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तकनीक अपनाकर लागत कम करें किसान : डॉ. पवन
Mon, 17 Nov 2025 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 17 Nov 2025 12:18 AM IST
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कार्यक्रम के दौरान मौजूद मुख्य अतिथि, केंद्र के अधिकारी व किसान। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दामला स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा रबी फसलों में एकीकृत फसल प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि रबी फसल में एकीकृत फसल प्रबंधन तकनीक अपनाकर किसान उत्पादन लागत में कमी ला सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मृदा की उर्वरता में कमी, कीट एवं रोगों का बढ़ता प्रकोप तथा बदलती जलवायु परिस्थितियां कृषि के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में एकीकृत फसल प्रबंधन तकनीक किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। डॉ. आराधना बाली ने प्रशिक्षण के दौरान किसानों को एकीकृत खरपतवार प्रबंधन, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड सैचुरेशन अभियान के अंतर्गत किसानों को जागरूक किया।
उन्होंने प्री इमरजेंस खरपतवार प्रबंधन यानी खरपतवार उगने से पहले और फसल की बिजाई के तुरंत बाद खरपतवार प्रबंधन पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि इस तरह से यदि खरपतवारों का प्रबंध किया जाए, तो मंडूसी व अन्य खरपतवार जो गेहूं की फसल को अत्यधिक नुकसान पहुंचाते हैं उनका प्रबंधन व निदान पूर्ण रूप से किया जा सकता है।
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कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. विशाल गोयल, डॉ. आशमा खान, डॉ. करण सिंह सैनी एवं डॉ. अजीत सिंह ने भी किसानों से संवाद किया और उन्हें फसल संबंधी तकनीकी जानकारी प्रदान की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से लगभग 50 प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने विशेषज्ञों से बातचीत कर रबी फसलों में उन्नत तकनीकों को अपनाने का संकल्प लिया।
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यमुनानगर। दामला स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा रबी फसलों में एकीकृत फसल प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि रबी फसल में एकीकृत फसल प्रबंधन तकनीक अपनाकर किसान उत्पादन लागत में कमी ला सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मृदा की उर्वरता में कमी, कीट एवं रोगों का बढ़ता प्रकोप तथा बदलती जलवायु परिस्थितियां कृषि के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में एकीकृत फसल प्रबंधन तकनीक किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। डॉ. आराधना बाली ने प्रशिक्षण के दौरान किसानों को एकीकृत खरपतवार प्रबंधन, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड सैचुरेशन अभियान के अंतर्गत किसानों को जागरूक किया।
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उन्होंने प्री इमरजेंस खरपतवार प्रबंधन यानी खरपतवार उगने से पहले और फसल की बिजाई के तुरंत बाद खरपतवार प्रबंधन पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि इस तरह से यदि खरपतवारों का प्रबंध किया जाए, तो मंडूसी व अन्य खरपतवार जो गेहूं की फसल को अत्यधिक नुकसान पहुंचाते हैं उनका प्रबंधन व निदान पूर्ण रूप से किया जा सकता है।
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कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. विशाल गोयल, डॉ. आशमा खान, डॉ. करण सिंह सैनी एवं डॉ. अजीत सिंह ने भी किसानों से संवाद किया और उन्हें फसल संबंधी तकनीकी जानकारी प्रदान की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से लगभग 50 प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने विशेषज्ञों से बातचीत कर रबी फसलों में उन्नत तकनीकों को अपनाने का संकल्प लिया।