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Yamuna Nagar News: रोजगारपरक कोर्स में आए डेढ़ गुना आवेदन
Fri, 29 May 2026 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 29 May 2026 12:07 AM IST
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महाराजा अग्रसेन कॉलेज में आवेदन करने पहुंचे विद्यार्थी। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिले के महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आवेदन के लिए अंतिम तीन दिन शेष है। इस बार रेगुलर कोर्स में विद्यार्थियों की रूचि बेहद कम दिखाई दे रही है। वहीं रोजगारपरक कोर्सों में विद्यार्थियों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इन कोर्स में सीटों से डेढ़ गुना आवेदन हो चुके हैं।
जिले के सभी राजकीय व एडेड महाविद्यालयों में कुल 7018 सीटें हैं। इनमें से 2210 सीटें जिले के राजकीय महाविद्यालयों में हैं। आंकड़ों के अनुसार रेगुलर कोर्स की 3680 सीटों पर अभी तक 200 आवेदन भी नहीं पहुंचे हैं। दूसरी ओर रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की 1310 सीटों के लिए 2500 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। इससे साफ है कि विद्यार्थी अब पारंपरिक शिक्षा की बजाय ऐसे कोर्सों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनसे रोजगार मिलने की संभावना अधिक हो।
महाविद्यालयों में इन दिनों विद्यार्थियों और अभिभावकों की भीड़ देखने को मिल रही है। विद्यार्थी विभिन्न कोर्सों की जानकारी लेने के साथ भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर आवेदन कर रहे हैं। बीबीए, बीसीए, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, फैशन डिजाइनिंग, होटल मैनेजमेंट, बीसीए एआई सहित अन्य कौशल आधारित कोर्सों के प्रति युवाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
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शिक्षाविदों का मानना है कि बदलते दौर में विद्यार्थियों की सोच भी बदली है। अब युवा ऐसे पाठ्यक्रम चुनना चाहते हैं, जिनसे पढ़ाई पूरी होते ही रोजगार या स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। यही कारण है कि पारंपरिक बीए, बीकॉम और बीएससी इत्यादि रेगुलर कोर्स विद्यार्थियों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। नई शिक्षा नीति में भी कौशल आधारित शिक्षा को महत्व दिया गया है।
महाविद्यालय प्रबंधक समितियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया के अंतिम दिनों में आवेदन संख्या बढ़ने की संभावना रहती है, परंतु वर्तमान स्थिति को देखते हुए रेगुलर कोर्स की सभी सीटें भरना चुनौती बना हुआ है। दूसरी तरफ रोजगारपरक कोर्सों में सीटें बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है।
शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. पीके वाजपेयी ने कहा कि नई शिक्षा नीति और बदलते रोजगार बाजार ने विद्यार्थियों की प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। अब डिग्री के साथ कौशल आधारित शिक्षा को अधिक महत्व दिया जा रहा है, जिसका असर कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया में साफ दिखाई दे रहा है।
महाविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया चल रही है। अंतिम दिनों में आवेदन प्रक्रिया में तेजी आई है। इस बार रेगुलर की अपेक्षा रोजगारपरक कोर्स की ओर ज्यादा रूझान है। इन कोर्स में अपेक्षाकृत ज्यादा आवेदन हुए हैं। तीन दिन में इन कोर्स में आवेदन और बढ़ेंगे। - सुमन भाटिया, जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। जिले के महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आवेदन के लिए अंतिम तीन दिन शेष है। इस बार रेगुलर कोर्स में विद्यार्थियों की रूचि बेहद कम दिखाई दे रही है। वहीं रोजगारपरक कोर्सों में विद्यार्थियों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इन कोर्स में सीटों से डेढ़ गुना आवेदन हो चुके हैं।
जिले के सभी राजकीय व एडेड महाविद्यालयों में कुल 7018 सीटें हैं। इनमें से 2210 सीटें जिले के राजकीय महाविद्यालयों में हैं। आंकड़ों के अनुसार रेगुलर कोर्स की 3680 सीटों पर अभी तक 200 आवेदन भी नहीं पहुंचे हैं। दूसरी ओर रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की 1310 सीटों के लिए 2500 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। इससे साफ है कि विद्यार्थी अब पारंपरिक शिक्षा की बजाय ऐसे कोर्सों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनसे रोजगार मिलने की संभावना अधिक हो।
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महाविद्यालयों में इन दिनों विद्यार्थियों और अभिभावकों की भीड़ देखने को मिल रही है। विद्यार्थी विभिन्न कोर्सों की जानकारी लेने के साथ भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर आवेदन कर रहे हैं। बीबीए, बीसीए, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, फैशन डिजाइनिंग, होटल मैनेजमेंट, बीसीए एआई सहित अन्य कौशल आधारित कोर्सों के प्रति युवाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
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शिक्षाविदों का मानना है कि बदलते दौर में विद्यार्थियों की सोच भी बदली है। अब युवा ऐसे पाठ्यक्रम चुनना चाहते हैं, जिनसे पढ़ाई पूरी होते ही रोजगार या स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। यही कारण है कि पारंपरिक बीए, बीकॉम और बीएससी इत्यादि रेगुलर कोर्स विद्यार्थियों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। नई शिक्षा नीति में भी कौशल आधारित शिक्षा को महत्व दिया गया है।
महाविद्यालय प्रबंधक समितियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया के अंतिम दिनों में आवेदन संख्या बढ़ने की संभावना रहती है, परंतु वर्तमान स्थिति को देखते हुए रेगुलर कोर्स की सभी सीटें भरना चुनौती बना हुआ है। दूसरी तरफ रोजगारपरक कोर्सों में सीटें बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है।
शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. पीके वाजपेयी ने कहा कि नई शिक्षा नीति और बदलते रोजगार बाजार ने विद्यार्थियों की प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। अब डिग्री के साथ कौशल आधारित शिक्षा को अधिक महत्व दिया जा रहा है, जिसका असर कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया में साफ दिखाई दे रहा है।
महाविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया चल रही है। अंतिम दिनों में आवेदन प्रक्रिया में तेजी आई है। इस बार रेगुलर की अपेक्षा रोजगारपरक कोर्स की ओर ज्यादा रूझान है। इन कोर्स में अपेक्षाकृत ज्यादा आवेदन हुए हैं। तीन दिन में इन कोर्स में आवेदन और बढ़ेंगे। - सुमन भाटिया, जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी।