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Yamuna Nagar News: दवा कंपनियों का कर्जदार बना स्वास्थ्य विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में स्वास्थ्य विभाग निजी दवा कंपनियों का कर्जदार हो गया है। दवा कंपनियों ने मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों के लिए जो दवाएं दी थी, उनका भुगतान अभी तक नहीं किया गया। दिसंबर 2022 से अब तक यह राशि बढ़कर डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। भुगतान के लिए दवा कंपनियों के एजेंट जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ कार्यालय में चक्कर काट रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल, सब डिवीजन अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी, पीएचसी को वैसे तो सरकार के वेयरहाउस से दवाइयां दी जाती हैं। कई बार वेयरहाउस में दवाइयों की कमी हो जाती है। ऐसे में वेयरहाउस अस्पतालों को निजी कंपनियों से दवाएं खरीदी जाती हैं। इसके लिए अस्पतालों को वेयरहाउस से पहले अनुपलब्धता प्रमाणपत्र लेना होता है। इसके बाद अस्पताल दवा कंपनियों से टेंडर आदि लगाकर दवाएं खरीद लेते हैं।
जिला अस्पताल की तरफ से कंपनियों से जो दवाएं खरीदी गई थी, उसकी दिसंबर 2022 से अब तक पेमेंट नहीं की गई। यह राशि तब से अब तक डेढ़ करोड़ रुपये हो गई है। अधिकारी इसकी वजह मुख्यालय से बजट का न आना बताते हैं। गत वर्ष इसके लिए करीब 50 लाख रुपये का बजट सिविल सर्जन कार्यालय में आया था।
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इसमें जिला अस्पताल समेत सभी अस्पतालों को थोड़ी-थोड़ी राशि दी गई थी। यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान थी। इस पपर दवा कंपनियों का कर्ज ज्यादा उतर नहीं पाया। करीब 16 दवा कंपनियां ऐसी हैं। इन्होंने अपने बिल काफी समय से पीएमओ कार्यालय में जमा करवा रखे हैं, परंतु भुगतान नहीं हो रहा।
जिला नागरिक अस्पताल जब से 200 बेड का हुआ है, तब से मरीजों की ओपीडी भी बढ़ गई है। दवाओ के लिए लंबी कतार अस्पताल में लगती है। कई बार तो मरीजों को अस्पताल से सभी दवाइयां नहीं मिलती। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ती थी। इसे देखते हुए अस्पताल परिसर में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलना पड़ा है।
दो करोड़ रुपये का बजट मांगा : पीएमओ
जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. नवजोत कौर का कहना है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये दवा कंपनियों को दिया जाता है। जो बजट आया उससे पेमेंट कर दी गई थी। अब दो करोड़ रुपये का बजट मुख्यालय से मांगा गया है ताकि पिछला भुगतान किया जा सके और आगे भी दवाएं खरीदने में कोई दिक्कत न हो।
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यमुनानगर। जिले में स्वास्थ्य विभाग निजी दवा कंपनियों का कर्जदार हो गया है। दवा कंपनियों ने मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों के लिए जो दवाएं दी थी, उनका भुगतान अभी तक नहीं किया गया। दिसंबर 2022 से अब तक यह राशि बढ़कर डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। भुगतान के लिए दवा कंपनियों के एजेंट जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ कार्यालय में चक्कर काट रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल, सब डिवीजन अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी, पीएचसी को वैसे तो सरकार के वेयरहाउस से दवाइयां दी जाती हैं। कई बार वेयरहाउस में दवाइयों की कमी हो जाती है। ऐसे में वेयरहाउस अस्पतालों को निजी कंपनियों से दवाएं खरीदी जाती हैं। इसके लिए अस्पतालों को वेयरहाउस से पहले अनुपलब्धता प्रमाणपत्र लेना होता है। इसके बाद अस्पताल दवा कंपनियों से टेंडर आदि लगाकर दवाएं खरीद लेते हैं।
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जिला अस्पताल की तरफ से कंपनियों से जो दवाएं खरीदी गई थी, उसकी दिसंबर 2022 से अब तक पेमेंट नहीं की गई। यह राशि तब से अब तक डेढ़ करोड़ रुपये हो गई है। अधिकारी इसकी वजह मुख्यालय से बजट का न आना बताते हैं। गत वर्ष इसके लिए करीब 50 लाख रुपये का बजट सिविल सर्जन कार्यालय में आया था।
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इसमें जिला अस्पताल समेत सभी अस्पतालों को थोड़ी-थोड़ी राशि दी गई थी। यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान थी। इस पपर दवा कंपनियों का कर्ज ज्यादा उतर नहीं पाया। करीब 16 दवा कंपनियां ऐसी हैं। इन्होंने अपने बिल काफी समय से पीएमओ कार्यालय में जमा करवा रखे हैं, परंतु भुगतान नहीं हो रहा।
जिला नागरिक अस्पताल जब से 200 बेड का हुआ है, तब से मरीजों की ओपीडी भी बढ़ गई है। दवाओ के लिए लंबी कतार अस्पताल में लगती है। कई बार तो मरीजों को अस्पताल से सभी दवाइयां नहीं मिलती। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ती थी। इसे देखते हुए अस्पताल परिसर में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलना पड़ा है।
दो करोड़ रुपये का बजट मांगा : पीएमओ
जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. नवजोत कौर का कहना है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये दवा कंपनियों को दिया जाता है। जो बजट आया उससे पेमेंट कर दी गई थी। अब दो करोड़ रुपये का बजट मुख्यालय से मांगा गया है ताकि पिछला भुगतान किया जा सके और आगे भी दवाएं खरीदने में कोई दिक्कत न हो।