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Yamuna Nagar News: देवी-देवताओं ने मंत्रों के उच्चारण से की थी मां मंत्रा देवी की उत्पति
Mon, 22 Sep 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 22 Sep 2025 01:13 AM IST
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आदिबद्री में पहाड़ी की चोटी पर विराजमान मां मंत्रा देवी। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटी शिवालिक की पहाड़ियों पर 2000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां मंत्रा देवी विराजमान हैं। माता मंत्रा देवी का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर जाने के लिए रास्ता बड़ा ही दुर्गम है, इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आती। मान्यता है कि देवी-देवताओं ने मंत्रों के उच्चारण से मां मंत्रा देवी की उत्पति की थी
वैसे तो सालभर माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। नवरात्र में भक्तों की भीड़ कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। श्राईन बोर्ड द्वारा आदिबद्री व माता मंत्रा देवी मंदिर की देखरेख की जा रही है। पहले नवरात्र से ही श्रद्धालुओं का माता के दर्शन करने के लिए आना शुरू हो जाता है।
मां मंत्रा देवी मंदिर में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से भी सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रों के दिनों में मंदिर में सुबह शाम मां मंत्रा देवी की पूजा अर्चना की जाती है । प्रतिदिन हवन का आयोजन भी किया जाता है। नवरात्र में फलाहार व चाय का प्रसाद प्रतिदिन वितरित किया जाता है। श्रद्धालु आदिबद्री मंदिर के समीप से पहाड़ी रास्ते से व बाग के समीप से सीढ़ी के रास्ते से मंदिर तक पहुंचते है।
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महंत विनय स्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि लगभग दो किलोमीटर की ऊंचाई पर मां मंत्रा देवी का मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मान्यता है कि लगभग 6500 वर्ष पूर्व सतयुग में भगवान विष्णु द्वारा विश्व की सुख शांति के लिए यज्ञ, तपस्या की गई थी। तपस्या पूर्ण होने पर कन्या पूजन की बारी आई। मौके पर कन्या न होने पर भगवान विष्णु व देवी देवताओं से मंत्रों के उच्चारण से मां मंत्रा देवी की उत्पति की।
इसके बाद भगवान विष्णु ने मां मंत्रा देवी की पूजा अर्चना की। मां मंत्रा देवी की पूजा अर्चना करने वाले को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। सच्चे मन से मां मंत्रा देवी की पूजा करने से घर में सुख शाति बनी रहती है। संतान की प्राप्ति होती है। वह जिन लोगों का अपना घर नहीं है उनका अपना आशियाना बनाने का सपना पूरा होता है।
मां के दरबार से कोई खाली नहीं गया : विनय
महंत विनय स्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि मां मंत्रा देवी का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। आज तक मां के दरबार से कोई खाली नहीं गया है, जिसने सच्चे मन से जो भी मांगा है वह मिला है। नवरात्र में अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक भीड़ रहती है।
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यमुनानगर। हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटी शिवालिक की पहाड़ियों पर 2000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां मंत्रा देवी विराजमान हैं। माता मंत्रा देवी का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर जाने के लिए रास्ता बड़ा ही दुर्गम है, इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आती। मान्यता है कि देवी-देवताओं ने मंत्रों के उच्चारण से मां मंत्रा देवी की उत्पति की थी
वैसे तो सालभर माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। नवरात्र में भक्तों की भीड़ कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। श्राईन बोर्ड द्वारा आदिबद्री व माता मंत्रा देवी मंदिर की देखरेख की जा रही है। पहले नवरात्र से ही श्रद्धालुओं का माता के दर्शन करने के लिए आना शुरू हो जाता है।
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मां मंत्रा देवी मंदिर में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से भी सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रों के दिनों में मंदिर में सुबह शाम मां मंत्रा देवी की पूजा अर्चना की जाती है । प्रतिदिन हवन का आयोजन भी किया जाता है। नवरात्र में फलाहार व चाय का प्रसाद प्रतिदिन वितरित किया जाता है। श्रद्धालु आदिबद्री मंदिर के समीप से पहाड़ी रास्ते से व बाग के समीप से सीढ़ी के रास्ते से मंदिर तक पहुंचते है।
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महंत विनय स्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि लगभग दो किलोमीटर की ऊंचाई पर मां मंत्रा देवी का मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मान्यता है कि लगभग 6500 वर्ष पूर्व सतयुग में भगवान विष्णु द्वारा विश्व की सुख शांति के लिए यज्ञ, तपस्या की गई थी। तपस्या पूर्ण होने पर कन्या पूजन की बारी आई। मौके पर कन्या न होने पर भगवान विष्णु व देवी देवताओं से मंत्रों के उच्चारण से मां मंत्रा देवी की उत्पति की।
इसके बाद भगवान विष्णु ने मां मंत्रा देवी की पूजा अर्चना की। मां मंत्रा देवी की पूजा अर्चना करने वाले को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। सच्चे मन से मां मंत्रा देवी की पूजा करने से घर में सुख शाति बनी रहती है। संतान की प्राप्ति होती है। वह जिन लोगों का अपना घर नहीं है उनका अपना आशियाना बनाने का सपना पूरा होता है।
मां के दरबार से कोई खाली नहीं गया : विनय
महंत विनय स्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि मां मंत्रा देवी का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। आज तक मां के दरबार से कोई खाली नहीं गया है, जिसने सच्चे मन से जो भी मांगा है वह मिला है। नवरात्र में अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक भीड़ रहती है।