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बुजुर्गों को सम्मान देना जरूरी : डॉ. दहिया
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अंतरराष्ट्रीय वृद्धावस्था दिवस कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य कर्मचारी व अन्य। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय वृद्धावस्था दिवस पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सिविल सर्जन विजय दहिया ने कहा कि आधुनिक युग में हमें अपने मूल्यों, मर्यादाओं, परंपराओं को सम्मान देना चाहिए। हमारे बुजुर्ग ही हमें उनके बारे में बताते हैं। जितनी आवश्यकता आज हमारे समाज को शिक्षा व स्कूलों की है, उतनी ही आवश्यकता हमें अपने बुजुर्गों को सम्मान देने की भी है।
उन्होंने यह प्रकृति का नियम है कि जो बच्चा कल जवान होगा वो बूढ़ा होगा। यह कालचक्र है जो चलता आ रहा है और चलता जाएगा। इस सच से कोई नहीं बच सका है और न ही कोई बच सकता है। यदि हम आज अपने बुजुर्गों का सम्मान, सेवा नहीं करेंगे तो कल हमारी आने वाली पीढ़ि भी हमसे वैसा ही व्यवहार करेगी, इसलिए सदैव अपने बुजुर्गों का सम्मान व सेवा करें और अपने बच्चों को बचपन से ही बड़ों को आदर व छोटों को प्रेम का पाठ पढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को भी अपने बच्चों का सहयोग करना चाहिए। घर के छोटे-छोटे कामों में बच्चों का सहयोग करें, ताकि बच्चे उन्हें बोझ न समझे। वहीं काम में मन लगाने से व्यर्थ के तनाव दूर होंगे। परिवारिक सदस्यों में निकटता आएगी। डॉ. दहिया ने कहा कि प्रत्येक वृद्ध को सुबह व शाम पार्क में जाकर सूक्ष्म योग क्रियाएं करनी चाहिए। जिससे वृद्धावस्था में भी वे स्वस्थ रहें। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में रोगों से बचने के लिए नियमित रूप से योगाभ्यास करना चाहिए।
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इस दौरान 20 जरूरतमंद बुजुर्गों को सहायक उपकरण जैसे छड़ी, वॉकर, घुटनों के लिए नी कैप व कमर की बेल्ट वितरित की गई। कार्यक्रम में प्रधान चिकित्सा अधिकारी सुनिल कुमार, उप सिविल सर्जन दीपिका, सामान्य रोग चिकित्सक नितिन, डॉ. पुनित कालरा ने भी लोगों को संबोधित किया। इस दौरान बोबेश पंजेटा, शिल्पा पुनयानी, दीप्ती शर्मा, फिजियोथेरिपिस्ट मनिंद्र, नमिता, हरपाल सिंह, सीमा, बलजिंद्र व सहित अस्पताल का स्टाफ उपस्थित रहा।
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यमुनानगर। नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय वृद्धावस्था दिवस पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सिविल सर्जन विजय दहिया ने कहा कि आधुनिक युग में हमें अपने मूल्यों, मर्यादाओं, परंपराओं को सम्मान देना चाहिए। हमारे बुजुर्ग ही हमें उनके बारे में बताते हैं। जितनी आवश्यकता आज हमारे समाज को शिक्षा व स्कूलों की है, उतनी ही आवश्यकता हमें अपने बुजुर्गों को सम्मान देने की भी है।
उन्होंने यह प्रकृति का नियम है कि जो बच्चा कल जवान होगा वो बूढ़ा होगा। यह कालचक्र है जो चलता आ रहा है और चलता जाएगा। इस सच से कोई नहीं बच सका है और न ही कोई बच सकता है। यदि हम आज अपने बुजुर्गों का सम्मान, सेवा नहीं करेंगे तो कल हमारी आने वाली पीढ़ि भी हमसे वैसा ही व्यवहार करेगी, इसलिए सदैव अपने बुजुर्गों का सम्मान व सेवा करें और अपने बच्चों को बचपन से ही बड़ों को आदर व छोटों को प्रेम का पाठ पढ़ाएं।
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उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को भी अपने बच्चों का सहयोग करना चाहिए। घर के छोटे-छोटे कामों में बच्चों का सहयोग करें, ताकि बच्चे उन्हें बोझ न समझे। वहीं काम में मन लगाने से व्यर्थ के तनाव दूर होंगे। परिवारिक सदस्यों में निकटता आएगी। डॉ. दहिया ने कहा कि प्रत्येक वृद्ध को सुबह व शाम पार्क में जाकर सूक्ष्म योग क्रियाएं करनी चाहिए। जिससे वृद्धावस्था में भी वे स्वस्थ रहें। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में रोगों से बचने के लिए नियमित रूप से योगाभ्यास करना चाहिए।
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इस दौरान 20 जरूरतमंद बुजुर्गों को सहायक उपकरण जैसे छड़ी, वॉकर, घुटनों के लिए नी कैप व कमर की बेल्ट वितरित की गई। कार्यक्रम में प्रधान चिकित्सा अधिकारी सुनिल कुमार, उप सिविल सर्जन दीपिका, सामान्य रोग चिकित्सक नितिन, डॉ. पुनित कालरा ने भी लोगों को संबोधित किया। इस दौरान बोबेश पंजेटा, शिल्पा पुनयानी, दीप्ती शर्मा, फिजियोथेरिपिस्ट मनिंद्र, नमिता, हरपाल सिंह, सीमा, बलजिंद्र व सहित अस्पताल का स्टाफ उपस्थित रहा।