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Yamuna Nagar News: गेहूं की फसल में हल्की सिंचाई करें किसान
Sat, 07 Mar 2026 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:17 AM IST
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व्यासपुर रोड पर खेत में खड़ी गेहूं की फसल। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लगातार बढ़ रहे तापमान के बीच गेहूं की फसल पर संभावित असर को देखते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने किसानों के लिए सलाह जारी की है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल में पोटेशियम नाइट्रेट के छिड़काव करने के साथ हल्की सिंचाई करें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय की सलाह मे कहा गया है कि यदि दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाए तो फसल को गर्मी के प्रभाव से बचाने के लिए दो प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करना लाभकारी रहेगा। इसके लिए दो किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
पहले से बोई गई गेहूं की फसल में पोटेशियम नाइट्रेट के दो छिड़काव करीब 10 दिन के अंतराल पर किए जा सकते हैं। इसके अलावा किसानों को फसल में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करने की भी सलाह दी गई है, ताकि खेत में नमी बनी रहे और बढ़ते तापमान का असर कम हो सके। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेज हवा चलने के दौरान सिंचाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
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वहीं जिन क्षेत्रों में फव्वारा (स्प्रिंकलर) प्रणाली से सिंचाई की जाती है, वहां दोपहर के समय स्प्रिंकलर चलाकर खेत का तापमान कम करें। इससे फसल को गर्मी से राहत मिलती है और दानों के विकास पर सकारात्मक असर पड़ता है। यदि गेहूं के खेतों में मडूसी या कनकी जैसे खरपतवार दिखाई दें तो उन्हें तुरंत हाथ से निकालकर खेत से बाहर कर दें, ताकि उनके बीज खेत में न गिरें और अगले वर्ष समस्या न बढ़े।
डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि विशेषज्ञों ने पीला रतुआ रोग को लेकर सलाह दी है कि अब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर यह रोग स्वतः समाप्त होने लगता है, इसलिए इसके नियंत्रण के लिए अब फफूंदनाशक दवाओं के छिड़काव की आवश्यकता नहीं है। यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो गेहूं के दानों के भराव की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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यमुनानगर। लगातार बढ़ रहे तापमान के बीच गेहूं की फसल पर संभावित असर को देखते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने किसानों के लिए सलाह जारी की है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल में पोटेशियम नाइट्रेट के छिड़काव करने के साथ हल्की सिंचाई करें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय की सलाह मे कहा गया है कि यदि दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाए तो फसल को गर्मी के प्रभाव से बचाने के लिए दो प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करना लाभकारी रहेगा। इसके लिए दो किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
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पहले से बोई गई गेहूं की फसल में पोटेशियम नाइट्रेट के दो छिड़काव करीब 10 दिन के अंतराल पर किए जा सकते हैं। इसके अलावा किसानों को फसल में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करने की भी सलाह दी गई है, ताकि खेत में नमी बनी रहे और बढ़ते तापमान का असर कम हो सके। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेज हवा चलने के दौरान सिंचाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
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वहीं जिन क्षेत्रों में फव्वारा (स्प्रिंकलर) प्रणाली से सिंचाई की जाती है, वहां दोपहर के समय स्प्रिंकलर चलाकर खेत का तापमान कम करें। इससे फसल को गर्मी से राहत मिलती है और दानों के विकास पर सकारात्मक असर पड़ता है। यदि गेहूं के खेतों में मडूसी या कनकी जैसे खरपतवार दिखाई दें तो उन्हें तुरंत हाथ से निकालकर खेत से बाहर कर दें, ताकि उनके बीज खेत में न गिरें और अगले वर्ष समस्या न बढ़े।
डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि विशेषज्ञों ने पीला रतुआ रोग को लेकर सलाह दी है कि अब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर यह रोग स्वतः समाप्त होने लगता है, इसलिए इसके नियंत्रण के लिए अब फफूंदनाशक दवाओं के छिड़काव की आवश्यकता नहीं है। यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो गेहूं के दानों के भराव की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।