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Yamuna Nagar News: आध्यात्मिक जीवन का बताया महत्व
Mon, 15 Jun 2026 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 15 Jun 2026 12:26 AM IST
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साप्ताहिक सत्संग के दौरान प्रवचन सुनने पहुंचे श्रद्धालु। संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम व्यासपुर में साप्ताहिक सत्संग एवं भजन संकीर्तन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साध्वी मीना भारती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देकर महत्व बताया।
साध्वी ने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के जीवन में अनेक ऐसे अवसर आते हैं, जब वह स्वयं को दोराहे पर खड़ा पाता है। ऐसे समय में आत्मबल और विवेकपूर्ण बुद्धि ही उसे सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है। यदि मनुष्य अपने कर्म संस्कारों और मोह-माया के प्रभाव में आकर निर्णय लेता है तो उसे जीवन भर उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को हीरे की पहचान नहीं होती, उसे चमकते हुए कांच से भी भ्रमित किया जा सकता है। इसी प्रकार जब तक मनुष्य मनमुख रहता है, तब तक संसार की नश्वरता का बोध नहीं हो पाता और वह क्षणिक सुखों में ही उलझा रहता है।
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उन्होंने कहा कि गुरु कृपा मिलने पर व्यक्ति बुरे कर्म संस्कारों से बंधा होने के बावजूद सही समय पर श्रेय मार्ग का चुनाव कर सकता है। साध्वी ने कहा कि श्रेय मार्ग आत्मकल्याण और जीवन मुक्ति का मार्ग है, जबकि प्रेय मार्ग केवल भौतिक सुखों और सांसारिक आकर्षणों तक सीमित रहता है। जो व्यक्ति श्रेय मार्ग को अपनाता है, उसे जीवन में मिलने वाली उपलब्धियों के प्रति आसक्ति नहीं रहतीा है। उन्होंने कहा कि ब्रह्म ज्ञान का मार्ग ही मनुष्य को सही समय पर सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। सभी को अध्यात्म का मार्ग अपनाना चाहिए।
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व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम व्यासपुर में साप्ताहिक सत्संग एवं भजन संकीर्तन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साध्वी मीना भारती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देकर महत्व बताया।
साध्वी ने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के जीवन में अनेक ऐसे अवसर आते हैं, जब वह स्वयं को दोराहे पर खड़ा पाता है। ऐसे समय में आत्मबल और विवेकपूर्ण बुद्धि ही उसे सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है। यदि मनुष्य अपने कर्म संस्कारों और मोह-माया के प्रभाव में आकर निर्णय लेता है तो उसे जीवन भर उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
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उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को हीरे की पहचान नहीं होती, उसे चमकते हुए कांच से भी भ्रमित किया जा सकता है। इसी प्रकार जब तक मनुष्य मनमुख रहता है, तब तक संसार की नश्वरता का बोध नहीं हो पाता और वह क्षणिक सुखों में ही उलझा रहता है।
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उन्होंने कहा कि गुरु कृपा मिलने पर व्यक्ति बुरे कर्म संस्कारों से बंधा होने के बावजूद सही समय पर श्रेय मार्ग का चुनाव कर सकता है। साध्वी ने कहा कि श्रेय मार्ग आत्मकल्याण और जीवन मुक्ति का मार्ग है, जबकि प्रेय मार्ग केवल भौतिक सुखों और सांसारिक आकर्षणों तक सीमित रहता है। जो व्यक्ति श्रेय मार्ग को अपनाता है, उसे जीवन में मिलने वाली उपलब्धियों के प्रति आसक्ति नहीं रहतीा है। उन्होंने कहा कि ब्रह्म ज्ञान का मार्ग ही मनुष्य को सही समय पर सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। सभी को अध्यात्म का मार्ग अपनाना चाहिए।