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जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है विश्वास : सिद्धेश्वरी
Mon, 19 May 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 19 May 2025 01:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार सुबह साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी सिद्धेश्वरी भारती ने कहा कि विश्वास मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। जब किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा भाव के प्रति पूर्ण विश्वास जागृत होता है तब सूक्ष्म रूप से हमारी एकाग्रता उस व्यक्ति, वस्तु या भाव से जुड़ जाती है।
साध्वी कहा कि विश्वास एक कांच के उत्तल लैंस की तरह कार्य करता है जो सूर्य की बिखरी हुई किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करके अग्नि प्रकट कर देता है। इसी प्रकार जब विश्वास गहरा और दृढ़ हो जाता है तब वह भी मनुष्य के भीतर एक ऐसी अग्नि प्रकट करता है जिसमें उसके सभी संशय और दुर्भावनाएं जलकर भस्म हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि ध्यान रहे, उस विश्वास का आधार नकारात्मक न हो, क्योंकि जहां सकारात्मकता आधारित विश्वास हमारे जीवन का सर्वांगीण उत्थान एवं विकास करता है वहीं असत्य एवं नकारात्मकता आधारित विश्वास हमारे जीवन को पतन की गहराइयों में गिरा सकता है। जीत सदैव विश्वास की होती है, क्योंकि विश्वास वह भावना है जब व्यक्ति का रोम-रोम किसी व्यक्ति, वस्तु या भाव को लेकर दृढ़ निश्चयी हो जाता है और उसके भीतर कोई किंतु परंतु शेष नहीं रहता।
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साध्वी ने एक ब्रह्मज्ञानी साधक, जो निरंतर ध्यान साधना करते हुए उस अनंत एवं असीम सत्ता परमात्मा के श्री चरणों में ध्यान लगाता है तब वह भक्ति मार्ग पर चलते हुए गुरु कृपा एवं स्वयं अपने पुरुषार्थ के द्वारा बुद्धि को विचार रहित, मन को विकार रहित और आत्मा को कर्म संस्कार रहित कर लेता है। ऐसा तभी घटित होता है जब उसका विश्वास और संकल्प चट्टान की तरह दृढ़ हो। यदि एक साधक के विश्वास में कमी दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि अभी उसे अपने मन, बुद्धि और चित्त पर निरंतर कार्य करना है।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार सुबह साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी सिद्धेश्वरी भारती ने कहा कि विश्वास मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। जब किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा भाव के प्रति पूर्ण विश्वास जागृत होता है तब सूक्ष्म रूप से हमारी एकाग्रता उस व्यक्ति, वस्तु या भाव से जुड़ जाती है।
साध्वी कहा कि विश्वास एक कांच के उत्तल लैंस की तरह कार्य करता है जो सूर्य की बिखरी हुई किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करके अग्नि प्रकट कर देता है। इसी प्रकार जब विश्वास गहरा और दृढ़ हो जाता है तब वह भी मनुष्य के भीतर एक ऐसी अग्नि प्रकट करता है जिसमें उसके सभी संशय और दुर्भावनाएं जलकर भस्म हो जाती हैं।
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उन्होंने कहा कि ध्यान रहे, उस विश्वास का आधार नकारात्मक न हो, क्योंकि जहां सकारात्मकता आधारित विश्वास हमारे जीवन का सर्वांगीण उत्थान एवं विकास करता है वहीं असत्य एवं नकारात्मकता आधारित विश्वास हमारे जीवन को पतन की गहराइयों में गिरा सकता है। जीत सदैव विश्वास की होती है, क्योंकि विश्वास वह भावना है जब व्यक्ति का रोम-रोम किसी व्यक्ति, वस्तु या भाव को लेकर दृढ़ निश्चयी हो जाता है और उसके भीतर कोई किंतु परंतु शेष नहीं रहता।
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साध्वी ने एक ब्रह्मज्ञानी साधक, जो निरंतर ध्यान साधना करते हुए उस अनंत एवं असीम सत्ता परमात्मा के श्री चरणों में ध्यान लगाता है तब वह भक्ति मार्ग पर चलते हुए गुरु कृपा एवं स्वयं अपने पुरुषार्थ के द्वारा बुद्धि को विचार रहित, मन को विकार रहित और आत्मा को कर्म संस्कार रहित कर लेता है। ऐसा तभी घटित होता है जब उसका विश्वास और संकल्प चट्टान की तरह दृढ़ हो। यदि एक साधक के विश्वास में कमी दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि अभी उसे अपने मन, बुद्धि और चित्त पर निरंतर कार्य करना है।