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नाबालिग से दुराचार के दोषी को बारह साल की कैद
ब्यूरो/अमर उजाला, जगाधरी।
Updated Tue, 22 Jul 2014 12:59 AM IST
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मौसी की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर अपहरण करने के बाद उससे दुराचार के दोषी गांव हरेवा निवासी अनिल उर्फ मनीष को कोर्ट ने 12 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा होगी। यह फैसला अतिरिक्त जिला तथा सत्र न्यायधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान 16 लोगों की गवाही हुई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश ने दोषी को सजा सुना दी।
दो जून 2013 को छछरौली पुलिस को दी शिकायत में कस्बे की एक महिला ने कहा कि करीब 18 साल पहले उसकी शादी हुई थी। उसकी तीन बेटियां और एक बेटा है। उसका पति दिमागी बीमारी की वजह से मंदबुद्धि हो गया है। उसकी बड़ी बहन की शादी हरेवा गांव में हो रखी है।
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बहन के बेटे अनिल उर्फ मनीष का रिश्तेदारी की वजह से उनके घर पर आना जाना है। शिकायतकर्ता के मुताबिक अनिल उसकी मंझली बेटी पर बुरी नजर थी।
इस बारे में उसने अपने जेठ के बेटों को बताया था। उन्होंने अनिल को धमकाया भी था। एक जून 2013 को उसकी बेटी दिन के समय करीब तीन-साढे़ तीन बजे घर से गायब मिली। इसकी सूचना उसने अपने जेठ के बेटों को दी।
उन्होंने बेटी की तलाश शुरू कर दी। लेकिन उसका कहीं कुछ पता नहीं चला। जब उन्होंने हरेवा गांव में पहुंच कर अनिल उर्फ मनीष की तलाश की, तो उन्हें पता चला कि वह भी एक जून से गायब है। शिकायतकर्ता के मुताबिक अनिल उर्फ मनीष ने उसकी नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर अगवा किया है।
पुलिस ने पीड़िता की मां की शिकायत पर गांव हरेवा निवासी अनिल उर्फ मनीष के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने दो जून को नाबालिग लड़की को बरामद कर लिया। पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज करने के उपरांत इस मामले में दुराचार की धारा 376 को जोड़ दिया। मेडिकल जांच में पीड़िता के साथ दुराचार की पुष्टि हुई। पुलिस ने गिरफ्तार अनिल उर्फ मनीष को चार जून 2013 को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत गांव हरेवा निवासी अनिल उर्फ मनीष को दोषी करार दिया।
सरकारी वकील रजनीश रायजादा ने बताया कि कोर्ट ने अनिल उर्फ मनीष को 12 साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
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जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा होगी। यह फैसला अतिरिक्त जिला तथा सत्र न्यायधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान 16 लोगों की गवाही हुई।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश ने दोषी को सजा सुना दी।
दो जून 2013 को छछरौली पुलिस को दी शिकायत में कस्बे की एक महिला ने कहा कि करीब 18 साल पहले उसकी शादी हुई थी। उसकी तीन बेटियां और एक बेटा है। उसका पति दिमागी बीमारी की वजह से मंदबुद्धि हो गया है। उसकी बड़ी बहन की शादी हरेवा गांव में हो रखी है।
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बहन के बेटे अनिल उर्फ मनीष का रिश्तेदारी की वजह से उनके घर पर आना जाना है। शिकायतकर्ता के मुताबिक अनिल उसकी मंझली बेटी पर बुरी नजर थी।
इस बारे में उसने अपने जेठ के बेटों को बताया था। उन्होंने अनिल को धमकाया भी था। एक जून 2013 को उसकी बेटी दिन के समय करीब तीन-साढे़ तीन बजे घर से गायब मिली। इसकी सूचना उसने अपने जेठ के बेटों को दी।
उन्होंने बेटी की तलाश शुरू कर दी। लेकिन उसका कहीं कुछ पता नहीं चला। जब उन्होंने हरेवा गांव में पहुंच कर अनिल उर्फ मनीष की तलाश की, तो उन्हें पता चला कि वह भी एक जून से गायब है। शिकायतकर्ता के मुताबिक अनिल उर्फ मनीष ने उसकी नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर अगवा किया है।
पुलिस ने पीड़िता की मां की शिकायत पर गांव हरेवा निवासी अनिल उर्फ मनीष के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने दो जून को नाबालिग लड़की को बरामद कर लिया। पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज करने के उपरांत इस मामले में दुराचार की धारा 376 को जोड़ दिया। मेडिकल जांच में पीड़िता के साथ दुराचार की पुष्टि हुई। पुलिस ने गिरफ्तार अनिल उर्फ मनीष को चार जून 2013 को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत गांव हरेवा निवासी अनिल उर्फ मनीष को दोषी करार दिया।
सरकारी वकील रजनीश रायजादा ने बताया कि कोर्ट ने अनिल उर्फ मनीष को 12 साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर चार महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।