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वर्षों से गुरुद्वारा स्थापित, वक्फ बोर्ड के हक में आया फैसला
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जिस पर वर्षों से गुरुद्वारा स्थापित है, उस 14 मरले भूमि के मालिकाना हक को लेकर वक्फ बोर्ड की ओर से न्यायालय में केस दायर किया गया था। वर्षों तक चले इस मामले में न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के हक में फैसला सुनाया तो सिख समुदाय के सैकड़ों लोग वहां पर एकत्रित हो गए। साथ ही उनके समर्थन में हिंदू समुदाय के लोग भी उतर गए। इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों ने एक सुर में जय श्री राम और जो बोले सो निहाल के जयकारे लगाए।
सिख समुदाय के लोगों ने दावा किया कि वक्फ बोर्ड के उच्चाधिकारियों के साथ बड़े लेवल पर बातचीत हो गई है, जिसमें मस्जिद के लिए अलग जगह लेने पर सहमति बनी है। दूसरी ओर दखल लेने के लिए वक्फ बोर्ड की ओर से कोई भी नुमाइंदा मौके पर नहीं पहुंचा। न ही वक्फ बोर्ड की ओर से इस बात को लेकर कोई अधिकारी सामने नहीं आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिस बल का पुख्ता प्रबंध किया गया था और प्रशासन की ओर से बीडीपीओ राज सिंह को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था।
जमीन पर गुरुद्वारा साहिब ही रहेगा
श्री गुरुद्वारा साहिब व श्री बाबा बंदा सिंह बहादुर सेवा ट्रस्ट के प्रधान जसविंद्र सिंह व राजपाल का कहना है कि वर्ष 1968 में वक्फ बोर्ड उक्त जमीन को अपनी करार देते हुए अदालत में गया था। जिस पर लंबे समय से मामला न्यायालय में ही विचाराधीन था, अब वक्फ बोर्ड के हक में फैसला आया है लेकिन यह जमीन उनके पुरखों की है। इस पर गुरुद्वारा साहिब ही रहेगा। उधर, भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री रामबीर चौहान ने कहा कि हमें सूचना मिली थी कि प्रशासन गुरुद्वारा साहिब पर कब्जा लेने आ रहा है। इस सूचना पर वे मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वे गुरुद्वारा साहिब की जमीन वापस नहीं देंगे। इसके लिए हर समाज के लोग एकजुट हैं।
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गुरुद्वारा में ये लोग हुए एकजुट -
मौके पर गुरुद्वारा सिंह सभा रादौर के प्रधान अवतार सिंह, निवर्तमान ब्लॉक समिति चेयरमैन शशि दुरेजा, भारतीय किसान संघ के प्रदेश सचिव रामबीर चौहान, पंजाबी सभा के प्रधान अशोक गुंबर, जगदीश मेहता जठलाना, सुशील बतरा, त्रिलोचन सिंह, हरपाल मारूपुर, मंगतराम बठला, राजपाल, चरणजीत उर्फ मोनू, भगवत दयाल कटारिया, सुरेंद्र चीमा, आदित्य, बीर सिंह, प्रवीण, कमल मक्कड़, मनिंद्र, मोहित, धीरज, सुनील, अमरीश गोयल, विजय मेहता, संजीव वाल्मिकी, अमित, परमजीत, पंकज व सतीश कुमार इत्यादि मौजूद रहे।
वर्जन
डीएसपी रजत गुलिया ने कहा कि वक्फ बोर्ड की ओर से उक्त जमीन पर दखल लिया जाना था। किसी प्रकार का विवाद न हो उसके लिए पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी। लेकिन वक्फ बोर्ड की ओर से कोई भी अधिकारी व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसी कारण इस भूमि पर दखल की कार्रवाई नहीं हो सकी। मौके पर शांति बनी है। किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है।
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सिख समुदाय के लोगों ने दावा किया कि वक्फ बोर्ड के उच्चाधिकारियों के साथ बड़े लेवल पर बातचीत हो गई है, जिसमें मस्जिद के लिए अलग जगह लेने पर सहमति बनी है। दूसरी ओर दखल लेने के लिए वक्फ बोर्ड की ओर से कोई भी नुमाइंदा मौके पर नहीं पहुंचा। न ही वक्फ बोर्ड की ओर से इस बात को लेकर कोई अधिकारी सामने नहीं आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिस बल का पुख्ता प्रबंध किया गया था और प्रशासन की ओर से बीडीपीओ राज सिंह को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था।
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जमीन पर गुरुद्वारा साहिब ही रहेगा
श्री गुरुद्वारा साहिब व श्री बाबा बंदा सिंह बहादुर सेवा ट्रस्ट के प्रधान जसविंद्र सिंह व राजपाल का कहना है कि वर्ष 1968 में वक्फ बोर्ड उक्त जमीन को अपनी करार देते हुए अदालत में गया था। जिस पर लंबे समय से मामला न्यायालय में ही विचाराधीन था, अब वक्फ बोर्ड के हक में फैसला आया है लेकिन यह जमीन उनके पुरखों की है। इस पर गुरुद्वारा साहिब ही रहेगा। उधर, भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री रामबीर चौहान ने कहा कि हमें सूचना मिली थी कि प्रशासन गुरुद्वारा साहिब पर कब्जा लेने आ रहा है। इस सूचना पर वे मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वे गुरुद्वारा साहिब की जमीन वापस नहीं देंगे। इसके लिए हर समाज के लोग एकजुट हैं।
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गुरुद्वारा में ये लोग हुए एकजुट -
मौके पर गुरुद्वारा सिंह सभा रादौर के प्रधान अवतार सिंह, निवर्तमान ब्लॉक समिति चेयरमैन शशि दुरेजा, भारतीय किसान संघ के प्रदेश सचिव रामबीर चौहान, पंजाबी सभा के प्रधान अशोक गुंबर, जगदीश मेहता जठलाना, सुशील बतरा, त्रिलोचन सिंह, हरपाल मारूपुर, मंगतराम बठला, राजपाल, चरणजीत उर्फ मोनू, भगवत दयाल कटारिया, सुरेंद्र चीमा, आदित्य, बीर सिंह, प्रवीण, कमल मक्कड़, मनिंद्र, मोहित, धीरज, सुनील, अमरीश गोयल, विजय मेहता, संजीव वाल्मिकी, अमित, परमजीत, पंकज व सतीश कुमार इत्यादि मौजूद रहे।
वर्जन
डीएसपी रजत गुलिया ने कहा कि वक्फ बोर्ड की ओर से उक्त जमीन पर दखल लिया जाना था। किसी प्रकार का विवाद न हो उसके लिए पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी। लेकिन वक्फ बोर्ड की ओर से कोई भी अधिकारी व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसी कारण इस भूमि पर दखल की कार्रवाई नहीं हो सकी। मौके पर शांति बनी है। किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है।
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