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रेल पटरियों पर बैठे थे किसान, आ गई मालगाड़ी
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गोलनपुर फ्लाईओवर के नीचे रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। संयुक्त किसान मोर्चा के रेल रोको आंदोलन के तहत सोमवार को किसानों गोलनपुर फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे ट्रैक पर बैठकर धरना दिया। इसी दौरान अंबाला की तरफ से मालगाड़ी आता देख किसान ट्रैक के बीच ही खड़े होकर नारेबाजी करते लगे। इस पर चालक ने भी रफ्तार कम कर दी और पुल के पहले ही गाड़ी रुक गई। इस पर किसानों ने इंजन के सामने खड़े होकर जमकर नारेबाजी की।
वहीं ट्रेन आती देख वहां तैनात अधिकारियों व सुरक्षा बलों के हाथ पांव फूल गए। उल्लेखनीय है कि 27 अगस्त के भारत बंद के दौरान भी जब किसान ट्रैक पर बैठे थे तो वहां ट्रेन आ गई थी। इस बार भी मालगाड़ी पहुंच गई। पर किसानों ने नाराजगी जताई। किसान नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से रेलवे को पूर्व में ही नोटिस दे दिया गया था, लेकिन जानबूझ कर ऐसा किया जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान ट्रेन भेजकर उन्हें रौंदने या डराने का प्रयास किया जा रहा है।
भाकियू जिला निदेशक व अंबाला मंडल प्रभारी मनदीप रोड छप्पर व भाकियू नेता हरपाल सुढैल ने नेतृत्व किया। मनदीप रोडछप्पर ने कहा कि सरकार तुरंत प्रभाव से मंत्री अजय मिश्र को बर्खास्त कर गिरफ्तार करे। लखीमपुर खीरी की कांड की उच्च स्तरीय जांच हो। जब तक आरोपी मंत्री पद पर होगा तो जांच प्रभावित होगी। ऐसे में किसानों का न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी। इस दौरान कृष्णपाल, जरनैल सिंह सांगवान, सतपाल कौशिक, गुरमेज सिंह सहित दर्जनों किसान उपस्थित रहे।
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मालगाड़ी का चालक बोला, मुझे सिग्नल मिला था
संयुक्त किसान मोर्चा ने जिला प्रशासन सहित रेलवे को सुबह 10 से शाम चार बजे तक ट्रैक पर बैठने का नोटिस दिया था। बावजूद इसके सुबह साढ़े 10 बजे गोलनपुर ओवरब्रिज के पास मालगाड़ी आ गई। ऐसे में किसानों ने इसे रेलवे की जानबूझ कर की गई गलती बताया। उन्होंने कहा कि भारत बंद के दौरान अंबाला और सहारनपुर की तरफ से मालगाड़ियां भेज दी गई थी। इस बार भी ऐसा ही किया गया। मालगाड़ी चालक ने बताया कि उसे निकलने का सिग्नल दिया गया था। उसे मतलब नहीं कि ट्रैक पर किसान हैं या नहीं, उसने सिग्नल देखा और चल पड़ा। ट्रैक पर कई जगह लगे लाल झंडे देखकर उसने रफ्तार कम कर ली थी।
आंदोलन से पांच दर्जन गाड़ियां प्रभावित, एक रद्द
किसानों के रेल रोको आंदोलन के कारण पांच दर्जन गाड़ियां प्रभावित हुई। जिन्हें विभिन्न स्टेशन पर रोका गया। जबकि अंबाला से सहारनपुर जाने वाली एक्सप्रेस पूर्ण रूप से रद्द कर दी गई। रोकी गई गाड़ियां शाम को किसानों के धरने से उठने के बाद रवाना की गईं। इस दौरान लखनऊ से चलकर चंडीगढ़ जाने वाली एक्सप्रेस, जयनगर अमृतसर एक्सप्रेस, रामनगर चंडीगढ़ एक्सप्रेस को सहारनपुर से पहले ही रोक दिया गया। श्रीगंगानगर हरिद्वार इंटरसिटी को राजपुरा में, अमृतसर हरिद्वार जनशताब्दी सरहिंद में रोका गया। वहीं अंबाला-सहारनपुर विशेष एक्सप्रेस पूर्ण रूप से रद्द कर दी गई।
रेलवे स्टेशन रहा सुनसान
आंदोलन के कारण सोमवार रेलवे स्टेशन सुनसान रहा। स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों को वापस जाना पड़ा। वहीं पूछताछ केंद्र पर यात्रियों की भीड़ लगी रही। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। संबंधियों को स्टेशन पर लेने आए लोग कर्मचारियों से ट्रेन की स्थिति का पता करते नजर आए। वहीं सवारी नहीं होने के कारण रेलवे स्टेशन स्थित ऑटो स्टैंड भी खाली रहा। शाम को यातायात बहाल होने के बाद ऑटो चले।
सुबह दस बजे किसानों के आने का समय था, लेकिन ब्रिज पर किसान नहीं पहुंचे। किसानों के न पहुंचने के बाद कुछ देर इंतजार किया और फिर गाड़ी रवाना की गई। हमारा काम रेल यातायात का सुचारु रूप से संचालन करना है न की ट्रेन रोकना। इसके बाद किसान वहां पहुंच गए, तो ट्रेनें रोक दी गईं। -जीएम सिंह, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला।
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यमुनानगर। संयुक्त किसान मोर्चा के रेल रोको आंदोलन के तहत सोमवार को किसानों गोलनपुर फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे ट्रैक पर बैठकर धरना दिया। इसी दौरान अंबाला की तरफ से मालगाड़ी आता देख किसान ट्रैक के बीच ही खड़े होकर नारेबाजी करते लगे। इस पर चालक ने भी रफ्तार कम कर दी और पुल के पहले ही गाड़ी रुक गई। इस पर किसानों ने इंजन के सामने खड़े होकर जमकर नारेबाजी की।
वहीं ट्रेन आती देख वहां तैनात अधिकारियों व सुरक्षा बलों के हाथ पांव फूल गए। उल्लेखनीय है कि 27 अगस्त के भारत बंद के दौरान भी जब किसान ट्रैक पर बैठे थे तो वहां ट्रेन आ गई थी। इस बार भी मालगाड़ी पहुंच गई। पर किसानों ने नाराजगी जताई। किसान नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से रेलवे को पूर्व में ही नोटिस दे दिया गया था, लेकिन जानबूझ कर ऐसा किया जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान ट्रेन भेजकर उन्हें रौंदने या डराने का प्रयास किया जा रहा है।
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भाकियू जिला निदेशक व अंबाला मंडल प्रभारी मनदीप रोड छप्पर व भाकियू नेता हरपाल सुढैल ने नेतृत्व किया। मनदीप रोडछप्पर ने कहा कि सरकार तुरंत प्रभाव से मंत्री अजय मिश्र को बर्खास्त कर गिरफ्तार करे। लखीमपुर खीरी की कांड की उच्च स्तरीय जांच हो। जब तक आरोपी मंत्री पद पर होगा तो जांच प्रभावित होगी। ऐसे में किसानों का न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी। इस दौरान कृष्णपाल, जरनैल सिंह सांगवान, सतपाल कौशिक, गुरमेज सिंह सहित दर्जनों किसान उपस्थित रहे।
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मालगाड़ी का चालक बोला, मुझे सिग्नल मिला था
संयुक्त किसान मोर्चा ने जिला प्रशासन सहित रेलवे को सुबह 10 से शाम चार बजे तक ट्रैक पर बैठने का नोटिस दिया था। बावजूद इसके सुबह साढ़े 10 बजे गोलनपुर ओवरब्रिज के पास मालगाड़ी आ गई। ऐसे में किसानों ने इसे रेलवे की जानबूझ कर की गई गलती बताया। उन्होंने कहा कि भारत बंद के दौरान अंबाला और सहारनपुर की तरफ से मालगाड़ियां भेज दी गई थी। इस बार भी ऐसा ही किया गया। मालगाड़ी चालक ने बताया कि उसे निकलने का सिग्नल दिया गया था। उसे मतलब नहीं कि ट्रैक पर किसान हैं या नहीं, उसने सिग्नल देखा और चल पड़ा। ट्रैक पर कई जगह लगे लाल झंडे देखकर उसने रफ्तार कम कर ली थी।
आंदोलन से पांच दर्जन गाड़ियां प्रभावित, एक रद्द
किसानों के रेल रोको आंदोलन के कारण पांच दर्जन गाड़ियां प्रभावित हुई। जिन्हें विभिन्न स्टेशन पर रोका गया। जबकि अंबाला से सहारनपुर जाने वाली एक्सप्रेस पूर्ण रूप से रद्द कर दी गई। रोकी गई गाड़ियां शाम को किसानों के धरने से उठने के बाद रवाना की गईं। इस दौरान लखनऊ से चलकर चंडीगढ़ जाने वाली एक्सप्रेस, जयनगर अमृतसर एक्सप्रेस, रामनगर चंडीगढ़ एक्सप्रेस को सहारनपुर से पहले ही रोक दिया गया। श्रीगंगानगर हरिद्वार इंटरसिटी को राजपुरा में, अमृतसर हरिद्वार जनशताब्दी सरहिंद में रोका गया। वहीं अंबाला-सहारनपुर विशेष एक्सप्रेस पूर्ण रूप से रद्द कर दी गई।
रेलवे स्टेशन रहा सुनसान
आंदोलन के कारण सोमवार रेलवे स्टेशन सुनसान रहा। स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों को वापस जाना पड़ा। वहीं पूछताछ केंद्र पर यात्रियों की भीड़ लगी रही। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। संबंधियों को स्टेशन पर लेने आए लोग कर्मचारियों से ट्रेन की स्थिति का पता करते नजर आए। वहीं सवारी नहीं होने के कारण रेलवे स्टेशन स्थित ऑटो स्टैंड भी खाली रहा। शाम को यातायात बहाल होने के बाद ऑटो चले।
सुबह दस बजे किसानों के आने का समय था, लेकिन ब्रिज पर किसान नहीं पहुंचे। किसानों के न पहुंचने के बाद कुछ देर इंतजार किया और फिर गाड़ी रवाना की गई। हमारा काम रेल यातायात का सुचारु रूप से संचालन करना है न की ट्रेन रोकना। इसके बाद किसान वहां पहुंच गए, तो ट्रेनें रोक दी गईं। -जीएम सिंह, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला।

गोलनपुर फ्लाईओवर के नीचे नारेबाजी करते किसान। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar

आंदोलन के दौरान पहुंची मालगाड़ी रोककर नारेबाजी करते किसान। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar

ट्रेन न आने के कारण सुनसान पड़ा रेलवे स्टेशन। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar