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- कंप्यूटर डाटा एंट्री करने में हेराफेरी कर चुराए 84 लाख 24 हजार रुपये
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शहर के मशहूर इस्जैक कंपनी में वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस के इस्तेमाल करने में लाखों रुपये की हेराफेरी हुई। आरोप कंपनी के वैल्डिंग विभाग में डिप्टी मैनेजर रहे मयंक सिंगला व खरीद अधिकारी विक्रम सेन समेत चार लोगों पर लगा है। आरोप है कि आरोपी डिप्टी मैनेजर ने कंप्यूटर में गलत डाटा एंट्री कर हेराफेरी कर 84 लाख 24 हजार रुपये वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस चोरी किए। पुलिस ने मामले में चारों आरोपियों पर केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
इस्जैक कंपनी के वाइस प्रेजिडेंट सतीश भाटिया ने सदर पुलिस को दी शिकायत में बताया कि कंपनी की दो ईकाईयां है। एक यमुनानगर व दूसरी रतनगढ़ में स्थित है। कंपनी में बॉयलर पार्टस जैसे ट्यूब, पाइप व अन्य मशीनरी व उपकरण बनाए जाते है। कंपनी में सरोजिनी कॉलोनी निवासी मयंक सिंगला वैल्डिंग विभाग में डिप्टी मैनेजर, पलवल की गंगा विहार कॉलोनी निवासी विक्रम सेन खरीद अधिकारी थे। बॉयलर पार्ट व पाइप आदि बनाते समय हम उत्तम किस्म के वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस का इस्तेमाल करते है। इस इलेक्ट्रोडस की खरीद वे मुंबई की मैसर्ज होनावर इलेक्ट्रोडस कंपनी से 2440 रुपये प्रति किलो के हिसाब से करते है। वैल्डिंग विभाग के डिप्टी मैनेजर मयंक सिंगला इन इलेक्ट्रोडस की स्टॉक का हिसाब रखते थे। आरोप है कि मयंक सिंगला वास्तविक खपत के हिसाब से कंप्यूटर में इसकी एंट्री नहीं करते थे। बल्कि कंप्यूटर में अपनी मर्जी से इलेक्ट्रोडस का गलत रिकार्ड दर्ज करता था। नियमित जांच करने पर वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस की वास्तविक खपत व स्टोर के स्टॉक में अंतर पाया गया। ऑडिट जांच में सामने आया कि 18 मई 2018 से अक्तूबर 2019 के दौरान 6877 किलोग्राम वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस की खरीद हुई। जबकि इस अवधि में 3450 किलोग्राम की खपत हुई। जबकि 2926 किलोग्राम इलेक्ट्रोडस राकेश भारद्वाज को दिए गए। इस हिसाब से बकाया 927 किलोग्राम इलेक्ट्रोडस स्टोर में मिलने चाहिए थे। लेकिन नहीं मिले। आरोप है कि डिप्टी मैनेजर मयंक सिंगला, खरीद अधिकारी विक्रम सेन, मनीमाजरा चंडीगढ़ निवासी राकेश भारद्वाज, विश्वकर्मा चौक निवासी विकास अग्रवाल ने मिलकर कंपनी के कंप्यूटर डाटा में हेराफेरी कर कंपनी के करीब 84 लाख 24 हजार रुपये के वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस चोरी किए है। इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 408, 468, 477 ए, 380, 381, 120 बी, 43, 66, आईटी एक्ट के तहत केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
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इस्जैक कंपनी के वाइस प्रेजिडेंट सतीश भाटिया ने सदर पुलिस को दी शिकायत में बताया कि कंपनी की दो ईकाईयां है। एक यमुनानगर व दूसरी रतनगढ़ में स्थित है। कंपनी में बॉयलर पार्टस जैसे ट्यूब, पाइप व अन्य मशीनरी व उपकरण बनाए जाते है। कंपनी में सरोजिनी कॉलोनी निवासी मयंक सिंगला वैल्डिंग विभाग में डिप्टी मैनेजर, पलवल की गंगा विहार कॉलोनी निवासी विक्रम सेन खरीद अधिकारी थे। बॉयलर पार्ट व पाइप आदि बनाते समय हम उत्तम किस्म के वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस का इस्तेमाल करते है। इस इलेक्ट्रोडस की खरीद वे मुंबई की मैसर्ज होनावर इलेक्ट्रोडस कंपनी से 2440 रुपये प्रति किलो के हिसाब से करते है। वैल्डिंग विभाग के डिप्टी मैनेजर मयंक सिंगला इन इलेक्ट्रोडस की स्टॉक का हिसाब रखते थे। आरोप है कि मयंक सिंगला वास्तविक खपत के हिसाब से कंप्यूटर में इसकी एंट्री नहीं करते थे। बल्कि कंप्यूटर में अपनी मर्जी से इलेक्ट्रोडस का गलत रिकार्ड दर्ज करता था। नियमित जांच करने पर वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस की वास्तविक खपत व स्टोर के स्टॉक में अंतर पाया गया। ऑडिट जांच में सामने आया कि 18 मई 2018 से अक्तूबर 2019 के दौरान 6877 किलोग्राम वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस की खरीद हुई। जबकि इस अवधि में 3450 किलोग्राम की खपत हुई। जबकि 2926 किलोग्राम इलेक्ट्रोडस राकेश भारद्वाज को दिए गए। इस हिसाब से बकाया 927 किलोग्राम इलेक्ट्रोडस स्टोर में मिलने चाहिए थे। लेकिन नहीं मिले। आरोप है कि डिप्टी मैनेजर मयंक सिंगला, खरीद अधिकारी विक्रम सेन, मनीमाजरा चंडीगढ़ निवासी राकेश भारद्वाज, विश्वकर्मा चौक निवासी विकास अग्रवाल ने मिलकर कंपनी के कंप्यूटर डाटा में हेराफेरी कर कंपनी के करीब 84 लाख 24 हजार रुपये के वैल्डिंग इलेक्ट्रोडस चोरी किए है। इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 408, 468, 477 ए, 380, 381, 120 बी, 43, 66, आईटी एक्ट के तहत केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
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