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Yamuna Nagar News: नोटिस के जवाब में स्कूलों ने विभाग को थमाई अदालत में दायर याचिका
Sat, 25 Apr 2026 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:51 PM IST
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जिला शिक्षा सदन। आर्काइव
अभय सिंह
जगाधरी। जिले में शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों के बीच की तल्खी अब और तेज होती नजर आ रही है। निरीक्षण के दौरान विभाग ने स्कूलों को अनियमितताओं के आरोप में नोटिस देकर जवाब मांगा था। निजी स्कूल एसोसिएशन की ओर से नोटिस के जवाब में जिला प्रशासन को 2021 में दायर एक याचिका की कॉपी थमा दी है और विभाग की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके बाद विभाग ने अब स्कूलों के इस कानूनी तिकड़म का जवाब देने के लिए विभागीय पैंतरा अपना शुरू कर दिया है। यदि विभाग अपने नियमों व कानून का सही दिशा में पालन करता है तो निजी स्कूलों का पैंतरा औंधे मुंह पड़ेगा। चूंकि निजी स्कूल ने 2021 में उच्च न्यायालय में डाल जिस याचिका का जिक्र किया है उस पर कोई सुनवाई हुई नहीं है। बल्कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए हैं।
इसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है। इस याचिका में निजी स्कूलों की एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय में एनसीईआरटी के साथ अन्य किताबें लगाने की अनुमति देने की गुहार लगाई थी। न्यायालय ने इस याचिका पर न स्टेट दिया, न निर्णय दिया और न ही कोई टिप्पणी की। न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए थे। उसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है।
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निजी स्कूल इस याचिका की आड़ में मनमानी कर रहे हैं। विभाग की सख्ती के बाद उच्च न्यायालय में दायर की इस याचिका को निजी स्कूल ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। निजी स्कूल एसोसिएशन की ओर से इस याचिका कॉपी डीसी को भेजी गई थी। डीसी ने शिक्षा विभाग को भेज दी है।
स्कूलों के इस पैंतरे ने शिक्षा विभाग की साख दांव पर लग गई है, चूंकि एसोसिएशन ने अधिकारियों व विभाग पर दबाव के लिए यह तरीका अपनाया है। निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावक प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और अधिकारी पीछे हटते हैं तो विभाग की साख खराब होगी। ऐसे में याचिका की कॉपी मिलने के बाद विभाग की कानूनी विशेषज्ञों की टीम सक्रिय हो गई है। बिना किसी निर्णय के यथावत स्थिति है और स्कूलों को नियमों का पालन करना ही पड़ेगा। संवाद
निजी स्कूलों ने तोड़े नियम
निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा निदेशालय और सरकार के नियम तोड़े हैं। ऐसे में मान्यता रद्द होने तक की कार्रवाई की जा सकती है। एक यह है कि आठ दिसंबर 2021 नियम 158 के उपनियम छह के अनुसार किताबें, वर्दी व अन्य सामग्री किसी एक दुकान से खरीदने के बाध्य नहीं कर सकता है। यही नहीं स्कूल इसके लिए किसी तरह का सुझाव नहीं दे सकते हैं। वहीं, स्कूलों में किताबों की सूची भी सार्वजनिक नहीं की है।
निजी स्कूलों की ओर से उच्च न्यायालय में दायर याचिका की कॉपी विभाग को दी है। इसमें किसी प्रकार के आदेश नहीं है। स्कूलों विभाग की लीगल टीम उत्तर देगी। नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। - प्रेमलता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। जिले में शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों के बीच की तल्खी अब और तेज होती नजर आ रही है। निरीक्षण के दौरान विभाग ने स्कूलों को अनियमितताओं के आरोप में नोटिस देकर जवाब मांगा था। निजी स्कूल एसोसिएशन की ओर से नोटिस के जवाब में जिला प्रशासन को 2021 में दायर एक याचिका की कॉपी थमा दी है और विभाग की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके बाद विभाग ने अब स्कूलों के इस कानूनी तिकड़म का जवाब देने के लिए विभागीय पैंतरा अपना शुरू कर दिया है। यदि विभाग अपने नियमों व कानून का सही दिशा में पालन करता है तो निजी स्कूलों का पैंतरा औंधे मुंह पड़ेगा। चूंकि निजी स्कूल ने 2021 में उच्च न्यायालय में डाल जिस याचिका का जिक्र किया है उस पर कोई सुनवाई हुई नहीं है। बल्कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए हैं।
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इसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है। इस याचिका में निजी स्कूलों की एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय में एनसीईआरटी के साथ अन्य किताबें लगाने की अनुमति देने की गुहार लगाई थी। न्यायालय ने इस याचिका पर न स्टेट दिया, न निर्णय दिया और न ही कोई टिप्पणी की। न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए थे। उसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है।
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निजी स्कूल इस याचिका की आड़ में मनमानी कर रहे हैं। विभाग की सख्ती के बाद उच्च न्यायालय में दायर की इस याचिका को निजी स्कूल ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। निजी स्कूल एसोसिएशन की ओर से इस याचिका कॉपी डीसी को भेजी गई थी। डीसी ने शिक्षा विभाग को भेज दी है।
स्कूलों के इस पैंतरे ने शिक्षा विभाग की साख दांव पर लग गई है, चूंकि एसोसिएशन ने अधिकारियों व विभाग पर दबाव के लिए यह तरीका अपनाया है। निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावक प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और अधिकारी पीछे हटते हैं तो विभाग की साख खराब होगी। ऐसे में याचिका की कॉपी मिलने के बाद विभाग की कानूनी विशेषज्ञों की टीम सक्रिय हो गई है। बिना किसी निर्णय के यथावत स्थिति है और स्कूलों को नियमों का पालन करना ही पड़ेगा। संवाद
निजी स्कूलों ने तोड़े नियम
निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा निदेशालय और सरकार के नियम तोड़े हैं। ऐसे में मान्यता रद्द होने तक की कार्रवाई की जा सकती है। एक यह है कि आठ दिसंबर 2021 नियम 158 के उपनियम छह के अनुसार किताबें, वर्दी व अन्य सामग्री किसी एक दुकान से खरीदने के बाध्य नहीं कर सकता है। यही नहीं स्कूल इसके लिए किसी तरह का सुझाव नहीं दे सकते हैं। वहीं, स्कूलों में किताबों की सूची भी सार्वजनिक नहीं की है।
निजी स्कूलों की ओर से उच्च न्यायालय में दायर याचिका की कॉपी विभाग को दी है। इसमें किसी प्रकार के आदेश नहीं है। स्कूलों विभाग की लीगल टीम उत्तर देगी। नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। - प्रेमलता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।