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Yamuna Nagar News: हादसे में पैर गंवाने के बाद जीते सात पदक
Fri, 02 Jan 2026 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 02 Jan 2026 11:56 PM IST
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पंचकूला में जीतने के बाद अतिथियों के साथ पदक दिखाते जयवीर। स्वयं
अभय सिंह
जगाधरी। व्यक्ति के जीवन में कभी-कभी ऐसा मुकाम आता है कि उसके सामने ऐसी स्थिति होती है कि या तो वह परिस्थितियों से समझौता कर ले या फिर संघर्ष करे और परिस्थितियां अपने अधीन कर ले। ऐसी ही स्थिति जयवीर के सामने आई तो उन्होंने संघर्ष की राह चुनी। सेना में चयनित होने के बाद सड़क हादसे में एक पैर कट गया।।
जयवीर ने इसे भाग्य नहीं माना और संघर्ष किया। नाम के अनुरूप वह वीरता के साथ परिस्थितियों से लड़ा और जय प्राप्त की। जयवीर ने एक के बाद एक पैरा खेलों में कई पदक जीते। इसी सप्ताह में जयवीर ने पंचकूला में पैरा ताइक्वांडो की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर सभी के लिए मिसाल पेश की है।
30 वर्षीय जयवीर कुमार मूल रूप से चरखी दादरी के रहने वाले हैं और अभी यहां रेलवे कारखाना में कार्यरत हैं। जयवीर ने 27 से 29 दिसंबर तक पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में हुई तीन दिवसीय दूसरी हरियाणा ओपन स्टेट पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। पदक जीतकर जयवीर ने साबित कर दिया कि इंसान शरीर से नहीं बल्कि मन व मस्तिष्क से निशक्त होता है। यदि हौसला हो तो वह हर मुकाम हासिल कर सकता है।
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इसके अलावा जयवीर ने पैरा फुटबॉल, भाला फेंक, योगासन में भी कई पदक जीते हैं। इससे पहले जयवीर दौड़ का राज्यस्तरीय खिलाड़ी रहा, लेकिन हादसे के बाद उसकी दुनिया ही बदल गई। जयवीर ने बताया कि 2013 में उसका चयन भारतीय सेना हुआ था और इससे वह बेहद खुश था। वह राज्यस्तरीय धावक था और 400 मीटर में जिलास्तर पर स्वर्ण पदक भी जीता चुका है।
2013 में वह सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया और वह सेना में नहीं जा सका। उसकी टांग हादसे में कुचली जा चुकी थी। अस्पताल पहुंचा तो जान बचाने के लिए चिकित्सकों को उसकी दाहिनी टांग काटनी पड़ी। टांग कटने के बाद उसके सभी सपने कभी पूरे नहीं होने वाले बन कर रह गए। वह कई महीने बिस्तर पर रहा और अपनी दशा देखकर तनाव में चला गया।
तीन साल तनाव ग्रस्त रहा और मायूस व निराश होकर बैठ गया। इस बीच एक दोस्त ने उसका साथ दिया और उसे संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उसने इसके बाद जानकारी ली और फिर पैरा ओलंपिक को अपना लक्ष्य बनाकर संघर्ष शुरू कर दिया। शुरुआत में बहुत परेशानी हुई। परंतु उसने हार नहीं मानी और अपना अभ्यास जारी रखा। जयवीर का आरआरसी से रेलवे में चयन हुआ और वह जगाधरी वर्कशॉप के रेलवे कारखाना में सहायक पद पर हैं। जयवीर ने बताया कि उनका लक्ष्य पैरा ओलंपिक में देश के लिए खेलना और पदक जीतना है। संवाद
जयवीर की उपलब्धियां
-2018 में राज्यस्तरीय पैरा एथलेटिक्स गेम्स की भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2019 में राज्यस्तरीय भाला फेंक प्रतियोगिता में रजत पदक।
-2022 में राज्यस्तरीय पैरा फुटबॉल चैंपियनशिप में रजत पदक।
-2023 में राज्यस्तरीय योगासन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2024 में राज्यस्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में रजत पदक।
-2024 नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक।
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जगाधरी। व्यक्ति के जीवन में कभी-कभी ऐसा मुकाम आता है कि उसके सामने ऐसी स्थिति होती है कि या तो वह परिस्थितियों से समझौता कर ले या फिर संघर्ष करे और परिस्थितियां अपने अधीन कर ले। ऐसी ही स्थिति जयवीर के सामने आई तो उन्होंने संघर्ष की राह चुनी। सेना में चयनित होने के बाद सड़क हादसे में एक पैर कट गया।।
जयवीर ने इसे भाग्य नहीं माना और संघर्ष किया। नाम के अनुरूप वह वीरता के साथ परिस्थितियों से लड़ा और जय प्राप्त की। जयवीर ने एक के बाद एक पैरा खेलों में कई पदक जीते। इसी सप्ताह में जयवीर ने पंचकूला में पैरा ताइक्वांडो की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर सभी के लिए मिसाल पेश की है।
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30 वर्षीय जयवीर कुमार मूल रूप से चरखी दादरी के रहने वाले हैं और अभी यहां रेलवे कारखाना में कार्यरत हैं। जयवीर ने 27 से 29 दिसंबर तक पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में हुई तीन दिवसीय दूसरी हरियाणा ओपन स्टेट पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। पदक जीतकर जयवीर ने साबित कर दिया कि इंसान शरीर से नहीं बल्कि मन व मस्तिष्क से निशक्त होता है। यदि हौसला हो तो वह हर मुकाम हासिल कर सकता है।
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इसके अलावा जयवीर ने पैरा फुटबॉल, भाला फेंक, योगासन में भी कई पदक जीते हैं। इससे पहले जयवीर दौड़ का राज्यस्तरीय खिलाड़ी रहा, लेकिन हादसे के बाद उसकी दुनिया ही बदल गई। जयवीर ने बताया कि 2013 में उसका चयन भारतीय सेना हुआ था और इससे वह बेहद खुश था। वह राज्यस्तरीय धावक था और 400 मीटर में जिलास्तर पर स्वर्ण पदक भी जीता चुका है।
2013 में वह सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया और वह सेना में नहीं जा सका। उसकी टांग हादसे में कुचली जा चुकी थी। अस्पताल पहुंचा तो जान बचाने के लिए चिकित्सकों को उसकी दाहिनी टांग काटनी पड़ी। टांग कटने के बाद उसके सभी सपने कभी पूरे नहीं होने वाले बन कर रह गए। वह कई महीने बिस्तर पर रहा और अपनी दशा देखकर तनाव में चला गया।
तीन साल तनाव ग्रस्त रहा और मायूस व निराश होकर बैठ गया। इस बीच एक दोस्त ने उसका साथ दिया और उसे संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उसने इसके बाद जानकारी ली और फिर पैरा ओलंपिक को अपना लक्ष्य बनाकर संघर्ष शुरू कर दिया। शुरुआत में बहुत परेशानी हुई। परंतु उसने हार नहीं मानी और अपना अभ्यास जारी रखा। जयवीर का आरआरसी से रेलवे में चयन हुआ और वह जगाधरी वर्कशॉप के रेलवे कारखाना में सहायक पद पर हैं। जयवीर ने बताया कि उनका लक्ष्य पैरा ओलंपिक में देश के लिए खेलना और पदक जीतना है। संवाद
जयवीर की उपलब्धियां
-2018 में राज्यस्तरीय पैरा एथलेटिक्स गेम्स की भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2019 में राज्यस्तरीय भाला फेंक प्रतियोगिता में रजत पदक।
-2022 में राज्यस्तरीय पैरा फुटबॉल चैंपियनशिप में रजत पदक।
-2023 में राज्यस्तरीय योगासन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2024 में राज्यस्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में रजत पदक।
-2024 नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक।