में विशेष इंतजाम किया हुआ है। जिसमें सभी मनमर्जी से पानी के साथ अठखेलियां करते हुए नहाती हैं। इसके अलावा इन मादा हथिनियों के पैरों के नाखूनों की नील ट्रीमिंग समय-समय पर की जाती है। सबसे ज्यादा ध्यान इनके नाखूनों का रखा जाता है।
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सबसे ज्यादा उम्र की चंचल
इस हाथी पुनर्वास केंद्र में इस समय पांच हथिनियां हैं। जिनका नाम लक्ष्मी, चंचल, लीली, जया, लक्ष्मी- 2 है। इनमें सबसे उम्र दराज हथनी चंचल है। जिसकी उम्र लगभग 80 साल है। बाकी सभी मादाओं की उम्र 45 से 55 साल तक है। महावत आशीष भतूरा ने बताया कि टारगेट ट्रेनिंग प्रैक्टिस में हथिनियों को महावत सामने खड़े होकर हाथ के इशारे व बोलने से शरीर में हरकत करने की ट्रेनिंग दी जाती है। इससे मादाओं को टारगेट प्रैक्टिस में निपुण होने पर उनके रोजमर्रा के कार्यों में आसानी हो जाती है।
सभी हथिनियों का रखा जा रहा विशेष ध्यान : परमजीत
वन्य प्राणी जीव विभाग के सब इंस्पेक्टर परमजीत सिंह ने बताया कि हाथी पुनर्वास केंद्र बन संतोर में सभी हथिनियों का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है। इनकी सुविधा के लिए सही पर्याप्त इंतजाम विभाग द्वारा कराए गए हैं। उनके नहाने व डाइट का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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बनसंतोर में प्रत्येक मादा हथनी पर एक महावत नियुक्त किया गया है। जो मादा की रोजमर्रा की दिनचर्या में नहाना, खाना खिलाना व नील ट्रीमिंग आदि कार्य करता है। बता दें हाथी पुनर्वास केंद्र बन संतोर पूर्व वन मंत्री किरण चौधरी ने बनवाया था। हाथी पुनर्वास केंद्र में मादा हथिनियों की केयर टेकर का कार्य वन विभाग द्वारा लाइव लाइफ एसओएस संस्था को सौंपा हुआ है। संवाद
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मौसम के अनुसार बदलती रहती है हथिनियों की डाइट
महावत आशीष ने बताया कि मादा हथिनियों की डाइट मौसम के अनुसार बदलती रहती हैं। गर्मी के मौसम में ठंडी चीजें और सर्दी के मौसम में गर्म चीजें डाइट में दी जाती हैं। इस समय सभी हथिनियों को केला, सब्जी व खिचड़ी दिया जा रहा है। 24 घंटे में एक हथिनी की डाइट लगभग पौने तीन क्विंटल बन जाती है। सर्दी में डाइट में फेरबदल कर दिया जाता है। इनके नहाने के लिए पुनर्वास केंद्र में विशेष इंतजाम किया हुआ है। जिसमें सभी मनमर्जी से पानी के साथ अठखेलियां करते हुए नहाती हैं। इसके अलावा इन मादा हथिनियों के पैरों के नाखूनों की नील ट्रीमिंग समय-समय पर की जाती है। सबसे ज्यादा ध्यान इनके नाखूनों का रखा जाता है।
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सबसे ज्यादा उम्र की चंचल
इस हाथी पुनर्वास केंद्र में इस समय पांच हथिनियां हैं। जिनका नाम लक्ष्मी, चंचल, लीली, जया, लक्ष्मी- 2 है। इनमें सबसे उम्र दराज हथनी चंचल है। जिसकी उम्र लगभग 80 साल है। बाकी सभी मादाओं की उम्र 45 से 55 साल तक है। महावत आशीष भतूरा ने बताया कि टारगेट ट्रेनिंग प्रैक्टिस में हथिनियों को महावत सामने खड़े होकर हाथ के इशारे व बोलने से शरीर में हरकत करने की ट्रेनिंग दी जाती है। इससे मादाओं को टारगेट प्रैक्टिस में निपुण होने पर उनके रोजमर्रा के कार्यों में आसानी हो जाती है।
सभी हथिनियों का रखा जा रहा विशेष ध्यान : परमजीत
वन्य प्राणी जीव विभाग के सब इंस्पेक्टर परमजीत सिंह ने बताया कि हाथी पुनर्वास केंद्र बन संतोर में सभी हथिनियों का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है। इनकी सुविधा के लिए सही पर्याप्त इंतजाम विभाग द्वारा कराए गए हैं। उनके नहाने व डाइट का विशेष ध्यान रखा जाता है।