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Yamuna Nagar News: 251 गांवों में हर साल 2-3 फीट नीचे जा रहा जलस्तर
Sun, 11 Jan 2026 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:34 AM IST
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शक्ति नगर वेंडिंग जोन में व्यर्थ बहता पेयजल। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में भूजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले के 251 गांवों में भूजल स्तर हर साल औसतन दो से तीन फीट तक नीचे खिसक रहा है। यह गिरावट न केवल खेती और पेयजल व्यवस्था के लिए खतरा बन रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लॉकों के गांवों में सामने आई है, जहां कई जगह ट्यूबवेल भी जवाब देने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में जिले का बड़ा हिस्सा गहरे भूजल संकट की चपेट में आ सकता है।
भूजल विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2002 में जिले में औसतन भूजल गहराई करीब 40 फीट थी। वर्ष 2022 तक यह बढ़कर 87 फीट तक पहुंच गई। यही रफ्तार बनी रही तो वर्ष 2047 में भूजल स्तर 146 फीट और वर्ष 2100 तक 271 फीट तक नीचे जाने की आशंका है। यह स्थिति चौवा यानी अत्यधिक गहरे जलस्तर की ओर इशारा करती है, जहां पानी निकालना बेहद कठिन और खर्चीला हो जाएगा।
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जगाधरी ब्लॉक के अहलुवाला, अकालगढ़, अमादलपुर, दामला, दूधला, फतेहपुर, गोलनपुर, हाफिजपुर, हरियाबांस, मंडी, नगला जागीर, रामपुर माजरा, सुखपुरा, तिगरा और टोडरपुर सहित दर्जनों गांवों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। कई किसानों को पुराने ट्यूबवेल बंद कर नए और गहरे बोर करवाने पड़ रहे हैं, जिससे लागत भी तेजी से बढ़ रही है।
रादौर ब्लॉक के अलाहर, भपौली, भगवानगढ़, घिलौर, गुमथला, जठलाना, कंडरौली, मोहड़ी, नागल, रतनगढ़, सढूरा, सिल्लीकलां, टस्का खेदर और टोपराकलां जैसे गांवों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल होता जा रहा है। वहीं साढौरा ब्लॉक के असगरपुर, बकाला, गलौरी, इस्लाम नगर, कनिपला, कोटला, नन्हेड़ी, नौसेरा, राजपुर, रसूलपुर, साढौरा नदीपार और शामपुर सहित कई गांवों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
सरस्वतीनगर ब्लॉक में अकबरपुर, भोगपुर, गधौला, गुंदियाना, हसनपुर, मुस्तफाबाद, नगला जागीर, रामगढ़, सुल्तानपुर, टोपरा खुर्द और ऊंचा चंदना जैसे गांवों में भी यही हालात हैं।
अटल भूजल योजना से उम्मीद
भूजल संकट को देखते हुए सरकार की ओर से अटल भूजल योजना लागू की गई है। इसके तहत लोगों को पानी बचाने, वर्षा जल संचयन, कम पानी वाली फसलों को अपनाने और अनावश्यक दोहन रोकने के लिए जागरूक किया जा रहा है। गांव स्तर पर बैठकों और अभियानों के माध्यम से किसानों व आमजन को समझाया जा रहा है कि यदि आज पानी नहीं बचाया गया तो कल हालात और भयावह होंगे।
भूजल जल को लेकर हमारी टीमें लगातार फील्ड में जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। इसके अलावा जिन पंचायतों में भूजल स्तर नीचे है, उनपर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। -रवि मित्तल, एसई, सिंचाई विभाग।
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यमुनानगर। जिले में भूजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले के 251 गांवों में भूजल स्तर हर साल औसतन दो से तीन फीट तक नीचे खिसक रहा है। यह गिरावट न केवल खेती और पेयजल व्यवस्था के लिए खतरा बन रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लॉकों के गांवों में सामने आई है, जहां कई जगह ट्यूबवेल भी जवाब देने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में जिले का बड़ा हिस्सा गहरे भूजल संकट की चपेट में आ सकता है।
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भूजल विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2002 में जिले में औसतन भूजल गहराई करीब 40 फीट थी। वर्ष 2022 तक यह बढ़कर 87 फीट तक पहुंच गई। यही रफ्तार बनी रही तो वर्ष 2047 में भूजल स्तर 146 फीट और वर्ष 2100 तक 271 फीट तक नीचे जाने की आशंका है। यह स्थिति चौवा यानी अत्यधिक गहरे जलस्तर की ओर इशारा करती है, जहां पानी निकालना बेहद कठिन और खर्चीला हो जाएगा।
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जगाधरी ब्लॉक के अहलुवाला, अकालगढ़, अमादलपुर, दामला, दूधला, फतेहपुर, गोलनपुर, हाफिजपुर, हरियाबांस, मंडी, नगला जागीर, रामपुर माजरा, सुखपुरा, तिगरा और टोडरपुर सहित दर्जनों गांवों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। कई किसानों को पुराने ट्यूबवेल बंद कर नए और गहरे बोर करवाने पड़ रहे हैं, जिससे लागत भी तेजी से बढ़ रही है।
रादौर ब्लॉक के अलाहर, भपौली, भगवानगढ़, घिलौर, गुमथला, जठलाना, कंडरौली, मोहड़ी, नागल, रतनगढ़, सढूरा, सिल्लीकलां, टस्का खेदर और टोपराकलां जैसे गांवों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल होता जा रहा है। वहीं साढौरा ब्लॉक के असगरपुर, बकाला, गलौरी, इस्लाम नगर, कनिपला, कोटला, नन्हेड़ी, नौसेरा, राजपुर, रसूलपुर, साढौरा नदीपार और शामपुर सहित कई गांवों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
सरस्वतीनगर ब्लॉक में अकबरपुर, भोगपुर, गधौला, गुंदियाना, हसनपुर, मुस्तफाबाद, नगला जागीर, रामगढ़, सुल्तानपुर, टोपरा खुर्द और ऊंचा चंदना जैसे गांवों में भी यही हालात हैं।
अटल भूजल योजना से उम्मीद
भूजल संकट को देखते हुए सरकार की ओर से अटल भूजल योजना लागू की गई है। इसके तहत लोगों को पानी बचाने, वर्षा जल संचयन, कम पानी वाली फसलों को अपनाने और अनावश्यक दोहन रोकने के लिए जागरूक किया जा रहा है। गांव स्तर पर बैठकों और अभियानों के माध्यम से किसानों व आमजन को समझाया जा रहा है कि यदि आज पानी नहीं बचाया गया तो कल हालात और भयावह होंगे।
भूजल जल को लेकर हमारी टीमें लगातार फील्ड में जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। इसके अलावा जिन पंचायतों में भूजल स्तर नीचे है, उनपर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। -रवि मित्तल, एसई, सिंचाई विभाग।