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Yamuna Nagar News: अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के बारे में दी गई जानकारी
Sat, 18 Jul 2026 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 18 Jul 2026 12:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। वर्ल्ड इंटरनेशनल जस्टिस डे के अवसर पर जाट सभा ने जाटनगर में कार्यक्रम का आयोजन किया। सभा के प्रधान एडवोकेट सुरेशपाल बंचल ने अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के गठन की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 17 जुलाई 1998 को 120 से अधिक देशों ने मिलकर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों, नरसंहार और युद्ध अपराधों जैसे मामलों की सुनवाई करना है। एक जुलाई 2002 से इस न्यायालय ने अपना काम शुरू किया था।
उन्होंने बताया कि हालांकि भारत रोम संधि का हिस्सा नहीं है, जिसके तहत इस न्यायालय की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र के गठन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए एक स्थायी न्यायालय बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। नौ दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने नरसंहार को अंतरराष्ट्रीय अपराध मानते हुए प्रस्ताव पारित किया था।
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इसके बाद इंटरनेशनल लॉ कमीशन से न्यायालय के गठन को लेकर सुझाव मांगे गए। वर्ष 1953 में एक प्रारूप तैयार किया गया। वर्ष 1993 में युगोस्लाविया में हुए गृह युद्ध और जातीय हिंसा के बाद स्थायी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की मांग तेज हुई। लंबे विचार-विमर्श के बाद अप्रैल 1998 में न्यायालय की स्थापना का प्रारूप तैयार हुआ और 17 जुलाई को रोम संधि को अपनाया गया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था मानवता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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रादौर। वर्ल्ड इंटरनेशनल जस्टिस डे के अवसर पर जाट सभा ने जाटनगर में कार्यक्रम का आयोजन किया। सभा के प्रधान एडवोकेट सुरेशपाल बंचल ने अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के गठन की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 17 जुलाई 1998 को 120 से अधिक देशों ने मिलकर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों, नरसंहार और युद्ध अपराधों जैसे मामलों की सुनवाई करना है। एक जुलाई 2002 से इस न्यायालय ने अपना काम शुरू किया था।
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उन्होंने बताया कि हालांकि भारत रोम संधि का हिस्सा नहीं है, जिसके तहत इस न्यायालय की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र के गठन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए एक स्थायी न्यायालय बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। नौ दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने नरसंहार को अंतरराष्ट्रीय अपराध मानते हुए प्रस्ताव पारित किया था।
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इसके बाद इंटरनेशनल लॉ कमीशन से न्यायालय के गठन को लेकर सुझाव मांगे गए। वर्ष 1953 में एक प्रारूप तैयार किया गया। वर्ष 1993 में युगोस्लाविया में हुए गृह युद्ध और जातीय हिंसा के बाद स्थायी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की मांग तेज हुई। लंबे विचार-विमर्श के बाद अप्रैल 1998 में न्यायालय की स्थापना का प्रारूप तैयार हुआ और 17 जुलाई को रोम संधि को अपनाया गया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था मानवता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।