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संगठन की शक्ति का महत्व बताया
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साप्ताहिक सत्संग में उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान साध्वी शिष्या ने श्रद्धालुओं को संगठन की शक्ति का महत्व बताया।
उन्होंने बताया कि जब ईश्वरीय सत्ता पृथ्वी पर अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करने के लिए गुरु रूप में अवतरित होती है, तब वह लोगों के लिए भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है, जिस मार्ग पर केवल वही आत्माएं चल पाती हैं, जिनमें स्वयं वह दिव्य सत्ता अपनी दिव्यता प्रकट करती हैं। उन पर कृपा करके उन्हें यह अवसर प्रदान करती है, ताकि वह संगठित होकर इस महान कार्य में योगदान देकर अपने कर्म संस्कारों के बंधनों से मुक्त हो जाएं।
साध्वी शिष्या ने बताया सतयुग में जब असुरों से आहत होकर सभी देवी देवता हाहाकार कर उठे, तब त्रिदेवों ने सभी देवी-देवताओं को संगठित होकर उस ईश्वरीय शक्ति का आह्वान करने के लिए प्रेरित किया। जब सभी ने संगठित होकर उस दैवीय सत्ता का आह्वान किया तब देवी भगवती मां दुर्गा के रूप में अवतरित हो गईं। मां दुर्गा ने राक्षसों का संहार करके सभी देवी देवताओं को अभयदान दिया।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की वानर सेना संगठन शक्ति का अद्भुत उदाहरण है। श्रीराम अकेले ही इतने सामर्थ्यवान थे कि वे मां सीता को मुक्त करवा सकते थे। वे सभी असुरों का नाश करने का सामर्थ्य रखते थे। परंतु उन्होंने वानर जाति को यह सेवा कार्य देकर सम्मानित किया और युगों युगों तक उनका नाम अमर कर दिया।
प्रभु सत्ता स्वयं पर्दे के पीछे रहकर अपने संगठन में चलने वाली सभी जीव आत्माओं को सेवा कार्य में लगा कर उनका कल्याण करती है। आज कलयुग में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान वह धरातल लेकर प्रकट हुआ है, जिस पर हम सभी संगठित होकर चलते हुए नवयुग के निर्माण में सहभागी बन सकते हैं। अपना नाम सदा के लिए इतिहास के पन्नों पर अंकित करने का सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान साध्वी शिष्या ने श्रद्धालुओं को संगठन की शक्ति का महत्व बताया।
उन्होंने बताया कि जब ईश्वरीय सत्ता पृथ्वी पर अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करने के लिए गुरु रूप में अवतरित होती है, तब वह लोगों के लिए भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है, जिस मार्ग पर केवल वही आत्माएं चल पाती हैं, जिनमें स्वयं वह दिव्य सत्ता अपनी दिव्यता प्रकट करती हैं। उन पर कृपा करके उन्हें यह अवसर प्रदान करती है, ताकि वह संगठित होकर इस महान कार्य में योगदान देकर अपने कर्म संस्कारों के बंधनों से मुक्त हो जाएं।
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साध्वी शिष्या ने बताया सतयुग में जब असुरों से आहत होकर सभी देवी देवता हाहाकार कर उठे, तब त्रिदेवों ने सभी देवी-देवताओं को संगठित होकर उस ईश्वरीय शक्ति का आह्वान करने के लिए प्रेरित किया। जब सभी ने संगठित होकर उस दैवीय सत्ता का आह्वान किया तब देवी भगवती मां दुर्गा के रूप में अवतरित हो गईं। मां दुर्गा ने राक्षसों का संहार करके सभी देवी देवताओं को अभयदान दिया।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की वानर सेना संगठन शक्ति का अद्भुत उदाहरण है। श्रीराम अकेले ही इतने सामर्थ्यवान थे कि वे मां सीता को मुक्त करवा सकते थे। वे सभी असुरों का नाश करने का सामर्थ्य रखते थे। परंतु उन्होंने वानर जाति को यह सेवा कार्य देकर सम्मानित किया और युगों युगों तक उनका नाम अमर कर दिया।
प्रभु सत्ता स्वयं पर्दे के पीछे रहकर अपने संगठन में चलने वाली सभी जीव आत्माओं को सेवा कार्य में लगा कर उनका कल्याण करती है। आज कलयुग में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान वह धरातल लेकर प्रकट हुआ है, जिस पर हम सभी संगठित होकर चलते हुए नवयुग के निर्माण में सहभागी बन सकते हैं। अपना नाम सदा के लिए इतिहास के पन्नों पर अंकित करने का सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं।