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सालों से गंदे पानी की निकासी नहीं करवा सका कोई समाधान, फिर जगी आस
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छछरौली। मैं छछरौली हूं। वैसे तो मेरा अतीत बहुत पुराना और गौरवशाली है। पुराने समय में लोग मुझे कलसिया रियासत के नाम से जानते थे। समय बदलता गया और मेरा आकार व नाम भी बदल गया। एक समय में कलसिया राजा रविशेर सिंह की रियासत हुआ करती थी, जो देहरादून से पटियाला तक फैली हुई थी। रियासतें टूटने के बाद समय बदलता गया और आज लोग मुझे छछरौली के नाम से जानते हैं। बंटवारे के समय पुराने लोग और बिछड़े कुछ नए मेरे साथ रहने व चलने लगे। समय बीतता गया दिन महीने साल देखते ही देखते गुजर गए। मुझे पंचायत का दर्जा मिला। फिर नगरपालिका बनाया दिया गया और फिर दोबारा पंचायत बना दिया।
कभी मेरी गिनती विधानसभा क्षेत्र में होती थी। 2004 में छछरौली विधानसभा खत्म कर दी गई और जगाधरी में जोड़ दिया गया। छछरौली से प्रत्याशी विधायक बने और विधानसभा पहुंचे। लोगों की सुख सुविधा के लिए मकान, दुकानें, बाजार समय के साथ बनते गए। छछरौली में पटवारखाना भी होता था। इस समय मैं छछरौली रियासत के बाद पंचायत नगरपालिका दोबारा पंचायत और अब सब डिवीजन भी बन गई हूं। विकास की बात करें तो यह कहना ग़लत होगा कि विकास नहीं हुआ। विकास हुआ है जरूरत के अनुसार होता गया। इस समय छछरौली में बस स्टैंड, तहसील, राजकीय महाविद्यालय, आईटीआई, अस्पताल सहित अन्य मूल सुविधाओं के विभिन्न कार्य हुए हैं।
मेरी सबसे बड़ी तकलीफ सफाई व गंदे पानी की निकासी है। मेरे सहित मेरे साथ रहने वाले बच्चे, बड़े, बुजुर्ग, महिला, पुरुष सभी लोग परेशान हैं। पिछले पंचायती योजना में भी सरकार व पंचायत ने दिल खोलकर पैसा खर्च कर विकास करवाया। जिनमें सड़कें, गलियां, सीवरेज, सामुदायिक केंद्र सहित श्मशान घाट का सुंदरीकरण किया। यह अन्य गांवों के लिए भी मिसाल बना। लेकिन सफाई व गंदे पानी की निकासी का समाधान पिछली पंचायत भी नहीं करवा सकी।
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चर्चा का विषय बने ये दो मुद्दे
इस समय यही दो मुद्दे चर्चा का विषय है। देखना है कि दशकों से चली आ रही सफाई व गंदे पानी की निकासी का समाधान कब होता है। मेरे तो इसके इंतजार में सालों बीतते जा रहे हैं। हर चुनाव में मैं अपने बच्चों व प्रत्याशियों से नई आस बांध लेता हूं। उम्मीद है कि नई पंचायत पानी निकासी का प्रबंध करेगी। कूड़ा उठाने के लिए भी कर्मचारी आएगा और मेरी गिनती साफ सुथरी पंचायतों में होगी।
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कभी मेरी गिनती विधानसभा क्षेत्र में होती थी। 2004 में छछरौली विधानसभा खत्म कर दी गई और जगाधरी में जोड़ दिया गया। छछरौली से प्रत्याशी विधायक बने और विधानसभा पहुंचे। लोगों की सुख सुविधा के लिए मकान, दुकानें, बाजार समय के साथ बनते गए। छछरौली में पटवारखाना भी होता था। इस समय मैं छछरौली रियासत के बाद पंचायत नगरपालिका दोबारा पंचायत और अब सब डिवीजन भी बन गई हूं। विकास की बात करें तो यह कहना ग़लत होगा कि विकास नहीं हुआ। विकास हुआ है जरूरत के अनुसार होता गया। इस समय छछरौली में बस स्टैंड, तहसील, राजकीय महाविद्यालय, आईटीआई, अस्पताल सहित अन्य मूल सुविधाओं के विभिन्न कार्य हुए हैं।
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मेरी सबसे बड़ी तकलीफ सफाई व गंदे पानी की निकासी है। मेरे सहित मेरे साथ रहने वाले बच्चे, बड़े, बुजुर्ग, महिला, पुरुष सभी लोग परेशान हैं। पिछले पंचायती योजना में भी सरकार व पंचायत ने दिल खोलकर पैसा खर्च कर विकास करवाया। जिनमें सड़कें, गलियां, सीवरेज, सामुदायिक केंद्र सहित श्मशान घाट का सुंदरीकरण किया। यह अन्य गांवों के लिए भी मिसाल बना। लेकिन सफाई व गंदे पानी की निकासी का समाधान पिछली पंचायत भी नहीं करवा सकी।
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चर्चा का विषय बने ये दो मुद्दे
इस समय यही दो मुद्दे चर्चा का विषय है। देखना है कि दशकों से चली आ रही सफाई व गंदे पानी की निकासी का समाधान कब होता है। मेरे तो इसके इंतजार में सालों बीतते जा रहे हैं। हर चुनाव में मैं अपने बच्चों व प्रत्याशियों से नई आस बांध लेता हूं। उम्मीद है कि नई पंचायत पानी निकासी का प्रबंध करेगी। कूड़ा उठाने के लिए भी कर्मचारी आएगा और मेरी गिनती साफ सुथरी पंचायतों में होगी।