{"_id":"65888405af8888dacd08e4e6","slug":"even-after-spending-crores-groundwater-of-251-villages-remains-a-challenge-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-11181-2023-12-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: करोड़ों खर्च के बाद भी 251 गांवों का भूजल बना चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: करोड़ों खर्च के बाद भी 251 गांवों का भूजल बना चुनौती
विज्ञापन
सुरेश सैनी
यमुनानगर। जिले के खंड रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर तथा साढौरा के 251 गांवों के भूजल लेवल को कंट्रोल करना चुनौती बन गया है। यही नहीं साल 2023-2024 के दौरान अटल भूजल योजना के तहत कंवरजेंस के माध्यम से लगभग 21 करोड़ रुपये भूजल लेवल सुधार के लिए खर्च किये जा चुके, किंतु फिर भी धरती की कोख प्यासी है। मतलब पानी की तरह इतना पैसा बहाने के बाद भी इन खंड़ों में भूजल लेवल नीचे खिसक रहा है, जबकि सिंचाई विभाग की अटल भूजल शाखा द्वारा भूजल लेवल में सुधार के लिए अभी तक तमाम प्रयास किए जा चुके हैं।
100 से अधिक पंचायतों के साथ हुई बैठकें
वहीं अब नवंबर-दिसंबर माह में भूजल सुधार के लिए 100 से अधिक पंचायतों में जागरूक बैठकें कराई जा चुकी हैं। बकायदा अटल भूजल पंचायतों का एक-एक व्हटसअप ग्रुप भी बनाया गया है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन की गतिविधियों बारे किसानों को जागरूक किया जा चुका है। इसके फलस्वरूप 415 एकड़ पर किसानों द्वारा टपका एवं फव्वारा विधि को अपनाने के लिए पारित किया जा चुका है, जिसमें से 70 एकड़ पर टपका एवं फव्वारा विधि से कार्य आरंभ हो चुका है, इसके अतिरिक्त तीन हजार एकड़ से अधिक किसानों द्वारा अंडर ग्राउंड पाइपलाइन के आवेदन भी ऑनलाइन कराए गए हैं।
इतना बांटा जा चुका बाजरा
ब्लॉक जगाधरी, रादौर, सरस्वती नगर और साढौरा डार्क जोन घोषित हैं। यहां पानी का स्तर नीचे जाने की बड़ी वजह धान की खेती है। भूजल स्तर में गिरावट को रोकने के उद्देश्य से ही सिंचाई विभाग अटल भूजल योजना के तहत मुफ्त में किसानों को बाजरे का बायो 448 बीज अभी तक 295 किसानों को 492 एकड़ के लिए 738 किलोग्राम बाजरा बांट चुका है।
विज्ञापन
110 लगाए जा चुके पीजीमोटर
इतना ही नहीं विभाग की तरफ से इन ब्लॉकों के गांवों में 110 पीजो मीटर भी लगाए जा चुके हैं। दरअसल, पीजो मीटर एक भू-तकनीकी सेंसर है, जिसका उपयोग जमीन में छिद्र जल दबाव (पीजोमेट्रिक स्तर) को मापने के लिए किया जाता है। यह मिट्टी, चट्टान भराव, नींव और कंक्रीट संरचनाओं में छिद्र जल दबाव को मापने के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार साल 2002 में 40 फीट, 2022 में 87, 2047 में 146 और 2100 में 271 फीट (भूजल गहराई की स्थिति) चौवा की स्थिति बन सकती है।
यह योजना एक व्यापक पहल है जो गांव को सुरक्षित और सतत जल सप्लाई की सुनिश्चित करने का उद्देश्य रखती है। इसके तहत, दिन-रात भूजल का दोहन किया जा रहा है, जिससे धरती के अंदर का जलस्तर बनाए रखा जा सकेगा। यह संकल्प नहीं सिर्फ जल संचयन को बढ़ावा देगा, बल्कि इससे आने वाले समय में जल संकट का कारण बनने से भी बचा जा सकेगा। इसके अलावा साल 2023-2024 के दौरान अटल भूजल योजना के तहत कंवरजेंस के माध्यम से लगभग 21 करोड़ रुपये भूजल लेवल सुधार के लिए खर्च किये जा चुके हैं।
-भूपेंद्र सिंह, आईईसी विशेषज्ञ अटल भूजल योजना, सिंचाई विभाग।
विज्ञापन
यमुनानगर। जिले के खंड रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर तथा साढौरा के 251 गांवों के भूजल लेवल को कंट्रोल करना चुनौती बन गया है। यही नहीं साल 2023-2024 के दौरान अटल भूजल योजना के तहत कंवरजेंस के माध्यम से लगभग 21 करोड़ रुपये भूजल लेवल सुधार के लिए खर्च किये जा चुके, किंतु फिर भी धरती की कोख प्यासी है। मतलब पानी की तरह इतना पैसा बहाने के बाद भी इन खंड़ों में भूजल लेवल नीचे खिसक रहा है, जबकि सिंचाई विभाग की अटल भूजल शाखा द्वारा भूजल लेवल में सुधार के लिए अभी तक तमाम प्रयास किए जा चुके हैं।
100 से अधिक पंचायतों के साथ हुई बैठकें
वहीं अब नवंबर-दिसंबर माह में भूजल सुधार के लिए 100 से अधिक पंचायतों में जागरूक बैठकें कराई जा चुकी हैं। बकायदा अटल भूजल पंचायतों का एक-एक व्हटसअप ग्रुप भी बनाया गया है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन की गतिविधियों बारे किसानों को जागरूक किया जा चुका है। इसके फलस्वरूप 415 एकड़ पर किसानों द्वारा टपका एवं फव्वारा विधि को अपनाने के लिए पारित किया जा चुका है, जिसमें से 70 एकड़ पर टपका एवं फव्वारा विधि से कार्य आरंभ हो चुका है, इसके अतिरिक्त तीन हजार एकड़ से अधिक किसानों द्वारा अंडर ग्राउंड पाइपलाइन के आवेदन भी ऑनलाइन कराए गए हैं।
विज्ञापन
इतना बांटा जा चुका बाजरा
ब्लॉक जगाधरी, रादौर, सरस्वती नगर और साढौरा डार्क जोन घोषित हैं। यहां पानी का स्तर नीचे जाने की बड़ी वजह धान की खेती है। भूजल स्तर में गिरावट को रोकने के उद्देश्य से ही सिंचाई विभाग अटल भूजल योजना के तहत मुफ्त में किसानों को बाजरे का बायो 448 बीज अभी तक 295 किसानों को 492 एकड़ के लिए 738 किलोग्राम बाजरा बांट चुका है।
विज्ञापन
110 लगाए जा चुके पीजीमोटर
इतना ही नहीं विभाग की तरफ से इन ब्लॉकों के गांवों में 110 पीजो मीटर भी लगाए जा चुके हैं। दरअसल, पीजो मीटर एक भू-तकनीकी सेंसर है, जिसका उपयोग जमीन में छिद्र जल दबाव (पीजोमेट्रिक स्तर) को मापने के लिए किया जाता है। यह मिट्टी, चट्टान भराव, नींव और कंक्रीट संरचनाओं में छिद्र जल दबाव को मापने के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार साल 2002 में 40 फीट, 2022 में 87, 2047 में 146 और 2100 में 271 फीट (भूजल गहराई की स्थिति) चौवा की स्थिति बन सकती है।
यह योजना एक व्यापक पहल है जो गांव को सुरक्षित और सतत जल सप्लाई की सुनिश्चित करने का उद्देश्य रखती है। इसके तहत, दिन-रात भूजल का दोहन किया जा रहा है, जिससे धरती के अंदर का जलस्तर बनाए रखा जा सकेगा। यह संकल्प नहीं सिर्फ जल संचयन को बढ़ावा देगा, बल्कि इससे आने वाले समय में जल संकट का कारण बनने से भी बचा जा सकेगा। इसके अलावा साल 2023-2024 के दौरान अटल भूजल योजना के तहत कंवरजेंस के माध्यम से लगभग 21 करोड़ रुपये भूजल लेवल सुधार के लिए खर्च किये जा चुके हैं।
-भूपेंद्र सिंह, आईईसी विशेषज्ञ अटल भूजल योजना, सिंचाई विभाग।