{"_id":"608b21668ebc3ea1da334d3f","slug":"family-member-of-corona-effected-protest-after-death-of-his-patient-yamuna-nagar-news-knl686351189","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड अस्पताल में संक्रमित की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोविड अस्पताल में संक्रमित की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा
विज्ञापन
जिले के कोविड अस्पताल में बुधवार को एक कोरोना संक्रमित की मौत हो गई। उसकी मौत से पहले का वीडियो परिजनों ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से मरीज की मौत हो गई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर समय पर वेंटिलेटर नहीं उपलब्ध कराने का भी आरोप लगाया है। परिजनों के अनुसार मरीज ऑक्सीजन पर था, लाइट गुल होने के बाद जनरेटर नहीं चल पाया, जिससे मरीज को ऑक्सीजन नहीं मिल पाई और उसकी हालत तेजी से बिगड़ती गई। मरीज ईएसआई में बनाए गए कोविड-19 अस्पताल में भर्ती था। मरीज की मौत के बाद परिजनों ने सिविल अस्पताल में कुछ देर हंगामा भी किया। वहीं दूसरी तरफ मामले में प्रशासन की लापरवाही उस समय भी सामने आई, जब मौत के 20 घंटे बाद भी शव का संस्कार नहीं करवाया गया।
फर्कपुर क्षेत्र निवासी रविंद्र सिन्हा ने बताया कि उसका 40 वर्षीय भाई नोएडा स्थित कंपनी में काम करता था। उसके भाई की पत्नी और बच्चे उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक घर गए हुए थे जबकि वह अकेला रह रहा था। कुछ दिन पहले भाई ने कॉल कर तबियत खराब होने के बारे में बताया तो वे उसे यमुनानगर ले आए और उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। गुड्ड ने बताया कि इलाज से उसकी भाई की तबियत में सुधार हो रहा था। बुधवार शाम को करीब साढ़े सात बजे उसके भाई की ऑक्सीजन सप्लाई रुकने के बाद से उसे सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी। इस दौरान अस्पताल की लाइट चली गई और जनरेटर शुरू होने में परेशानी होने के कारण ऑक्सीजन सही तरीके से सप्लाई नहीं हो पाई। उन्होंने इस बारे में अस्पताल प्रशासन से बात की तो चिकित्सकों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जांचने भेज दिया। इस बीच उसके भाई ने दम तोड़ दिया। रविंद्र ने बताया कि ये लापरवाही उन्होंने मोबाइल में रिकार्ड कर ली है। परिजनों ने बताया कि उनके भाई को कोरोना था, लेकिन उसकी मौत कोविड-19 से नहीं लापरवाही से हुई है। वहीं प्रशासन की भी यह लापरवाही रही कि शव का अंतिम संस्कार देरी से करवाया गया। मरीज की मौत बुधवार देर शाम हो गई थी। जिसके बाद शव मोर्चरी में रखवा दिया। सुबह साढ़े सात बजे मृतक के परिजन शव गृह पहुंच गए। पोस्टमार्टम हाउस पर देरी होने से परिजन और भड़क गए। वे सीएमओ से मिलने पहुंचे, लेकिन वे मुख्यमंत्री की बैठक के लिए निकल चुके थे। परिजन सिविल अस्पताल में घूमते रहे और कोई सुनवाई नहीं हुई। दोपहर में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
मांगते रहे वेंटिलेटर
-रविंद्र ने बताया कि उसके भाई की तबीयत तेजी से खराब हो रही थी। उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों ने से वेंटिलेटर मांगा। जिस पर कर्मचारियों ने वेंटिलेटर खराब होने और स्टाफ न होने की बात कही। इसके बाद उसके भाई की हालत बिगड़ती चली गई। समय पर आक्सीजन न मिलने से उसके भाई की मौत हो गई। रविंद्र ने कहा कि वे इसकी शिकायत सीएमओ, पीएमओ, स्वास्थ्य मंत्री, सीएम विंडो, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व प्रधानमंत्री से करेंगे।
विज्ञापन
बीमारी के कारण हुई है मौत
-कोविड-19 अस्पताल इंचार्ज एएसएमओ डॉ. अनूप गोयल ने कहा कि आरोप बिल्कुल बेबुनियाद हैं। चिकित्सक सहित अन्य सभी स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज की जान बचाने में जी जान से जुटे हैं। यह मरीज 24 अप्रैल को अस्पताल में आया था। उस समय उसकी हालत बेहद नाजुक थी। इलाज और मेहनत से उसकी हालत को 90 प्रतिशत तक ले आए थे। इस दौरान उसके लंग्स डैमेज हो गए। उसे ऑक्सीजन दी गई। मरीज की हालत फिर से गिरने लगी। इसके बाद उसे मिनी वेंटिलेटर पर रखा गया। तब उसकी हालत 92 प्रतिशत पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक उसकी हालत तेजी से खराब होने लगी। इसके बाद उसे फिर से बाइटाइप पर रखा गया। जब फिर से हालत बिगड़ने लगी तो उसे मेन वेंटिलेटर पर रखा गया। उसे इंटुबेट किया गया। मरीज की हिस्ट्री और उसके परिवार का लिखा हुआ सभी रिकॉर्ड उनके पास है। इस पूरे मामले में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने का तो कहीं सवाल ही नहीं उठता। मरीज की मौत बीमारी की वजह से हुई है। इसमें अस्पताल के चिकित्सकों व स्टाफ सदस्यों की कोई लापरवाही नहीं है।
विज्ञापन
फर्कपुर क्षेत्र निवासी रविंद्र सिन्हा ने बताया कि उसका 40 वर्षीय भाई नोएडा स्थित कंपनी में काम करता था। उसके भाई की पत्नी और बच्चे उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक घर गए हुए थे जबकि वह अकेला रह रहा था। कुछ दिन पहले भाई ने कॉल कर तबियत खराब होने के बारे में बताया तो वे उसे यमुनानगर ले आए और उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। गुड्ड ने बताया कि इलाज से उसकी भाई की तबियत में सुधार हो रहा था। बुधवार शाम को करीब साढ़े सात बजे उसके भाई की ऑक्सीजन सप्लाई रुकने के बाद से उसे सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी। इस दौरान अस्पताल की लाइट चली गई और जनरेटर शुरू होने में परेशानी होने के कारण ऑक्सीजन सही तरीके से सप्लाई नहीं हो पाई। उन्होंने इस बारे में अस्पताल प्रशासन से बात की तो चिकित्सकों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जांचने भेज दिया। इस बीच उसके भाई ने दम तोड़ दिया। रविंद्र ने बताया कि ये लापरवाही उन्होंने मोबाइल में रिकार्ड कर ली है। परिजनों ने बताया कि उनके भाई को कोरोना था, लेकिन उसकी मौत कोविड-19 से नहीं लापरवाही से हुई है। वहीं प्रशासन की भी यह लापरवाही रही कि शव का अंतिम संस्कार देरी से करवाया गया। मरीज की मौत बुधवार देर शाम हो गई थी। जिसके बाद शव मोर्चरी में रखवा दिया। सुबह साढ़े सात बजे मृतक के परिजन शव गृह पहुंच गए। पोस्टमार्टम हाउस पर देरी होने से परिजन और भड़क गए। वे सीएमओ से मिलने पहुंचे, लेकिन वे मुख्यमंत्री की बैठक के लिए निकल चुके थे। परिजन सिविल अस्पताल में घूमते रहे और कोई सुनवाई नहीं हुई। दोपहर में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
मांगते रहे वेंटिलेटर
-रविंद्र ने बताया कि उसके भाई की तबीयत तेजी से खराब हो रही थी। उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों ने से वेंटिलेटर मांगा। जिस पर कर्मचारियों ने वेंटिलेटर खराब होने और स्टाफ न होने की बात कही। इसके बाद उसके भाई की हालत बिगड़ती चली गई। समय पर आक्सीजन न मिलने से उसके भाई की मौत हो गई। रविंद्र ने कहा कि वे इसकी शिकायत सीएमओ, पीएमओ, स्वास्थ्य मंत्री, सीएम विंडो, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व प्रधानमंत्री से करेंगे।
विज्ञापन
बीमारी के कारण हुई है मौत
-कोविड-19 अस्पताल इंचार्ज एएसएमओ डॉ. अनूप गोयल ने कहा कि आरोप बिल्कुल बेबुनियाद हैं। चिकित्सक सहित अन्य सभी स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज की जान बचाने में जी जान से जुटे हैं। यह मरीज 24 अप्रैल को अस्पताल में आया था। उस समय उसकी हालत बेहद नाजुक थी। इलाज और मेहनत से उसकी हालत को 90 प्रतिशत तक ले आए थे। इस दौरान उसके लंग्स डैमेज हो गए। उसे ऑक्सीजन दी गई। मरीज की हालत फिर से गिरने लगी। इसके बाद उसे मिनी वेंटिलेटर पर रखा गया। तब उसकी हालत 92 प्रतिशत पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक उसकी हालत तेजी से खराब होने लगी। इसके बाद उसे फिर से बाइटाइप पर रखा गया। जब फिर से हालत बिगड़ने लगी तो उसे मेन वेंटिलेटर पर रखा गया। उसे इंटुबेट किया गया। मरीज की हिस्ट्री और उसके परिवार का लिखा हुआ सभी रिकॉर्ड उनके पास है। इस पूरे मामले में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने का तो कहीं सवाल ही नहीं उठता। मरीज की मौत बीमारी की वजह से हुई है। इसमें अस्पताल के चिकित्सकों व स्टाफ सदस्यों की कोई लापरवाही नहीं है।