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टिकाऊ खेती पद्धति को बढ़ावा दें किसान : कृषि मंत्री
Mon, 11 Nov 2024 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 11 Nov 2024 12:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने रविवार को धानुपुरा गांव में प्रगतिशील किसान प्रदीप कांबोज के खेत का दौरा किया। इस दौरान मंत्री राणा ने आधुनिक कृषि में पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों का महत्व बताया। धान के अवशेष का प्राकृतिक उर्वरक के रूप में उपयोग करने वाली टिकाऊ खेती पद्धति की सराहना की। इसे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने व किसानों के लिए उर्वरक लागत को कम करने में सहायक बताया।
कृषि मंत्री राणा ने कांबोज की विधि का अवलोकन किया, जिसमें वह धान के अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर गेहूं की खेती कर रहे हैं। जिससे डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती। कांबोज ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने यूरिया सहित रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम कर दिया है, क्योंकि धान के अवशेष से मिट्टी को पर्याप्त पोषण मिलता है और बिना डीएपी के भी अच्छी पैदावार हो जाती है।
इस विधि की सफलता से प्रभावित होकर कृषि मंत्री राणा ने कृषि विभाग के अधिकारियों को राज्य में इसी तरह की टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि प्रदीप जैसे किसान अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी यह विधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से मेल खाती है, क्योंकि यह कृषि में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान करती है।
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राणा ने अधिकारियों को फसल कटाई के समय कांबोज के खेत पर पुन: जाकर बिना डीएपी के प्राप्त पैदावार का आकलन करने के लिए भी कहा, ताकि पर्यावरण अनुकूल खेती तकनीकों को समर्थन देने के लिए ठोस डेटा जुटाया जा सके। कृषि मंत्री ने रविवार को गांव धानुपुरा, दुधली, गौलनपुर, मंडेबरी, रामनगर, अमरपुरी व फर्कपुर में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं व उनके समाधान कराने का आश्वासन दिया।
इस दौरे के दौरान यमुनानगर के उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि धान के अवशेष को मिट्टी में मिलाने से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता काफी कम की जा सकती है। इस पद्धति को व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मंत्री ने कहा कि सरकार मशीनों के लिए सब्सिडी देने की योजना बना रही है, जिससे किसान फसल अवशेष को प्रबंधित कर सकें।
कृषि मंत्री राणा ने फसल अवशेष न जलाने वाले किसानों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने की भी बात कही, जिससे प्रदूषण को कम कर स्वस्थ कृषि वातावरण का निर्माण किया जा सके। कृषि मंत्री राणा ने कांबोज की इस पहल के समर्थन में खेत में ट्रैक्टर चलाया, जो टिकाऊ पद्धतियों के प्रति सरकार के समर्थन का प्रतीक था। इस मौके पर किसान नरेंद्र राणा, जसमेर सिंह, विजय पाल सैनी, प्रदीप कांबोज, संदीप कांबोज, रिशु कांबोज, सरपंच दिप्पी सैनी, पूर्व सरपंच मास्टर मेहर सिंह, आज्ञा राम सैनी आदि मौजूद रहे।
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यमुनानगर। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने रविवार को धानुपुरा गांव में प्रगतिशील किसान प्रदीप कांबोज के खेत का दौरा किया। इस दौरान मंत्री राणा ने आधुनिक कृषि में पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों का महत्व बताया। धान के अवशेष का प्राकृतिक उर्वरक के रूप में उपयोग करने वाली टिकाऊ खेती पद्धति की सराहना की। इसे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने व किसानों के लिए उर्वरक लागत को कम करने में सहायक बताया।
कृषि मंत्री राणा ने कांबोज की विधि का अवलोकन किया, जिसमें वह धान के अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर गेहूं की खेती कर रहे हैं। जिससे डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती। कांबोज ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने यूरिया सहित रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम कर दिया है, क्योंकि धान के अवशेष से मिट्टी को पर्याप्त पोषण मिलता है और बिना डीएपी के भी अच्छी पैदावार हो जाती है।
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इस विधि की सफलता से प्रभावित होकर कृषि मंत्री राणा ने कृषि विभाग के अधिकारियों को राज्य में इसी तरह की टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि प्रदीप जैसे किसान अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी यह विधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से मेल खाती है, क्योंकि यह कृषि में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान करती है।
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राणा ने अधिकारियों को फसल कटाई के समय कांबोज के खेत पर पुन: जाकर बिना डीएपी के प्राप्त पैदावार का आकलन करने के लिए भी कहा, ताकि पर्यावरण अनुकूल खेती तकनीकों को समर्थन देने के लिए ठोस डेटा जुटाया जा सके। कृषि मंत्री ने रविवार को गांव धानुपुरा, दुधली, गौलनपुर, मंडेबरी, रामनगर, अमरपुरी व फर्कपुर में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं व उनके समाधान कराने का आश्वासन दिया।
इस दौरे के दौरान यमुनानगर के उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि धान के अवशेष को मिट्टी में मिलाने से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता काफी कम की जा सकती है। इस पद्धति को व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मंत्री ने कहा कि सरकार मशीनों के लिए सब्सिडी देने की योजना बना रही है, जिससे किसान फसल अवशेष को प्रबंधित कर सकें।
कृषि मंत्री राणा ने फसल अवशेष न जलाने वाले किसानों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने की भी बात कही, जिससे प्रदूषण को कम कर स्वस्थ कृषि वातावरण का निर्माण किया जा सके। कृषि मंत्री राणा ने कांबोज की इस पहल के समर्थन में खेत में ट्रैक्टर चलाया, जो टिकाऊ पद्धतियों के प्रति सरकार के समर्थन का प्रतीक था। इस मौके पर किसान नरेंद्र राणा, जसमेर सिंह, विजय पाल सैनी, प्रदीप कांबोज, संदीप कांबोज, रिशु कांबोज, सरपंच दिप्पी सैनी, पूर्व सरपंच मास्टर मेहर सिंह, आज्ञा राम सैनी आदि मौजूद रहे।