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40 साल से पटरी बनाने की डिमांड, फिर निचले क्षेत्र में मंडराया खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 01:12 AM IST
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Four decades old problem not solved, water will fill again
चार दशक बीत गए छछरौली के घाड़ क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों की सोमनदी और पथराला नदी की पटरी बनाने की मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई। इन नदियों में पटरी न बनाए जाने से वीरवार को हुई मानसून की पहली बारिश ने ग्रामीणों नींद एक फिर से उड़ा कर रख दी है। मानसून में हिमाचल की शिवालिक की पहाड़ियों में भारी बारिश हुई तो ये दोनों नदियां फिर से क्षेत्र में तबाही मचा सकती है।
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सोमनदी व पथराला दोनों बरसाती नदियां हैं। ये दोनों आमदिनों में सूखी रहती हैं। बरसात में उफान पर रहती हैं। इस बार भी मानसून आने से निचले क्षेत्र में फिर से खतरा मंडरा गया है। साल 2012 की बात करें तो उस दौरान इस एरिया में बाढ़ आ गई थी। लोगों ने घरों की छत पर सामान रख खुद को बचाया था। यहां तक लोगों ने मवेशियों को भी छतों पर पहुंचा दिया था। कई दिन तक बाढ़ का पानी नहीं उतरा था। इसके बाद साल 2016 में ज्यादा बारिश हुई थी इसमें भी जलभराव की स्थिति बनी थी।
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दरअसल पथराला व सोमनदी दोनों ही शिवालिक की पहाड़ियों से निकलकर निचले स्तर पर बह रही है। सोमनदी पश्चिम सेे पूर्व की तरफ और पथराला नदी पूर्व से पश्चिम की तरफ बह रही है। इनके बीच में छछरौली घाड़ क्षेत्र के दौलतपुर, मुकारमपुर, खानूवाला, लोपो, सलेमपुर, हड़ौली, पिहानो, खानपुरी, शाहपुर, डमौली, बरौती माजरा, तारवाला, बलौली, हाफजी, दसौरा, दसौरी, याकूबपुर, उर्जनी व रायपुर आदि गांव हैं। जो इन दोनों नदियों के बीच में आते हैं। और जब दोनों नदियां उफान पर होती है तो ये गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। इससे ग्रामीणों की सैकड़ों एकड़ फसलें भी तबाह हो जाती है।
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घाड़ क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण अशोक, मोहम्मद, कौशिक, सलीम, यूसुफ आदि ने बताया कि उनके एरिया में बाढ़ आने के दो बड़े कारण हैं। पहला कोठड़ा कान सिंह से लेकर याकूबपुर तक पथराला वाली नदी संकरी हो चुकी है। दूसरा कारण लोपो से छछरौली के जंगलों तक लगभग तीन किलोमीटर का एरिया पड़ता है। यहां नदी पर पटरी नहीं है। ऐसे में जब बारिश से नदियों में पानी आता है तो बाढ़ की स्थिति पैदा होती है। जबकि नदियों के साथ लगते गांवों के लोग 40 साल से नदियों के किनारे पटरी बनाने की मांग करते आ रहे हैं जो आज तक पूरी नहीं हो पाई। उनका कहना है वीरवार को हुई मानसून की पहली बारिश में भी इन गांवों के लोगों की नींद उड़ा दी।

इस एरिया में विजिट किया जाएगा। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। लेकिन बाढ़ बचाव को लेकर हमने अपनी तरफ से पूरी तैयारियां की हुई हैं। टीमें भी बना रखी हैं।
-पार्थ गुप्ता, डीसी, यमुनानगर।
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