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देवता भी चाहते मानव शरीर : शब्दानंद
Sun, 02 Mar 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 02 Mar 2025 12:31 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में हंस ज्योति मंदिर जगाधरी की तरफ से गांव खेड़की ब्राह्मण में सद्भावना संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सतगुरु सतपाल महाराज के प्रेम नगर आश्रम हरिद्वार से पधारे महात्मा ज्ञान शब्दानंद, हंस ज्योति मंदिर जगाधरी की प्रभारी साध्वी सुबोधिनी बाई, साध्वी रत्नावली बाई, साध्वी वंदना बाई ने अपने सत्संग एवं भजनों से भक्तों को आनंद विभोर कर दिया।
महात्मा ज्ञान शब्द आनंद ने कहा कि मानव का तन देव दुर्लभ है। मानव तन पाने के लिए देवी देवता भी याचना करते हैं। संत शिरोमणि तुलसीदास रामायण में लिखते हैं बड़े भाग मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा। जिसको यह मानुष तन मिला है उसके बड़े भाग्य है यह मनुष्य तन देवताओं को भी दुर्लभ है किंतु हम मनुष्य तन को पाकर क्या कर रहे हैं? देवताओं की, भूतों की सेवा में लग रहे हैं।
कोई कहता है कि निरोग हो जाऊंगा, धनी हो जाए, नौकरी लग जाए, मेरा बेटा घर आ जाए, इस प्रकार की कोई न कोई कामना लेकर देवी देवताओं की पूजा करते हैं। इसलिए सत्संग रूपी गंगा में स्नान कर के संत महात्माओं से पूछे, उन से भक्ति का ज्ञान जाने, भक्ति कोई बाह्य पूजा पाठ नहीं बाह्य पूजा पाठ से सांसारिक कामना पूर्ण हो सकती है, परंतु भगवान की प्राप्ति नहीं। भगवान तो हमारे मन- मंदिर के अंदर विराजमान है।
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जब समय के सतगुरु की शरण में जाकर उसे परमात्मा के अव्यक्त नाम, अखंड नाम, पावन नाम, होली नाम का ज्ञान प्राप्त करेंगे, तभी हमारा जीवन सार्थक होगा। परमात्मा एक है। परमात्मा का नाम भी एक है। परमात्मा के गुणवाचक नाम अनेक हो सकते हैं।
साध्वी सुबोधिनी बाई ने सुनाया की परमात्मा प्रकाश स्वरूप है। चार प्रकार के प्रकाशों वर्णन आता है।
सूर्य का प्रकाश, अग्नि का प्रकाश, चंद्रमा का प्रकाश और स्वयं प्रकाश तीन प्रकार का प्रकाश सभी जीव जंतु देख सकते हैं परंतु जो चौथी प्रकाश का प्रकाश है जिसे स्वयं प्रकाश, ज्योति, परम प्रकाश, नूरें इलाही, चांदन कहां गया है, जो मानव अपने हृदय के अंदर उसे प्रकाश का दीदार करता है। संत सम्मेलन में मुख्य रूप से प्रधान अजब सिंह, नौरति राम, पवन गोयल, अमित भारती, राहुल, डॉ. मनीष वर्मा, डॉ. संतोष शर्मा, मामचंद उपस्थित रहे।
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यमुनानगर। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में हंस ज्योति मंदिर जगाधरी की तरफ से गांव खेड़की ब्राह्मण में सद्भावना संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सतगुरु सतपाल महाराज के प्रेम नगर आश्रम हरिद्वार से पधारे महात्मा ज्ञान शब्दानंद, हंस ज्योति मंदिर जगाधरी की प्रभारी साध्वी सुबोधिनी बाई, साध्वी रत्नावली बाई, साध्वी वंदना बाई ने अपने सत्संग एवं भजनों से भक्तों को आनंद विभोर कर दिया।
महात्मा ज्ञान शब्द आनंद ने कहा कि मानव का तन देव दुर्लभ है। मानव तन पाने के लिए देवी देवता भी याचना करते हैं। संत शिरोमणि तुलसीदास रामायण में लिखते हैं बड़े भाग मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा। जिसको यह मानुष तन मिला है उसके बड़े भाग्य है यह मनुष्य तन देवताओं को भी दुर्लभ है किंतु हम मनुष्य तन को पाकर क्या कर रहे हैं? देवताओं की, भूतों की सेवा में लग रहे हैं।
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कोई कहता है कि निरोग हो जाऊंगा, धनी हो जाए, नौकरी लग जाए, मेरा बेटा घर आ जाए, इस प्रकार की कोई न कोई कामना लेकर देवी देवताओं की पूजा करते हैं। इसलिए सत्संग रूपी गंगा में स्नान कर के संत महात्माओं से पूछे, उन से भक्ति का ज्ञान जाने, भक्ति कोई बाह्य पूजा पाठ नहीं बाह्य पूजा पाठ से सांसारिक कामना पूर्ण हो सकती है, परंतु भगवान की प्राप्ति नहीं। भगवान तो हमारे मन- मंदिर के अंदर विराजमान है।
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जब समय के सतगुरु की शरण में जाकर उसे परमात्मा के अव्यक्त नाम, अखंड नाम, पावन नाम, होली नाम का ज्ञान प्राप्त करेंगे, तभी हमारा जीवन सार्थक होगा। परमात्मा एक है। परमात्मा का नाम भी एक है। परमात्मा के गुणवाचक नाम अनेक हो सकते हैं।
साध्वी सुबोधिनी बाई ने सुनाया की परमात्मा प्रकाश स्वरूप है। चार प्रकार के प्रकाशों वर्णन आता है।
सूर्य का प्रकाश, अग्नि का प्रकाश, चंद्रमा का प्रकाश और स्वयं प्रकाश तीन प्रकार का प्रकाश सभी जीव जंतु देख सकते हैं परंतु जो चौथी प्रकाश का प्रकाश है जिसे स्वयं प्रकाश, ज्योति, परम प्रकाश, नूरें इलाही, चांदन कहां गया है, जो मानव अपने हृदय के अंदर उसे प्रकाश का दीदार करता है। संत सम्मेलन में मुख्य रूप से प्रधान अजब सिंह, नौरति राम, पवन गोयल, अमित भारती, राहुल, डॉ. मनीष वर्मा, डॉ. संतोष शर्मा, मामचंद उपस्थित रहे।