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Yamuna Nagar News: पथराला में उफान से 15 एकड़ जमीन में कटाव
Sat, 30 Aug 2025 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 30 Aug 2025 01:09 AM IST
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पथराला नदी के तेज बहाव से हो रहा भूमि में कटाव। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। पहाड़ी इलाकों में जोरदार बारिश से मैदानी इलाकों में तबाही मच गई। सोम नदी के बाद पथराला नदी ने विकराल रूप से जैतपुर गांव में वन विभाग की 15 एकड़ जमीन में भूमि कटाव हो गया है। वहीं खैर के पेड़ पानी के तेज बहाव में बहते हुए नजर आए। किसानों की भी कई एकड़ जमीन में बड़े स्तर पर कटाव हुआ है।
शुक्रवार सुबह सोम नदी उफान पर थी। सोम नदी जैसे ही कुछ शांत हुई तो पथराला (बोली) नदी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया। पहाड़ी इलाकों से उतर कर घाड़ क्षेत्र में बोली नदी ने वन विभाग के दर्जनों एकड़ भूमि में कटाव कर दिया, जिससे खैर के बेशकीमती पेड़ भी तेज बहाव में बहकर आगे चले गए।
प्रभावित किसान इमरान ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज है कि किसानों की जमीन भी नदी का रूप ले चुकी है। वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि पानी के तेज बहाव में वन विभाग के करीब 10 एकड़ जमीन पूरी तरह से तबाह हो गई है। जंगल में खड़े खैर और सफेदे के पेड़ भी पानी के तेज बहाव में बह गए। किसानों की कई एकड़ फसल भी बोली नदी निगल गई है, जिसमें किसानों की धान और मक्की की फसल भी बह गई।
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छछरौली। पहाड़ी इलाकों में जोरदार बारिश से मैदानी इलाकों में तबाही मच गई। सोम नदी के बाद पथराला नदी ने विकराल रूप से जैतपुर गांव में वन विभाग की 15 एकड़ जमीन में भूमि कटाव हो गया है। वहीं खैर के पेड़ पानी के तेज बहाव में बहते हुए नजर आए। किसानों की भी कई एकड़ जमीन में बड़े स्तर पर कटाव हुआ है।
शुक्रवार सुबह सोम नदी उफान पर थी। सोम नदी जैसे ही कुछ शांत हुई तो पथराला (बोली) नदी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया। पहाड़ी इलाकों से उतर कर घाड़ क्षेत्र में बोली नदी ने वन विभाग के दर्जनों एकड़ भूमि में कटाव कर दिया, जिससे खैर के बेशकीमती पेड़ भी तेज बहाव में बहकर आगे चले गए।
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प्रभावित किसान इमरान ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज है कि किसानों की जमीन भी नदी का रूप ले चुकी है। वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि पानी के तेज बहाव में वन विभाग के करीब 10 एकड़ जमीन पूरी तरह से तबाह हो गई है। जंगल में खड़े खैर और सफेदे के पेड़ भी पानी के तेज बहाव में बह गए। किसानों की कई एकड़ फसल भी बोली नदी निगल गई है, जिसमें किसानों की धान और मक्की की फसल भी बह गई।
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