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मंडी तक नहीं पहुंचने दिया पॉप्लर
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Tue, 06 Oct 2015 12:19 AM IST
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पॉप्लर के उचित दाम न मिलने पर भड़के किसानों ने सोमवार को आंदोलन का बिगुल बजा दिया। किसानों ने लक्कड़ मंडी आने वाले सभी रूटों पर नाके लगाकर लकड़ी से भरे वाहनों को रोका।
कई स्थानों पर किसानों की वाहन चालकों के साथ बहस भी हुई। जगाधरी के रक्षक विहार नाके के पास लकड़ी से भरे वाहन के न रुकने पर शीशा तोड़ने की भी घटना हुई। मंडियों में रोजाना की अपेक्षा सोमवार को मात्र पांच प्रतिशत ही लकड़ी से भरे वाहन पहुंचे। इस कारण अधिकतर प्लाइवुड फैक्ट्रियों में लकड़ी नहीं पहुंची। फैक्ट्री मालिकों को इससे करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
भारतीय किसान संघ की ओर से लक्कड़ मंडी में लकड़ी की आवक बंद करने के लिए मंडी में आने वाली हर सड़क पर नाके लगाए गए। उत्तरप्रदेश-हरियाणा की सीमा पर चंडीगढ़-रुड़की नेशनल हाईवे 73 पर कलानौर नाके के पास संघ के जिला प्रधान रामबीर चौहान की अध्यक्षता में किसानों ने लकड़ी से भरी ट्रालियां व अन्य वाहन रोके और उन्हें वापस सहारनपुर की ओर भेज दिया।
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हालांकि इस दौरान कुछ ट्रैक्टर चालकों और लकड़ी मालिकों ने विरोध जताया, लेकिन किसानों के आग्रह पर अधिकतर वाहन चालक मान गए। खजूरी रोड पर राजकुमार व मदन भगत अन्य किसानों ने लकड़ी से भरी ट्रालियां रोकीं। जगाधरी अंबाला रोड पर रक्षक विहार नाका के पास विश्वास शर्मा, पिंटू राणा, नीरज गोस्वामी की अध्यक्षता में नाका लगाया लकड़ी से भरे वाहन रोके गए।
जगाधरी पांवटा साहिब एनएच 73ए पर प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रतन सिंह देवधर की अध्यक्षता में वाहन रोके गए। सहारनपुर-कुरुक्षेत्र स्टेट हाईवे पर जोड़िया नाके पर भारतीय किसान यूनियन (गुणी प्रकाश गुट) के जिलाध्यक्ष सुभाष धौडंग के नेतृत्व में वाहन रोके। बीकेडी रोड पर सुरेश कनालसी की अध्यक्षता में किसान नाकाबंदी कर लकड़ी से भरी ट्रालियां और वाहन रोके गए।
मौके पर बलजीत सिंह, सुखबीर सिंह, विक्रम सिंह, राजेश, कृष्ण, रामबीर सिंह, जान सिंह, मोहन सिंह, राजपाल के साथ यूनियन के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
संघ के प्रधान रामबीर चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। 1200 से 1500 रुपये तक बिकने वाला पॉप्लर का रेट आज मात्र 400 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है।
इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पॉप्लर बेचने पर आढ़तियों द्वारा किसानों को पक्की रसीद नहीं दी जाती। उनकी मांग है कि पॉप्लर का रेट 1200 रुपये प्रति क्विंटल किए जाए।
सभी नाकों पर किसान सुबह पांच बजे से ही डट गए थे। रक्षक विहार नाके पर सुबह अंबाला की ओर से एक लकड़ी से भरा टाटा 407 वाहन आया हुआ दिखाई दिया। किसानों ने उसे रोकना चाहा, लेकिन वह नहीं रुका। गुस्से में किसी ने उसकी साइड के शीशे में पत्थर मार दिया और वह टूट गया।
इसके बाद ट्रक चालक रुका और उसने किसानों से बहस शुरू कर दी। इस बात को लेकर वहां काफी देर तक हंगामा हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों व ट्रक चालक को समझाकर शांत किया।
किसान आंदोलन के लिए पुलिस अधीक्षक के आदेश पर कई पुलिस टीमें बना दी गई थीं। टीमों का नेतृत्व डीएसपी ने किया। सभी नाकों पर पुलिस फोर्स किसानों की देखरेख में रही।
किसान नेताओं ने कहा कि पॉप्लर रेट को लेकर वे काफी दिन से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सही रेट नहीं मिला तो वे जल्द ही मंडी बंद कर देंगे।
जिले में 1157 यूनिट, 312 प्लाइवुड फैक्ट्रियां, 284 पीलिंग मशीनें, 56 चीपर टोका मशीन, 505 आरा मशीन हैं। जिन पर सात सौ से अधिक लक्कड़ आढ़ती सप्लाई देते हैं। इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन चार लाख क्विंटल लकड़ी की खपत होती है। लेकिन सोमवार को लक्कड मंडी में मात्र पांच प्रतिशत ही लकड़ी पहुंची। माना जा रहा है कि लकड़ी की आवक कम होने से करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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कई स्थानों पर किसानों की वाहन चालकों के साथ बहस भी हुई। जगाधरी के रक्षक विहार नाके के पास लकड़ी से भरे वाहन के न रुकने पर शीशा तोड़ने की भी घटना हुई। मंडियों में रोजाना की अपेक्षा सोमवार को मात्र पांच प्रतिशत ही लकड़ी से भरे वाहन पहुंचे। इस कारण अधिकतर प्लाइवुड फैक्ट्रियों में लकड़ी नहीं पहुंची। फैक्ट्री मालिकों को इससे करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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भारतीय किसान संघ की ओर से लक्कड़ मंडी में लकड़ी की आवक बंद करने के लिए मंडी में आने वाली हर सड़क पर नाके लगाए गए। उत्तरप्रदेश-हरियाणा की सीमा पर चंडीगढ़-रुड़की नेशनल हाईवे 73 पर कलानौर नाके के पास संघ के जिला प्रधान रामबीर चौहान की अध्यक्षता में किसानों ने लकड़ी से भरी ट्रालियां व अन्य वाहन रोके और उन्हें वापस सहारनपुर की ओर भेज दिया।
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हालांकि इस दौरान कुछ ट्रैक्टर चालकों और लकड़ी मालिकों ने विरोध जताया, लेकिन किसानों के आग्रह पर अधिकतर वाहन चालक मान गए। खजूरी रोड पर राजकुमार व मदन भगत अन्य किसानों ने लकड़ी से भरी ट्रालियां रोकीं। जगाधरी अंबाला रोड पर रक्षक विहार नाका के पास विश्वास शर्मा, पिंटू राणा, नीरज गोस्वामी की अध्यक्षता में नाका लगाया लकड़ी से भरे वाहन रोके गए।
जगाधरी पांवटा साहिब एनएच 73ए पर प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रतन सिंह देवधर की अध्यक्षता में वाहन रोके गए। सहारनपुर-कुरुक्षेत्र स्टेट हाईवे पर जोड़िया नाके पर भारतीय किसान यूनियन (गुणी प्रकाश गुट) के जिलाध्यक्ष सुभाष धौडंग के नेतृत्व में वाहन रोके। बीकेडी रोड पर सुरेश कनालसी की अध्यक्षता में किसान नाकाबंदी कर लकड़ी से भरी ट्रालियां और वाहन रोके गए।
मौके पर बलजीत सिंह, सुखबीर सिंह, विक्रम सिंह, राजेश, कृष्ण, रामबीर सिंह, जान सिंह, मोहन सिंह, राजपाल के साथ यूनियन के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
संघ के प्रधान रामबीर चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। 1200 से 1500 रुपये तक बिकने वाला पॉप्लर का रेट आज मात्र 400 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है।
इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पॉप्लर बेचने पर आढ़तियों द्वारा किसानों को पक्की रसीद नहीं दी जाती। उनकी मांग है कि पॉप्लर का रेट 1200 रुपये प्रति क्विंटल किए जाए।
सभी नाकों पर किसान सुबह पांच बजे से ही डट गए थे। रक्षक विहार नाके पर सुबह अंबाला की ओर से एक लकड़ी से भरा टाटा 407 वाहन आया हुआ दिखाई दिया। किसानों ने उसे रोकना चाहा, लेकिन वह नहीं रुका। गुस्से में किसी ने उसकी साइड के शीशे में पत्थर मार दिया और वह टूट गया।
इसके बाद ट्रक चालक रुका और उसने किसानों से बहस शुरू कर दी। इस बात को लेकर वहां काफी देर तक हंगामा हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों व ट्रक चालक को समझाकर शांत किया।
किसान आंदोलन के लिए पुलिस अधीक्षक के आदेश पर कई पुलिस टीमें बना दी गई थीं। टीमों का नेतृत्व डीएसपी ने किया। सभी नाकों पर पुलिस फोर्स किसानों की देखरेख में रही।
किसान नेताओं ने कहा कि पॉप्लर रेट को लेकर वे काफी दिन से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सही रेट नहीं मिला तो वे जल्द ही मंडी बंद कर देंगे।
जिले में 1157 यूनिट, 312 प्लाइवुड फैक्ट्रियां, 284 पीलिंग मशीनें, 56 चीपर टोका मशीन, 505 आरा मशीन हैं। जिन पर सात सौ से अधिक लक्कड़ आढ़ती सप्लाई देते हैं। इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन चार लाख क्विंटल लकड़ी की खपत होती है। लेकिन सोमवार को लक्कड मंडी में मात्र पांच प्रतिशत ही लकड़ी पहुंची। माना जा रहा है कि लकड़ी की आवक कम होने से करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।