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क्रशर जोन बंद होने से पांच लाख लोग प्रभावित

Tue, 01 Oct 2013 01:13 AM IST
यमुनानगर।
यमुनानगर। Updated Tue, 01 Oct 2013 01:13 AM IST
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five lack people affected by the closuring Crushers zone
यमुनानगर जिले के खंड छछरौली के अंतर्गत आने वाले क्रशर जोन के बंद होने से इस उद्योग से जुडे़ लगभग पांच लाख के करीब लोग प्रभावित हो रहे हैं। क्रशर जोन के बंद होने से जहां जोन से जुडे़ लोग आर्थिक तंगी झेल रहे है, वहीं सरकारी और गैर सरकारी कामों के लिए रेत बजरी नही मिल रही है।
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जोन को खुलवाने के लिए लोग प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार मिल रहे है। यूपी से हरियाणा आने वाले रास्तों को नियमानुसार खोलने व कच्चे माल को जोन में लाने के लिए जोन क्षेत्र के लोगों की एक बैठक हुई। जिसमें लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ताजेवाला से भुड़कलां जाने वाले रास्ते के साथ-साथ बेलगढ़ से मजैहदवाला वाया देवधर का रास्ता भी खोला जाए, ताकि लोगों को माल लाने में दिक्कत न हो।
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क्रशर जोन एसोसिएशन के बृजपाल सिंह छौकर, मिलन गुर्जर, अमित कुमार, संजय कुमार मांडेवाला, श्योपाल मांडेवाला, सुभाष देवधर, सतीश मांडेवाला, सुभाष नथनपुर, राजेश देवधर, सरपंच सुभाष चंद गुर्जर और सुमित पारस का कहना है कि सरकार ने जब से माइनिंग पर रोक लगाई है, तब से सरकारी और गैर सरकारी कार्यों की गति पर विराम लगा हुआ है। इस कारण जोन क्षेत्र से जुडे़ लाखों लोगों पर रोजी रोटी पर संकट बढ़ता जा रहा है।
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लोगों का कहना है कि सरकार की तरफ से ठोस नीति बनाकर जोन को भी खोला जाए। लोगों का कहना है कि सरकार और माननीय कोर्ट की तरफ से जोन क्षेत्र में लगे कुछ क्रशरों को नियमानुसार चलाने की मंजूरी तो दे दी मगर जब उनके पास कच्चा माल ही नहीं होगा तो वह कैसे क्रशर चला पाएंगे।

कई इकाइयां बंद
जोन क्षेत्र बंद होने से जोन में लगी लगभग कईं इकाइयां बंद हैं। लोगों की मांग है कि जब सरकार ने इस क्षेत्र को माइनिंग जोन घोषित किया था तब फिर अचानक इसे क्यों बंद किया गया। लोगों की मांग है कि सरकार कोई नियम बनाकर जोन क्षेत्र खोले, ताकि उन्हें और हरियाणा सरकार को लाभ मिल सके।


क्रशर चलने से मिलेगा सस्ता माल

लोगों का कहना है जब से जोन बंद पड़ा है तब से अवैध खनन कार्य में लगे कुछ लोगों को ही फायदा हो रहा है। मगर जैसे ही यूपी से माल आने के बाद क्रशर पूर्ण रूप से चल पड़ेंगे तो आम जनता को सस्ता माल उपलब्ध हो सकेगा। लोगों का कहना है कि खनन कार्य बंद होने से जो रेत-बजरी 12 से 15 सौ रुपये सैकड़ा मिल जाती थी, वही आज तीन से चार हजार रुपये में मिल रही है।
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