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पार्थिव देह को अपनों से मिलवाता है ट्रस्ट

Wed, 24 Jul 2019 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2019 12:27 AM IST
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मृतक का शव एंबुलेंस से परिजनों तक पहुंचाने ट्रस्ट के सदस्य व अन्य। (फाइल फोटो) - फोटो : YAMUNA NAGAR
भारतीय संस्कृति में मना जाता है कि जब तक पार्थिव शरीर को परिजन व उत्तराधिकारी मुखाग्नि न दे तो मनुष्य को मोक्ष नहीं मिलता। लेकिन आज के समय में लोग जीवित की सहायता करते हुए कतराते हैं तो मृतक देह को कौन सम्मान दे। परंतु शहर की एक संस्था ऐसी भी है, जो दूर दराज के लोगों की मृत्यु के बाद उनकी मृत देह को परिजनों से मिलवाता ही नहीं है बल्कि शास्त्र व धर्मानुसार उनका अंतिम संस्कार भी करवाता है। जी हां शहर की मानव सेवा समिति ट्रस्ट ऐसी ही ट्रस्ट है। यह ट्रस्ट सालों से मानव सेवा में जुटी है। इस ट्रस्ट की खास बात यह है कि इसकी स्थापना बिहार से यमुनानगर में प्लाइवुड फैक्टरी में काम करने आए कुछ लोगों द्वारा की गई। इस संस्था से जुड़े अधिकांश लोग पूर्वी भारत के रहने वाले हैं और यहां काम करते हैं।
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परिजनों को अंतिम दर्शन करवा करवाते हैं संस्कार : जिला यमुुनानगर औद्योगिक नगरी है। यहां कि सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों में दूसरे राज्यों से आए लाखों लोग काम करते हैं। इस दौरान अधिकांश लोग विभिन्न हादसों में अपनी जान गवां चुके हैं। अधिकांश प्रवासी आर्थिक रूप से इतने कमजोर है कि वे मृत देह उसके पैतृक शहर व गांव तक नहीं ले जा सकते और परिजन इतनी दूर हजारों रुपये खर्च कर यहां नहीं आ सकते। ऐसे में ट्रस्ट यह महत्वपूर्ण कार्य करती है। यह ट्रस्ट मृत्यु के बाद व्यक्ति के घर तक उनकी पार्थिव देह पहुंचाकर संस्कार करवाती है।
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50 हजार खर्च, दो हजार किलोमीटर दूर घर पहुंचाया शव : असम बार्डर के साथ लगते पश्चिमी बंगाल के जिला जलपाईगुड़ी के गांव डोटपाड़ा निवासी 35 वर्षीय मदन बर्मन यमुनानगर के जोड़िया स्थित फैक्टरी में काम करता था। 19 जुलाई देर शाम जोड़िया स्थित गगन ढाबा के पास ट्रक चालक के कुचलने से मदन की मौत हो गई। मदन परिवार में इकलौता कमाने वाला था और पूरा परिवार जलपाईगुड़ी में रहता था। परिजनों के पास इतने रुपये नहीं थे कि वे यहां आ सकते। मां, पत्नी व अन्य मदन के अंतिम दर्शन के लिए उसके साथियों से विलाप करने लगे। सभी साथी मिलकर धन नहीं जुटा पाए। जिसके बाद मानव सेवा समिति ट्रस्ट ने इंस्यूलेटेड एंबुलेंस मुहैया करवाई, ताकि घर पहुंचने तक शव खराब न हो। यमुुनानगर से 2030 किलोमीटर दूर मदन के घर तक शव पहुंचा उसका अंतिम संस्कार करवाया है। मंगलवार शाम को एंबुलेंस चार हजार किलोमीटर का सफर तय कर लौटी। इसमें 49 हजार रुपये का खर्च आया।
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इस तरह बनी मानव सेवा समिति ट्रस्ट : मानव सेवा समिति की स्थापना साल 2013 में मूलत: बिहार के गया जिला के निवासी जय प्रकाश ने की थी। जो हाल में कैंप स्थित जम्मू कॉलोनी में रहता है। जय प्रकाश ने बताया कि नवंबर 1999 में वह बिहार से यहां काम करने आया था और यहीं बस गया। उसने बताया कि दिसंबर 2012 में वह खजूरी स्थित फैक्टरी में काम कर लौट रहा था। इस दौरान उसने फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों को एक शव का संस्कार करते देखा। उनके पास संस्कार के लिए लकड़ी तक के रुपये नहीं थे। जिसपर वे लोग पोपुलर के पेड़ की छाल बटौर के उसका संस्कार करने लगे। यह दृश्य उसे अंदर तक झकझोर दिया। उसने अपनी जेब से 22 सौ रुपये व दोस्तों से लेकर छह हजार रुपये उन्हें संस्कार के लिए दिए। जिसके बाद उसने ऐसी संस्था बनाने का निर्णय लिया।
तीस से शुरू हुए आज आठ हजार लोग हैं जुड़े : जय प्रकाश ने बताया कि साल 2013 में अपने साथियों के साथ मिलकर मानव सेवा समिति बनाई। उस समय समिति में विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले उसके करीब 30 साथी इससे जुड़े थे। जिसके बाद वह मानव सेवा समिति के कार्यों को देखते हुए और भी लोग जुड़ते गए। जिसके बाद चावला प्लाई इंडस्ट्री के संचालक हिमांशु कुमार व ईशान प्लाइवुड फैक्टरी के संचालक प्रदीप गर्ग उनके साथ जुड़े। 19 मार्च 2018 को उन्होंने मानव सेवा समिति को ट्रस्ट बना रजिस्टर्ड करवा लिया। उन्होंने बताया कि आज उनकी संस्था के साथ करीब आठ हजार लोग जुड़े हैं।

यह काम भी करती है ट्रस्ट : ट्रस्ट में अध्यक्ष जयप्रकाश, उपाध्यक्ष प्रमोद भगत, शिव कुमार, विक्रम कुशवाहा, मदन राम, कानूनी सलाहकार एडवोकेट मनोज कुमार, सदस्य दीपक, अखिलेश कुमार, मृदुल, सुरेंद्र पासवान, दुर्गा प्रसाद, चावला प्लाइवुड संचालक हिमांशु, ईशान प्लाइवुड के प्रदीप गर्ग, जितेंद्र कुमार, अरुण कुमार ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से अब तक डेढ़ दर्जन लोगों की मरणोपरांत सहायता की गई है। तीन लोगों का अंतिम संस्कार यमुनानगर में ही करवाया गया है। जबकि 15 लोगों का पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, गोवाहटी, उड़ीसा उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न स्थानों उनके परिजनों तक पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की ओर से जरूरतमंद लड़की की शादी के लिए 25 हजार रुपये कन्यादान राशि, रक्तदान शिविर, जरूरतमंद का इलाज सहित अन्य काम किए गए हैं।
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