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Yamuna Nagar News: अतिथि अध्यापकों ने बुलंद की आवाज
Sun, 14 Jul 2024 03:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 14 Jul 2024 03:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। नियमित करने व दूसरे जिलों में कार्यरत जेबीटी को गृह क्षेत्र के रिक्त पदों पर समायोजित करने की मांग के समर्थन में कैबिनेट मंत्री निवास पर प्रदर्शन किया गया। अतिथि अध्यापकों का प्रदर्शन पूर्व नियोजित था। इस पर प्रशासन व पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। मंत्री निवास के बाहर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
अतिथि अध्यापकों को पुलिस ने मंत्री निवास के बाहर बैरिकेड लगाकर जगाधरी पांवटा हाईवे पर ही रोक दिया। अध्यापक मंत्री से मिलने की बात पर अड़े। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने समझाया कि मंत्री घर नहीं हैं। इस पर अध्यापकों की बात मंत्री के बेटे निश्चल चौधरी से करवाई गई। बातचीत के बाद अध्यापकों को मंगलवार चंडीगढ़ में मंत्री से मिलने का समय दिया गया है। इसके बाद अध्यापक मांगों का ज्ञापन सौंपकर लौट गए।
इस दौरान अतिथि अध्यापकों ने सरकार व निदेशक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन अतिथि अध्यापक संघर्ष समिति की ओर से किया गया। प्रदर्शन अंबाला, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, करनाल व मेवात में कार्यरत अतिथि अध्यापकों ने हिस्ता लिया। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश महासचिव राजीव चंदाखेड़ी ने किया। प्रदर्शन के लिए अतिथि अध्यापक जगाधरी पांवटा नेशनल हाईवे स्थित उप्पल मॉल पर एकत्रित हुए। वहां से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए मंत्री निवास के पास पहुंचे। वहां पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक लिया।
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अतिथि अध्यापक संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव राजीव चंदाखेड़ी ने कहा कि सरकार व विभाग की नीतियों के कारण अतिथि अध्यापकों का शोषण हो रहा है। राजीव ने कहा कि वे 2005 से प्रदेश में कार्यरत हैंं। अभी तक उन्हें नियमित नहीं किया गया है। वर्ष 2017 में जिले के 250 अध्यापकों को अंबाला, पंचकूला, करनाल, कुरुक्षेत्र व मेवात भेज दिया गया था।
सात साल से अतिथि अध्यापक गृह क्षेत्र से मीलों दूर कार्यरत हैं। इससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिला अध्यापकों को हो रही है। इससे अतिथि अध्यापक मानसिक व शारीरिक तनाव झेल रहे हैं और आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। जिले में करीब 700 पद रिक्त हैं। जिले के 147 स्कूल ऐसे हैं, जहां अध्यापक नहीं है।
वहीं 107 स्कूलों में एक ही शिक्षक है। शिक्षकों की कमी के कारण लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, स्कूलों पर ताला जड़ा जा रहा है। उनकी मांग है कि बाहर कार्यरत अतिथि अध्यापकों को गृह जिले के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए। मंगलवार को मंत्री से वार्ता के बाद आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इस दौरान जिला प्रधान रमेश चहल, राज्य कार्यकारिणी सदस्य नितिन लांबा, विनोद गोलनी, प्रदीप, रीटा, सुनीता, कंचन, विशाल अग्रवाल, जीत सिंह, नितिन कांबोज, अमित, नीरू, सोनी कुमार, रजनी आदि उपस्थित रहे।
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जगाधरी। नियमित करने व दूसरे जिलों में कार्यरत जेबीटी को गृह क्षेत्र के रिक्त पदों पर समायोजित करने की मांग के समर्थन में कैबिनेट मंत्री निवास पर प्रदर्शन किया गया। अतिथि अध्यापकों का प्रदर्शन पूर्व नियोजित था। इस पर प्रशासन व पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। मंत्री निवास के बाहर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
अतिथि अध्यापकों को पुलिस ने मंत्री निवास के बाहर बैरिकेड लगाकर जगाधरी पांवटा हाईवे पर ही रोक दिया। अध्यापक मंत्री से मिलने की बात पर अड़े। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने समझाया कि मंत्री घर नहीं हैं। इस पर अध्यापकों की बात मंत्री के बेटे निश्चल चौधरी से करवाई गई। बातचीत के बाद अध्यापकों को मंगलवार चंडीगढ़ में मंत्री से मिलने का समय दिया गया है। इसके बाद अध्यापक मांगों का ज्ञापन सौंपकर लौट गए।
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इस दौरान अतिथि अध्यापकों ने सरकार व निदेशक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन अतिथि अध्यापक संघर्ष समिति की ओर से किया गया। प्रदर्शन अंबाला, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, करनाल व मेवात में कार्यरत अतिथि अध्यापकों ने हिस्ता लिया। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश महासचिव राजीव चंदाखेड़ी ने किया। प्रदर्शन के लिए अतिथि अध्यापक जगाधरी पांवटा नेशनल हाईवे स्थित उप्पल मॉल पर एकत्रित हुए। वहां से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए मंत्री निवास के पास पहुंचे। वहां पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक लिया।
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अतिथि अध्यापक संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव राजीव चंदाखेड़ी ने कहा कि सरकार व विभाग की नीतियों के कारण अतिथि अध्यापकों का शोषण हो रहा है। राजीव ने कहा कि वे 2005 से प्रदेश में कार्यरत हैंं। अभी तक उन्हें नियमित नहीं किया गया है। वर्ष 2017 में जिले के 250 अध्यापकों को अंबाला, पंचकूला, करनाल, कुरुक्षेत्र व मेवात भेज दिया गया था।
सात साल से अतिथि अध्यापक गृह क्षेत्र से मीलों दूर कार्यरत हैं। इससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिला अध्यापकों को हो रही है। इससे अतिथि अध्यापक मानसिक व शारीरिक तनाव झेल रहे हैं और आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। जिले में करीब 700 पद रिक्त हैं। जिले के 147 स्कूल ऐसे हैं, जहां अध्यापक नहीं है।
वहीं 107 स्कूलों में एक ही शिक्षक है। शिक्षकों की कमी के कारण लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, स्कूलों पर ताला जड़ा जा रहा है। उनकी मांग है कि बाहर कार्यरत अतिथि अध्यापकों को गृह जिले के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए। मंगलवार को मंत्री से वार्ता के बाद आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इस दौरान जिला प्रधान रमेश चहल, राज्य कार्यकारिणी सदस्य नितिन लांबा, विनोद गोलनी, प्रदीप, रीटा, सुनीता, कंचन, विशाल अग्रवाल, जीत सिंह, नितिन कांबोज, अमित, नीरू, सोनी कुमार, रजनी आदि उपस्थित रहे।