{"_id":"670da65c8459a3798a07aff4","slug":"every-day-we-fight-to-go-to-school-and-college-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-126884-2024-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: स्कूल-कॉलेज जाने के लिए लड़ते हर दिन जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: स्कूल-कॉलेज जाने के लिए लड़ते हर दिन जंग
Tue, 15 Oct 2024 04:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 15 Oct 2024 04:46 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्कूल-कॉलेज जाने के लिए विद्यार्थी जान जोखिम में डाल कर रोडवेज बस के पायदान पर लटक कर सफर कर रहे हैं। कार्यालयों में बैठे अधिकारी भी इसके काफी हद तक जिम्मेदार हैं जो इस प्रकार के हालात को जानने के लिए रोड पर नहीं आते। हालांकि अधिकारी बेड़े में बसों का टोटा होने का ठीकरा फोड़ते है।
जिले के कई गांवों के युवाओं को स्कूल-कॉलेज जाने के लिए हर दिन यह जंग लड़नी पड़ती है। युवा बस की खिड़कियों व दरवाजों यहां तक बस के पीछे लटक कर जान जोखिम में डाल कर सफर करने पर विवश हैं। जान हथेली पर लिए युवाओं की ढोलती जिंदगी के हालात रोजाना बने हैं। हैरत है सड़कों पर खड़े पुलिस की ईआरवी, थाना प्रभारियों को तो शायद यह सब दिखाई देता है।
इसके बावजूद आज तक इस पर कार्रवाई तक नहीं हो पाई होगी। हालांकि चौक चौराहों पर खड़े पुलिस कर्मी सिर्फ चालन करने में व्यस्त रहते हैं, उन्हें सिर्फ वाहनों के चालान काटना आता है, जबकि छात्रों से भरी बसें चौराहों से होकर गुजरती हैं फिर भी प्रशासन लापरवाह होकर उज्जवल भविष्य की और बढ़ने वाले छात्रों के साथ लापरवाही कर रहा है।
विज्ञापन
देहात क्षेत्रों में छह बसें लगाई गई हैं और एक अलग से बस को भी लगाया गया है, जिससे स्कूल, कॉलेजों में आने वाले विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, फिर भी यदि ऐसा है तो अन्य बसों का प्रावधान किया जाएगा। - संजय रावल, महाप्रबंधक, रोडवेज यमुनानगर।
विज्ञापन
यमुनानगर। स्कूल-कॉलेज जाने के लिए विद्यार्थी जान जोखिम में डाल कर रोडवेज बस के पायदान पर लटक कर सफर कर रहे हैं। कार्यालयों में बैठे अधिकारी भी इसके काफी हद तक जिम्मेदार हैं जो इस प्रकार के हालात को जानने के लिए रोड पर नहीं आते। हालांकि अधिकारी बेड़े में बसों का टोटा होने का ठीकरा फोड़ते है।
जिले के कई गांवों के युवाओं को स्कूल-कॉलेज जाने के लिए हर दिन यह जंग लड़नी पड़ती है। युवा बस की खिड़कियों व दरवाजों यहां तक बस के पीछे लटक कर जान जोखिम में डाल कर सफर करने पर विवश हैं। जान हथेली पर लिए युवाओं की ढोलती जिंदगी के हालात रोजाना बने हैं। हैरत है सड़कों पर खड़े पुलिस की ईआरवी, थाना प्रभारियों को तो शायद यह सब दिखाई देता है।
विज्ञापन
इसके बावजूद आज तक इस पर कार्रवाई तक नहीं हो पाई होगी। हालांकि चौक चौराहों पर खड़े पुलिस कर्मी सिर्फ चालन करने में व्यस्त रहते हैं, उन्हें सिर्फ वाहनों के चालान काटना आता है, जबकि छात्रों से भरी बसें चौराहों से होकर गुजरती हैं फिर भी प्रशासन लापरवाह होकर उज्जवल भविष्य की और बढ़ने वाले छात्रों के साथ लापरवाही कर रहा है।
विज्ञापन
देहात क्षेत्रों में छह बसें लगाई गई हैं और एक अलग से बस को भी लगाया गया है, जिससे स्कूल, कॉलेजों में आने वाले विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, फिर भी यदि ऐसा है तो अन्य बसों का प्रावधान किया जाएगा। - संजय रावल, महाप्रबंधक, रोडवेज यमुनानगर।