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Yamuna Nagar News: स्कूली बसों में अनियमितताओं की भरमार, सुरक्षित नहीं नौनिहाल
Sat, 13 Apr 2024 03:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 13 Apr 2024 03:56 AM IST
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यमुनानगर। महेंद्रगढ़ में निजी स्कूल बस हादसे में छह बच्चों की मौत और 15 के घायल होने के बाद शुक्रवार को परिवहन विभाग की टीम ने 10 स्कूलों में पहुंचकर बसों की जांच की। इनमें से तीन स्कूलों की बसें मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जो खतरनाक साबित हो सकती थीं। इस कारण तीनों बसों को डीटीओ की टीम ने इंपाउंड कर लिया। इसके अलावा कई अन्य बसों में भी टीम को खामियां मिली हैं। जिन तीन बसों को परिवहन विभाग ने इंपाउंड किया है, उनमें एसएस मेमोरियल स्कूल हरनौल, विनस सीनियर सेकेंडरी स्कूल हरनौल और संजय गांधी मेमोरियल पब्लिक स्कूल हरनौल की बसें शामिल हैं।
महेंद्रगढ़ में हुए हादसे के बाद शुक्रवार को जिला परिवहन अधिकारी हैरतजीत कौर के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया। इसके बाद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों में बसों की जांच की गई। डीटीओ कार्यालय में स्कूलों की करीब 700 बसें पंजीकृत हैं। महेंद्रगढ़ हादसे के बाद निजी स्कूल संचालकों को पता था कि अब उनके यहां भी बसों की जांच होगी, इसलिए सभी पहले से ही अलर्ट हो गए थे। ऐसे में अधिकतर स्कूलों ने व्यवस्था चाक चौबंद करने का प्रयास किया। इसके तहत कई बस चालकों को छुट्टी भी दे दी गई।
डीटीओ की टीम ने स्कूलों में जाकर जो जांच की है, उनमें अधिकतर बसों में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े मिले। कुछ के तो तार भी नहीं लगे हुए थे। बसों में लगी सीटें फटी हुई मिलीं। एक स्कूल में तो बस के अगले शीशे के पास सीट लगी मिली जिस पर बच्चों को बिठाया जाता था। यदि अचानक ब्रेक लगाने पड़े तो आगे बैठे बच्चे शीशा तोड़ कर सीधे बाहर गिर सकते हैं। वहीं बसों में इमरजेंसी दरवाजे लगाने में भी स्कूलों द्वारा लापरवाही बरती गई है। एक बस में इमरजेंसी दरवाजे के बाहर ग्रील लगी मिली। यदि हादसा हो जाए तो कोई भी उसे तोड़ कर बाहर नहीं निकल सकेगा। बसों में आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स भी स्कूलों द्वारा नहीं लगाए गए हैं। बसों के ड्राइवर वर्दी नहीं पहनते। स्कूलों में बच्चों को चढ़ाने व उतारने के लिए महिला सहायक नहीं मिलीं।
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डीसी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
निजी स्कूल बसों की जांच करने को लेकर शुक्रवार को लघु सचिवालय में परिवहन विभाग के एसीएस ने वीसी के जरिये डीसी कैप्टन मनोज कुमार व जिला परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बात की। इसमें एसीएस ने नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा। वहीं डीसी ने डीटीओ स्टाफ से कहा कि बसों की जांच का काम समय पर पूरा होना चाहिए। यदि स्टाफ की कमी है तो वह उपलब्ध करवाएंगे। स्कूल छोटा हो या बड़ा सभी की बसों की जांच होनी चाहिए।
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जांच में तीन बसें इंपाउंड की गईं हैं : हैरतजीत कौर
जिला परिवहन अधिकारी हैरतजीत कौर ने बताया कि निजी स्कूल बसों की जांच के बाद तीन स्कूल बसों को इंपाउंड किया गया है। इसके अलावा अन्य बसों में जो खामियां मिली हैं, उन्हें दूर करने को कहा गया है। जल्द ही सभी बसों की जांच पूरी कर ली जाएगी। साथ ही बसों की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।
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महेंद्रगढ़ में हुए हादसे के बाद शुक्रवार को जिला परिवहन अधिकारी हैरतजीत कौर के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया। इसके बाद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों में बसों की जांच की गई। डीटीओ कार्यालय में स्कूलों की करीब 700 बसें पंजीकृत हैं। महेंद्रगढ़ हादसे के बाद निजी स्कूल संचालकों को पता था कि अब उनके यहां भी बसों की जांच होगी, इसलिए सभी पहले से ही अलर्ट हो गए थे। ऐसे में अधिकतर स्कूलों ने व्यवस्था चाक चौबंद करने का प्रयास किया। इसके तहत कई बस चालकों को छुट्टी भी दे दी गई।
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डीटीओ की टीम ने स्कूलों में जाकर जो जांच की है, उनमें अधिकतर बसों में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े मिले। कुछ के तो तार भी नहीं लगे हुए थे। बसों में लगी सीटें फटी हुई मिलीं। एक स्कूल में तो बस के अगले शीशे के पास सीट लगी मिली जिस पर बच्चों को बिठाया जाता था। यदि अचानक ब्रेक लगाने पड़े तो आगे बैठे बच्चे शीशा तोड़ कर सीधे बाहर गिर सकते हैं। वहीं बसों में इमरजेंसी दरवाजे लगाने में भी स्कूलों द्वारा लापरवाही बरती गई है। एक बस में इमरजेंसी दरवाजे के बाहर ग्रील लगी मिली। यदि हादसा हो जाए तो कोई भी उसे तोड़ कर बाहर नहीं निकल सकेगा। बसों में आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स भी स्कूलों द्वारा नहीं लगाए गए हैं। बसों के ड्राइवर वर्दी नहीं पहनते। स्कूलों में बच्चों को चढ़ाने व उतारने के लिए महिला सहायक नहीं मिलीं।
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डीसी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
निजी स्कूल बसों की जांच करने को लेकर शुक्रवार को लघु सचिवालय में परिवहन विभाग के एसीएस ने वीसी के जरिये डीसी कैप्टन मनोज कुमार व जिला परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बात की। इसमें एसीएस ने नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा। वहीं डीसी ने डीटीओ स्टाफ से कहा कि बसों की जांच का काम समय पर पूरा होना चाहिए। यदि स्टाफ की कमी है तो वह उपलब्ध करवाएंगे। स्कूल छोटा हो या बड़ा सभी की बसों की जांच होनी चाहिए।
जांच में तीन बसें इंपाउंड की गईं हैं : हैरतजीत कौर
जिला परिवहन अधिकारी हैरतजीत कौर ने बताया कि निजी स्कूल बसों की जांच के बाद तीन स्कूल बसों को इंपाउंड किया गया है। इसके अलावा अन्य बसों में जो खामियां मिली हैं, उन्हें दूर करने को कहा गया है। जल्द ही सभी बसों की जांच पूरी कर ली जाएगी। साथ ही बसों की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।