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पूरी होगी ड्यूल डेस्क की कमी, बनेंगे कमरे, चाहरदिवारी व पक्के रास्ते
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के राजकीय उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में ड्यूल डेस्क की कमी पूरी होने के साथ जरूरत के अनुसार कमरे, चाददिवारी, पक्के रास्ते बनाए जाएंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने विद्यालयों की मांग का विवरण भेजने के आदेश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भी जारी कर दिया है।
बता दें कि खंड स्तर पर शिक्षा अधिकारी को ड्यूल डेस्क व अन्य सिविल वर्क की मांग बताने के लिए एक प्रफोर्मा दिया गया है। इसे खंड शिक्षा अधिकारी अपने अधीन आने वाले स्कूलों के मुखिया से भरवाएंगे। इस प्रफोर्मा में कक्षा एक से पांच, छह से आठ व नौ से 12 तक कुल विद्यार्थियों व ड्यूल डेस्क की कुल मांग पूछी गई है। इसमें ये भी पूछा गया है कि विद्यालय में प्रयोग किए जा रहे ड्यूल डेस्क की संख्या और मरम्मत के बाद कितने प्रयोग लायक बन सकते हैं, उनकी संख्या भी पूछी गई है।प्रफोर्मा पर सिविल वर्क के कॉलम में विद्यार्थियों की संख्या, चाहरदिवारी, पेयजल नलों व कक्षाओं के लिए कमरों की जरूरत व उनकी अनुमानित लागत पूछी गई है।
प्रयास किया जा रहा है कि राजकीय विद्यालयों में जरूरत के सभी काम कराए जाएं। ताकि स्टाफ व बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी ना आए।- सतपाल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, यमुुनानगर।
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यमुनानगर। जिले के राजकीय उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में ड्यूल डेस्क की कमी पूरी होने के साथ जरूरत के अनुसार कमरे, चाददिवारी, पक्के रास्ते बनाए जाएंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने विद्यालयों की मांग का विवरण भेजने के आदेश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भी जारी कर दिया है।
बता दें कि खंड स्तर पर शिक्षा अधिकारी को ड्यूल डेस्क व अन्य सिविल वर्क की मांग बताने के लिए एक प्रफोर्मा दिया गया है। इसे खंड शिक्षा अधिकारी अपने अधीन आने वाले स्कूलों के मुखिया से भरवाएंगे। इस प्रफोर्मा में कक्षा एक से पांच, छह से आठ व नौ से 12 तक कुल विद्यार्थियों व ड्यूल डेस्क की कुल मांग पूछी गई है। इसमें ये भी पूछा गया है कि विद्यालय में प्रयोग किए जा रहे ड्यूल डेस्क की संख्या और मरम्मत के बाद कितने प्रयोग लायक बन सकते हैं, उनकी संख्या भी पूछी गई है।प्रफोर्मा पर सिविल वर्क के कॉलम में विद्यार्थियों की संख्या, चाहरदिवारी, पेयजल नलों व कक्षाओं के लिए कमरों की जरूरत व उनकी अनुमानित लागत पूछी गई है।
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प्रयास किया जा रहा है कि राजकीय विद्यालयों में जरूरत के सभी काम कराए जाएं। ताकि स्टाफ व बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी ना आए।- सतपाल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, यमुुनानगर।
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