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Yamuna Nagar News: एथलेटिक्स का प्रशिक्षण देकर पूरे कर रहे युवाओं के सपने
Fri, 12 Jun 2026 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 12 Jun 2026 12:55 AM IST
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कोच नायब सिंह। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। टोडरपुर गांव के 42 वर्षीय नायब सिंह साढौरा स्टेडियम में युवाओं को एथलेटिक्स का प्रशिक्षण देकर उन्हें सुरक्षा बलों में या फिर खेलों के माध्यम से अपना कॅरियर बनाने में मदद कर रहे हैं। 2019 में केवल 15 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने से शुरू हुई उनकी रनिंग अकादमी में इस समय 150 युवा प्रशिक्षण पा रहे हैं, जिनमें लगभग 50 लड़कियां भी शामिल हैं।
इस प्रशिक्षण की बदौलत लगभग 55 युवाओं को विभिन्न सुरक्षा बलों में नौकरी मिल चुकी है। जबकि कई युवा एथलेटिक्स के माध्यम से अपना कॅरियर बना चुके हैं। नायब सिंह अपनी अकादमी में प्रशिक्षण पाने वाले लड़कों से तो नाममात्र ही फीस लेते है जबकि लड़कियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
स्टेडियम में अलसुबह से ही नायब सिंह युवाओं को दौड़, पुश-अप्स, पुल-अप्स और बीम की ट्रेनिंग देना शुरू कर देते हैं। स्टेडियम में सुविधाओं की कमी होने के बावजूद कैसा भी मौसम हो न तो नायब सिंह और न ही उनसे प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं के कदम रुकते हैं। नायब सिंह युवाओं को प्रशिक्षण देने के अलावा खुद भी एक नामी एथलीट हैं।
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राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की अपने आयु वर्ग की मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के अलावा विभिन्न जगहों पर होने वाली मैराथन में वह कई बार स्वर्ण व रजत पदक जीत चुके हैं। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाला उनका बेटा जश्न सिंह भी एथलेटिक्स में कई पदक जीत चुका है। बास्केटबॉल कोच गुरुचरण सिंह, रिटायर्ड बीईओ अख्तर अली व उज्ज्वल भविष्य संस्था के राकेश शर्मा ने बताया कि नायब सिंह ने न केवल युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित किया है, बल्कि उन्हें नशे से दूर रहने राह भी दिखाई है।
सेना में भर्ती होते ही लग गई थी चोट
नायब सिंह 2008 में सेना में भर्ती भी हो गए थे। सेना में नौकरी शुरु करने से पहले ही हुए एक हादसे में नायब सिंह को गंभीर चोट लगी जिसकी वजह से सेना के माध्यम से देश सेवा करने का उनका सपना अधूरा ही रह गया। अपना सपना अधूरा रह जाने के कारण एकबारगी तो नायब सिंह हताश हो गए थे। 2019 में कुरुक्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व कोच लक्ष्मण सिंह की प्रेरणा से उन्होंने पटियाला की साई अकादमी से एथलेटिक्स कोच का प्रशिक्षण पाने के बाद साढौरा स्टेडियम में अकादमी की स्थापना की।
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साढौरा। टोडरपुर गांव के 42 वर्षीय नायब सिंह साढौरा स्टेडियम में युवाओं को एथलेटिक्स का प्रशिक्षण देकर उन्हें सुरक्षा बलों में या फिर खेलों के माध्यम से अपना कॅरियर बनाने में मदद कर रहे हैं। 2019 में केवल 15 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने से शुरू हुई उनकी रनिंग अकादमी में इस समय 150 युवा प्रशिक्षण पा रहे हैं, जिनमें लगभग 50 लड़कियां भी शामिल हैं।
इस प्रशिक्षण की बदौलत लगभग 55 युवाओं को विभिन्न सुरक्षा बलों में नौकरी मिल चुकी है। जबकि कई युवा एथलेटिक्स के माध्यम से अपना कॅरियर बना चुके हैं। नायब सिंह अपनी अकादमी में प्रशिक्षण पाने वाले लड़कों से तो नाममात्र ही फीस लेते है जबकि लड़कियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
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स्टेडियम में अलसुबह से ही नायब सिंह युवाओं को दौड़, पुश-अप्स, पुल-अप्स और बीम की ट्रेनिंग देना शुरू कर देते हैं। स्टेडियम में सुविधाओं की कमी होने के बावजूद कैसा भी मौसम हो न तो नायब सिंह और न ही उनसे प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं के कदम रुकते हैं। नायब सिंह युवाओं को प्रशिक्षण देने के अलावा खुद भी एक नामी एथलीट हैं।
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राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की अपने आयु वर्ग की मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के अलावा विभिन्न जगहों पर होने वाली मैराथन में वह कई बार स्वर्ण व रजत पदक जीत चुके हैं। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाला उनका बेटा जश्न सिंह भी एथलेटिक्स में कई पदक जीत चुका है। बास्केटबॉल कोच गुरुचरण सिंह, रिटायर्ड बीईओ अख्तर अली व उज्ज्वल भविष्य संस्था के राकेश शर्मा ने बताया कि नायब सिंह ने न केवल युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित किया है, बल्कि उन्हें नशे से दूर रहने राह भी दिखाई है।
सेना में भर्ती होते ही लग गई थी चोट
नायब सिंह 2008 में सेना में भर्ती भी हो गए थे। सेना में नौकरी शुरु करने से पहले ही हुए एक हादसे में नायब सिंह को गंभीर चोट लगी जिसकी वजह से सेना के माध्यम से देश सेवा करने का उनका सपना अधूरा ही रह गया। अपना सपना अधूरा रह जाने के कारण एकबारगी तो नायब सिंह हताश हो गए थे। 2019 में कुरुक्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व कोच लक्ष्मण सिंह की प्रेरणा से उन्होंने पटियाला की साई अकादमी से एथलेटिक्स कोच का प्रशिक्षण पाने के बाद साढौरा स्टेडियम में अकादमी की स्थापना की।