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Yamuna Nagar News: छात्राओं को स्वदेशी उत्पादों के प्रति किया जागरूक
Sun, 20 Sep 2026 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 20 Sep 2026 01:02 AM IST
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जागरूकता कार्यक्रम में मौजूद अतिथि, शिक्षक व छात्राएं। संस्थान
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हिंदू गर्ल्स कॉलेज जगाधरी में हरित पहल के तहत अंग्रेजी विभाग की ओर से गोमय नवयुग परिवार के सहयोग से स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण आत्मनिर्भरता विषय पर विशेषज्ञ वार्ता आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों और ग्रामीण स्वरोजगार के प्रति जागरूक करना रहा।
प्राचार्या मोनिका खुराना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं से स्वदेशी और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया। डॉ. सुरुचि कालड़ा चौधरी ने बताया कि गोबर जैसे जैविक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इस दौरान गोबर से तैयार विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में गोबर के दीये, सजावटी वस्तुएं, जैविक खाद, कंपोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट, उपले, बायोमास ईंधन, धूप, हवन कप, अगरबत्ती, सीड बॉल्स, हस्तशिल्प और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग सहित निर्माण सामग्री प्रदर्शित की गई।
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प्राकृतिक सामग्री से बने मच्छर-रोधी उत्पादों की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और प्रकृति के सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया। पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी, छात्राएं और अतिथि मौजूद रहे।
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जगाधरी। हिंदू गर्ल्स कॉलेज जगाधरी में हरित पहल के तहत अंग्रेजी विभाग की ओर से गोमय नवयुग परिवार के सहयोग से स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण आत्मनिर्भरता विषय पर विशेषज्ञ वार्ता आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों और ग्रामीण स्वरोजगार के प्रति जागरूक करना रहा।
प्राचार्या मोनिका खुराना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं से स्वदेशी और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया। डॉ. सुरुचि कालड़ा चौधरी ने बताया कि गोबर जैसे जैविक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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इस दौरान गोबर से तैयार विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में गोबर के दीये, सजावटी वस्तुएं, जैविक खाद, कंपोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट, उपले, बायोमास ईंधन, धूप, हवन कप, अगरबत्ती, सीड बॉल्स, हस्तशिल्प और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग सहित निर्माण सामग्री प्रदर्शित की गई।
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प्राकृतिक सामग्री से बने मच्छर-रोधी उत्पादों की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और प्रकृति के सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया। पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी, छात्राएं और अतिथि मौजूद रहे।