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बीज, खाद और कृषि सामग्री महंगी होने पर जताया रोष
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। खाद, बीज व कृषि सहायक वस्तुओं के दामों में भारी वृद्धि को लेकर किसानों में भारी रोष है। इसे लेकर रविवार को मिल्क माजरा टोल प्लाजा पर संयुक्त किसान मोर्चा की जिलास्तरीय बैठक हुई। अध्यक्षता संजू गुंदियाना ने की। बैठक में इसके विरोध में 20 मई को टोल प्लाजा पर सभा कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही किसान मोर्चा की ओर से मुख्यमंत्री के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। बैठक में नेता जरनैल सिंह सांगवान, धर्मपाल सिंह चौहान, गुरभजन सिंह मझैल, प्यारे लाल तंवर, गुरवीर सिंह, कृष्णपाल, सुभाष गुर्जर ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा स्वयं को किसान हितैषी सरकार बता रही है, जबकि हकीकत यह कि किसान को उसकी मेहनत का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। दाना-दाना खरीदने का दावा करने वाली सरकार के राज में किसानों की फसल ही नहीं बिक पाई है। किसान अपनी फसल को लेकर चिंतित हैं और उसके सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
नेताओं ने कहा कि हिसार में किसानों पर पुलिस लाठी चार्ज की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री तुरंत प्रभाव से तीनों कृषि कानून वापस लें। एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद का गारंटी कानून बनाया जाए। शाहबाद में किसान नेताओं पर दर्ज केस वापस लिए जाएं। किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा विधायक व मंत्री बेकाबू कोरोना महामारी के लिए किसान आंदोलन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि भाजपा नेताओं व मंत्रियों को जनता के सामने आकर स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने समय रहते कोई काम नहीं किया।
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संक्रमण रोकने के बजाए रैलियां करके इसे फैलाया है। सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए किसान आंदोलन को बदनाम जिम्मेदार न ठहराए। भाकियू जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि इसके विरोध में 26 मई को किसान काला दिवस मनाएंगे। नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा के मंत्री, विधायक व नेता अपनी नाकामी किसान आंदोलन पर थोपना बंद करें।
कृषि यंत्रों की दुकानें खोली जाएं
इस दौरान भाकियू चढूनी गुट के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने कहा कि एक बार फिर सरकार ने बिना किसी चर्चा और समझ के लॉकडाउन लगा दिया है, जिससे लाखों लोगों पर रोजी रोटी का संकट गहराने लगा है। वहीं इससे किसानों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानें न खुलने के कारण किसान कृषि यंत्र सहित अन्य मशीनों के उपकरण तक नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में सरकार को कृषि यंत्रों सहित कृषि सहायक सामग्री विक्रेताओं को दुकानें खोलने की अनुमति देनी चाहिए।
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जगाधरी। खाद, बीज व कृषि सहायक वस्तुओं के दामों में भारी वृद्धि को लेकर किसानों में भारी रोष है। इसे लेकर रविवार को मिल्क माजरा टोल प्लाजा पर संयुक्त किसान मोर्चा की जिलास्तरीय बैठक हुई। अध्यक्षता संजू गुंदियाना ने की। बैठक में इसके विरोध में 20 मई को टोल प्लाजा पर सभा कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही किसान मोर्चा की ओर से मुख्यमंत्री के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। बैठक में नेता जरनैल सिंह सांगवान, धर्मपाल सिंह चौहान, गुरभजन सिंह मझैल, प्यारे लाल तंवर, गुरवीर सिंह, कृष्णपाल, सुभाष गुर्जर ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा स्वयं को किसान हितैषी सरकार बता रही है, जबकि हकीकत यह कि किसान को उसकी मेहनत का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। दाना-दाना खरीदने का दावा करने वाली सरकार के राज में किसानों की फसल ही नहीं बिक पाई है। किसान अपनी फसल को लेकर चिंतित हैं और उसके सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
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नेताओं ने कहा कि हिसार में किसानों पर पुलिस लाठी चार्ज की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री तुरंत प्रभाव से तीनों कृषि कानून वापस लें। एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद का गारंटी कानून बनाया जाए। शाहबाद में किसान नेताओं पर दर्ज केस वापस लिए जाएं। किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा विधायक व मंत्री बेकाबू कोरोना महामारी के लिए किसान आंदोलन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि भाजपा नेताओं व मंत्रियों को जनता के सामने आकर स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने समय रहते कोई काम नहीं किया।
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संक्रमण रोकने के बजाए रैलियां करके इसे फैलाया है। सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए किसान आंदोलन को बदनाम जिम्मेदार न ठहराए। भाकियू जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि इसके विरोध में 26 मई को किसान काला दिवस मनाएंगे। नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा के मंत्री, विधायक व नेता अपनी नाकामी किसान आंदोलन पर थोपना बंद करें।
कृषि यंत्रों की दुकानें खोली जाएं
इस दौरान भाकियू चढूनी गुट के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने कहा कि एक बार फिर सरकार ने बिना किसी चर्चा और समझ के लॉकडाउन लगा दिया है, जिससे लाखों लोगों पर रोजी रोटी का संकट गहराने लगा है। वहीं इससे किसानों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानें न खुलने के कारण किसान कृषि यंत्र सहित अन्य मशीनों के उपकरण तक नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में सरकार को कृषि यंत्रों सहित कृषि सहायक सामग्री विक्रेताओं को दुकानें खोलने की अनुमति देनी चाहिए।