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Yamuna Nagar News: यमुना का जलस्तर घटने से पनबिजली योजनाएं बाधित
Fri, 29 May 2026 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 29 May 2026 12:34 AM IST
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हथिनीकुंड बैराज पर यमुना का जलस्तर। संवाद
संवाद न्यूज एजंसी
यमुनानगर/प्रतापनगर। भीषण गर्मी में हथिनीकुंड बैराज के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जिसका असर पनबिजली परियोजनाओं और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने लगा है। इसके साथ पड़ोसी राज्यों में भी जलसंकट के बादल मंडराने लगे हैं।
बैराज पर पानी कम होने के कारण पनबिजली परियोजना की ईकाइयां रोक-रोक कर चलाई जा रही हैं। इसके साथ पश्चिमी हरियाणा में भी सिंचाई का संकट गहराने लगा है। वीरवार शाम पांच बजे बैराज पर कुल 2135 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। इसमें से यमुना में 352 क्यूसेक, पश्चिमी यमुना नहर में 1635 क्यूसेक तथा यूपी को 148 क्यूसेक पानी दिया गया।
हथिनीकुंड बैराज कार्यालय के गेज रीडर मनीष कुमार ने बताया कि सुबह छह बजे 2377 क्यूसेक, आठ बजे 2520, दस बजे 2258, दोपहर 12 बजे 2391, दोपहर दो बजे 2241, शाम 4 बजे 2078 और पांच बजे 2135 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। विभाग अधिकारियों के अनुसार पहाड़ों में बर्फ पिघलने से आने वाले पानी के सहारे ही वर्तमान व्यवस्था चल रही है। रात के समय जलस्तर में हल्की बढ़ोतरी विभाग और किसानों के लिए राहत मानी जा रही है।
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बैराज पर पनबिजली परियोजना चल रही है। इसके यहां पर चार पावर हाउस हैं, जिसमें कुल आठ ईकाइयां हैं। इन ईकाइयों को चलाने के लिए प्रति 5200 से 5400 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती हैं। इन दिनों इतना पानी बैराज पर ही नहीं है। पानी की कमी के चलते परियोजनाओं को फिलहाल रोक-रोक कर चलाया जा रहा है। इसकी एक-एक यूनिट चलाई जा रही है। चारों पनबिजली परियोजनाओं से हर महीने तीन लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाता है।
गर्मी के मौसम में जलस्तर में कमी आना सामान्य प्रक्रिया है। बर्फ पिघलने से यमुना का जलस्तर चढ़ता और उतरता रहता है। पहाड़ों पर पिघलने वाली बर्फ का पानी बनकर तीन से चार दिन बाद बैराज पर पहुंचता है। वहीं, बारिश से जलस्तर में वृद्धि होती है। बैराज की स्थिति के अनुसार परियोजना, उत्तरप्रदेश व यमुना में पानी दिया जा रहा है। - विजय गर्ग, एक्सईएन सिंचाई विभाग।
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यमुनानगर/प्रतापनगर। भीषण गर्मी में हथिनीकुंड बैराज के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जिसका असर पनबिजली परियोजनाओं और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने लगा है। इसके साथ पड़ोसी राज्यों में भी जलसंकट के बादल मंडराने लगे हैं।
बैराज पर पानी कम होने के कारण पनबिजली परियोजना की ईकाइयां रोक-रोक कर चलाई जा रही हैं। इसके साथ पश्चिमी हरियाणा में भी सिंचाई का संकट गहराने लगा है। वीरवार शाम पांच बजे बैराज पर कुल 2135 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। इसमें से यमुना में 352 क्यूसेक, पश्चिमी यमुना नहर में 1635 क्यूसेक तथा यूपी को 148 क्यूसेक पानी दिया गया।
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हथिनीकुंड बैराज कार्यालय के गेज रीडर मनीष कुमार ने बताया कि सुबह छह बजे 2377 क्यूसेक, आठ बजे 2520, दस बजे 2258, दोपहर 12 बजे 2391, दोपहर दो बजे 2241, शाम 4 बजे 2078 और पांच बजे 2135 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। विभाग अधिकारियों के अनुसार पहाड़ों में बर्फ पिघलने से आने वाले पानी के सहारे ही वर्तमान व्यवस्था चल रही है। रात के समय जलस्तर में हल्की बढ़ोतरी विभाग और किसानों के लिए राहत मानी जा रही है।
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बैराज पर पनबिजली परियोजना चल रही है। इसके यहां पर चार पावर हाउस हैं, जिसमें कुल आठ ईकाइयां हैं। इन ईकाइयों को चलाने के लिए प्रति 5200 से 5400 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती हैं। इन दिनों इतना पानी बैराज पर ही नहीं है। पानी की कमी के चलते परियोजनाओं को फिलहाल रोक-रोक कर चलाया जा रहा है। इसकी एक-एक यूनिट चलाई जा रही है। चारों पनबिजली परियोजनाओं से हर महीने तीन लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाता है।
गर्मी के मौसम में जलस्तर में कमी आना सामान्य प्रक्रिया है। बर्फ पिघलने से यमुना का जलस्तर चढ़ता और उतरता रहता है। पहाड़ों पर पिघलने वाली बर्फ का पानी बनकर तीन से चार दिन बाद बैराज पर पहुंचता है। वहीं, बारिश से जलस्तर में वृद्धि होती है। बैराज की स्थिति के अनुसार परियोजना, उत्तरप्रदेश व यमुना में पानी दिया जा रहा है। - विजय गर्ग, एक्सईएन सिंचाई विभाग।