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आदिबद्री में तेंदुए का आतंक
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
Updated Fri, 25 Jul 2014 12:25 AM IST
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यमुनानगर/बिलासपुर। घाड़ क्षेत्र के आदिबद्री में जंगल से आई एक मादा तेंदुए ने इन दिनो आतंक मचाया हुआ है। चार दिन में तेंदुआ तीन पशुओं को अपना शिकार बना चुका है। ग्रामीण पालतू पशुओं पर तेंदुए के हमलों से खौफजदा हैं। तेंदुए के डर से ग्रामीणों को न दिन में चैन है और रात में नींद आ रही है।
उधर, विभाग ने मौके पर मिले पैरों के निशान देखकर तेंदुए की पुष्टि तो की, लेकिन तेंदुए की तलाश और उसे पकड़कर जंगल छोड़ने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। विभाग की ओर से ग्रामीणों को महज एहतियात बरतने की सलाह देते हुए तेंदुए के खुद-ब-खुद जंगल लौट जाने की बात कही जा रही है।
घाड़ क्षेत्र में आदिबद्री नारायण मंदिर के समीप रहने वाले ग्रामीणों की मानें तो चार दिन पहले क्षेत्र में एक मादा तेंदुए और उसके साथ उसके दो बच्चों के नजर आने पर भय का माहौल बन गया था। इसके बाद लोग शाम होते ही अपने घरों में दुबके थे। ग्रामीणाें ने मादा तेंदुए के नजर आने पर इसकी सूचना वन विभाग को दी थी, लेकिन विभाग ने मौके पर तेंदुए की तलाश करने और उसे पकड़ने की जहमत नहीं उठाई। इसके बाद एक के बाद एक मादा तेंदुए ने चार दिन में तीन पशुओं कुत्ते, बकरी और बछड़े को अपना शिकार बना लिया है।
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ग्रामीण प्रेमचंद, राम सिंह ने बताया कि वह आदिबद्री नारायण मंदिर जाने वाले मार्ग पर बाग के समीप स्थित घरों में रहते हैं। पिछले तीन-चार दिनों से एक मादा तेंदुआ जंगल से आ गई है और उनके पालतु पशुओं पर हमला कर उन्हें मारकर अपने साथ ले जा रही है। उन्होंने कहा कि लगभग तीन दिन पूर्व देर शाम मादा तेंदुआ उनके घर के समीप आकर पालतू कुत्ते को जंगल की ओर ले गई। अगले दिन शाम पांच से छह बजे के बीच मादा तेंदुआ फिर उनकी बकरी और रात में उनके घर के समीप बंधे बछडे पर हमला कर उसे अपने साथ ले गई। सुबह जब उन्हाेंने उसकी तलाश की तो वह बछड़ा मृत अवस्था में घर से दूर मुख्य मार्ग से समीप मिला। इससे ग्रामीणाें में भय व्याप्त हैं।
खुद चली जाएगी, एहतियात बरतें ग्रामीण
वाइल्ड लाइफ विभाग के कर्मचारी आर चहल ने मौके से मिले पैरों के निशान के आधार पर क्षेत्र में तेंदुए के होने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस प्रकार से जंगली जानवर अकसर खाने की तलाश में जंगल से आबादी वाले क्षेत्र की ओर रूखकर जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद यह स्वयं ही जंगलों में चली जाएगी। ऐसे में ग्रामीण रात के समय घराें से बाहर न निकलें और जब जाएं तो हाथ में डंडा या अन्य हथियार अवश्य रखें।
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उधर, विभाग ने मौके पर मिले पैरों के निशान देखकर तेंदुए की पुष्टि तो की, लेकिन तेंदुए की तलाश और उसे पकड़कर जंगल छोड़ने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। विभाग की ओर से ग्रामीणों को महज एहतियात बरतने की सलाह देते हुए तेंदुए के खुद-ब-खुद जंगल लौट जाने की बात कही जा रही है।
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घाड़ क्षेत्र में आदिबद्री नारायण मंदिर के समीप रहने वाले ग्रामीणों की मानें तो चार दिन पहले क्षेत्र में एक मादा तेंदुए और उसके साथ उसके दो बच्चों के नजर आने पर भय का माहौल बन गया था। इसके बाद लोग शाम होते ही अपने घरों में दुबके थे। ग्रामीणाें ने मादा तेंदुए के नजर आने पर इसकी सूचना वन विभाग को दी थी, लेकिन विभाग ने मौके पर तेंदुए की तलाश करने और उसे पकड़ने की जहमत नहीं उठाई। इसके बाद एक के बाद एक मादा तेंदुए ने चार दिन में तीन पशुओं कुत्ते, बकरी और बछड़े को अपना शिकार बना लिया है।
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ग्रामीण प्रेमचंद, राम सिंह ने बताया कि वह आदिबद्री नारायण मंदिर जाने वाले मार्ग पर बाग के समीप स्थित घरों में रहते हैं। पिछले तीन-चार दिनों से एक मादा तेंदुआ जंगल से आ गई है और उनके पालतु पशुओं पर हमला कर उन्हें मारकर अपने साथ ले जा रही है। उन्होंने कहा कि लगभग तीन दिन पूर्व देर शाम मादा तेंदुआ उनके घर के समीप आकर पालतू कुत्ते को जंगल की ओर ले गई। अगले दिन शाम पांच से छह बजे के बीच मादा तेंदुआ फिर उनकी बकरी और रात में उनके घर के समीप बंधे बछडे पर हमला कर उसे अपने साथ ले गई। सुबह जब उन्हाेंने उसकी तलाश की तो वह बछड़ा मृत अवस्था में घर से दूर मुख्य मार्ग से समीप मिला। इससे ग्रामीणाें में भय व्याप्त हैं।
खुद चली जाएगी, एहतियात बरतें ग्रामीण
वाइल्ड लाइफ विभाग के कर्मचारी आर चहल ने मौके से मिले पैरों के निशान के आधार पर क्षेत्र में तेंदुए के होने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस प्रकार से जंगली जानवर अकसर खाने की तलाश में जंगल से आबादी वाले क्षेत्र की ओर रूखकर जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद यह स्वयं ही जंगलों में चली जाएगी। ऐसे में ग्रामीण रात के समय घराें से बाहर न निकलें और जब जाएं तो हाथ में डंडा या अन्य हथियार अवश्य रखें।