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Yamuna Nagar News: स्कूलों पर निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने की कार्रवाई कानूनी पेज में फंसी
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जिला शिक्षा सदन। संवाद
- फोटो : 1
अभय सिंह
जगाधरी। निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूलों में लगाने के मामले में शिक्षा विभाग की कार्रवाई कानूनी पेच में फंस गई है। विभाग की ओर से संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने जवाब में वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में दायर याचिका की प्रति प्रस्तुत कर दी। स्कूलों की ओर से दायर याचिका पर अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने मामले में प्रधान सचिव को निर्णय लेने के आदेश दिए थे। ऐसे में मुख्य सचिव के स्तर पर निर्णय लंबित होने के कारण शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई भी अटक गई है। वहीं, विभाग की ओर से कार्रवाई न होने के कारण स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें ही नहीं बल्कि नाम लिखी कॉपियां, डायरी सहित अन्य सामग्री भी इस्तेमाल की जा रही है।
स्कूल पर कार्रवाई न होने के कारण नियमों के विरूद्ध होने के बावजूद अभिभावक स्कूलों से कॉपियां व स्टेशनरी खरीदने को मजबूर हैं। वहीं, आधा सत्र बीत जाने के बाद भी निदेशालय की ओर से विभाग की शिकायत पर कोई अमल नहीं किया गया है। जिला शिक्षा विभाग स्कूलों पर कार्रवाई करने के लिए निदेशालय के आदेशों का इंतजार कर रहा है। इस तरह निजी स्कूलों पर कार्रवाई में कानूनी पेंच फंस गया है। हालांकि विभाग ने अब स्कूलों के इस कानूनी तिकड़म का जवाब देने के लिए विभागीय पैंतरा अपना शुरू कर दिया है।
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यदि विभाग अपने नियमों व कानून का सही दिशा में पालन करता है तो निजी स्कूलों का पैंतरा औंधे मुंह पड़ेगा। चूंकि निजी स्कूल ने 2021 में उच्च न्यायालय में डाल जिस याचिका का जिक्र किया है उस पर कोई सुनवाई हुई नहीं है। बल्कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए हैं। इसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है। इस याचिका में निजी स्कूलों की एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय में एनसीईआरटी के साथ अन्य किताबें लगाने की अनुमति देने की गुहार लगाई थी। न्यायालय ने इस याचिका पर न स्टेट दिया, न निर्णय दिया और न ही कोई टिप्पणी की। न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए थे। उसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है।
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निजी स्कूलों ने तोड़े नियम
निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा निदेशालय और सरकार के नियम तोड़े हैं। ऐसे में मान्यता रद्द होने तक की कार्रवाई की जा सकती है। एक यह है कि आठ दिसंबर 2021 नियम 158 के उपनियम छह के अनुसार किताबें, वर्दी व अन्य सामग्री किसी एक दुकान से खरीदने के बाध्य नहीं कर सकता है। यही नहीं स्कूल इसके लिए किसी तरह का सुझाव नहीं दे सकते हैं। वहीं, स्कूलों में किताबों की सूची भी सार्वजनिक नहीं की है।
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निजी स्कूलों की ओर से उच्च न्यायालय में दायर याचिका की कॉपी विभाग को दी है। इसमें किसी प्रकार के आदेश नहीं है। स्कूलों विभाग की लीगल टीम उत्तर देगी। नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। इसके लिए निदेशालय से आदेश मांगे गए हैं।
- प्रेमलता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। निजी प्रकाशकों की किताबें स्कूलों में लगाने के मामले में शिक्षा विभाग की कार्रवाई कानूनी पेच में फंस गई है। विभाग की ओर से संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने जवाब में वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में दायर याचिका की प्रति प्रस्तुत कर दी। स्कूलों की ओर से दायर याचिका पर अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने मामले में प्रधान सचिव को निर्णय लेने के आदेश दिए थे। ऐसे में मुख्य सचिव के स्तर पर निर्णय लंबित होने के कारण शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई भी अटक गई है। वहीं, विभाग की ओर से कार्रवाई न होने के कारण स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें ही नहीं बल्कि नाम लिखी कॉपियां, डायरी सहित अन्य सामग्री भी इस्तेमाल की जा रही है।
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स्कूल पर कार्रवाई न होने के कारण नियमों के विरूद्ध होने के बावजूद अभिभावक स्कूलों से कॉपियां व स्टेशनरी खरीदने को मजबूर हैं। वहीं, आधा सत्र बीत जाने के बाद भी निदेशालय की ओर से विभाग की शिकायत पर कोई अमल नहीं किया गया है। जिला शिक्षा विभाग स्कूलों पर कार्रवाई करने के लिए निदेशालय के आदेशों का इंतजार कर रहा है। इस तरह निजी स्कूलों पर कार्रवाई में कानूनी पेंच फंस गया है। हालांकि विभाग ने अब स्कूलों के इस कानूनी तिकड़म का जवाब देने के लिए विभागीय पैंतरा अपना शुरू कर दिया है।
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यदि विभाग अपने नियमों व कानून का सही दिशा में पालन करता है तो निजी स्कूलों का पैंतरा औंधे मुंह पड़ेगा। चूंकि निजी स्कूल ने 2021 में उच्च न्यायालय में डाल जिस याचिका का जिक्र किया है उस पर कोई सुनवाई हुई नहीं है। बल्कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए हैं। इसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है। इस याचिका में निजी स्कूलों की एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय में एनसीईआरटी के साथ अन्य किताबें लगाने की अनुमति देने की गुहार लगाई थी। न्यायालय ने इस याचिका पर न स्टेट दिया, न निर्णय दिया और न ही कोई टिप्पणी की। न्यायालय ने इस मामले में प्रधान सचिव को निर्णय देने के आदेश दिए थे। उसके बाद से यह याचिका प्रधान सचिव के पास लंबित है।
निजी स्कूलों ने तोड़े नियम
निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा निदेशालय और सरकार के नियम तोड़े हैं। ऐसे में मान्यता रद्द होने तक की कार्रवाई की जा सकती है। एक यह है कि आठ दिसंबर 2021 नियम 158 के उपनियम छह के अनुसार किताबें, वर्दी व अन्य सामग्री किसी एक दुकान से खरीदने के बाध्य नहीं कर सकता है। यही नहीं स्कूल इसके लिए किसी तरह का सुझाव नहीं दे सकते हैं। वहीं, स्कूलों में किताबों की सूची भी सार्वजनिक नहीं की है।
निजी स्कूलों की ओर से उच्च न्यायालय में दायर याचिका की कॉपी विभाग को दी है। इसमें किसी प्रकार के आदेश नहीं है। स्कूलों विभाग की लीगल टीम उत्तर देगी। नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। इसके लिए निदेशालय से आदेश मांगे गए हैं।
- प्रेमलता बक्शी, जिला शिक्षा अधिकारी।