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बिजली से तेज दौड़ता है फाइनेंसरों का मीटर, जिंदगी भर नहीं चुकता होता कर्ज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2020 12:18 AM IST
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Finencer meter running to electricity meter
अभय सिंह
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यमुनागनर। शहर भर में फाइनेंस पर रुपये देने वालों का नियम कायदों से कोई सरोकार नहीं है। जहां सूदखोरों की भरमार है, वहीं यह धंधा पर चरम पर है। हालांकि ब्याज व सूद वसूलने के लिए लाइसेंस सबसे अनिवार्य है। लेकिन लाइसेंस व बिना लाइसेंस वालों की एक बहुत बड़ी लॉबी है। सभी फाइनेंसर नियमों को ताक पर रखकर जबरन वसूली करते हैं। इन फाइनेंसरों ने किस श्रेणी को कर्ज देना है, वह पहले से ही तय किया गया होता है। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि यह फाइनेंसर अधिकांश छोटे कर्मचारियों, मजदूरों, ठेला, फड़ी लगाने वाले, दिहाड़ीदारों को कर्ज देते हैं। इन जरूरतमंदों की मजबूरी का फायदा उठाकर रोजना ब्याज वसूलते हैं। फिर अपनी मर्जी से ब्याज मूल में जोड़ते हुए चक्रवृद्धि ब्याज वसूलते हैं। जिसके बाद चाह कर भी कर्जदार इनके चंगुल से नहीं निकल पाता। इसकी पुष्टि फाइनेंसरों से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले मनोज जोशी अपने सुसाइड नोट में भी कर चुके हैं। यह फाइनेंसर कर्ज के एवज में लोगों का सामान, आभूषण, जमीन जायदाद तक हड़प कर जाते हैं। इसके अलावा ये सरकारी या निजी नौकरीपेशा कर्मचारियों को उधार देते हैं। उनकी चेकबुक, पासबुक और एटीएम कार्ड अपने पास ही रखते हैं।
इसे कहते हैं मीटर
फाइनेंसरों की ज्यादतियों से तंग आकर आत्महत्या करने वालों को ध्यान में रखते हुए अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की। इसमें जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद भयावह हैं। सामने आया कि फाइनेंसर मीटर पर रुपये देते हैं। मीटर प्रतिदिन होता है। मान लीजिए व्यक्ति ने फाइनेंसर से दस हजार रुपये कर्ज लिया। फाइनेंसर इसे मीटर पर लोन कर देता है। यदि पहली तारीख को रुपये लिए तो पहले दिन से ही मीटर घूमना शुरू हो जाता है। इस समय शहर में दस हजार रुपये का मीटर 40 रुपये है अर्थात 40 रुपये प्रतिदिन। जिसका मासिक ब्याज दर 12 प्रतिशत बनता है। एक महीने में सूदखोर 1200 रुपये ब्याज ले लेता है। जबकि मूलधन उतना ही खड़ा है। यदि कोई जरूरतमंद यह दस हजार रुपये साल भर न दे पाए तो एक साल में मूलधन से 40 प्रतिशत अधिक ब्याज हो जाता है। मतलब एक साल का ब्याज 14 हजार 400 रुपये हो गया। वहीं इसमें यह शर्त भी है कि कर्ज एक मुश्त में ही वापिस लिया जाएगा। बल्कि सूदखोर इसे एडवांस मीटर कहकर रख लेता है। यदि इसका विरोध किया जाए तो कर्जदार को बदसलूकी, मारपीट सहित अन्य प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
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बिना सरकार व प्रशासन की अनुमति के कोई व्यक्ति सूद नहीं ले सकता। जिसके पास अनुमति व लाइसेंस है, वह भी मन मुताबिक ब्याज नहीं ले सकता। उसे निर्धारित नियमानुसार ही काम करना होगा। ऐसे सूदखोरों पर कार्रवाई की जाएगी।
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-बीबी कौशिक, सीटीएम, यमुनानगर।
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