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Yamuna Nagar News: नाले साफ करने की तैयारी पर नहीं हटा पाए कब्जे
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नगर निगम अफसर टेंडर के जरिए नालों की सफाई का काम लगाने की तैयारी में हैं, पर हर साल सफाई में अड़चन बनने वाले नालों पर किए कब्जे नहीं हटा पाए हैं। यह मुद्दा वार्डों के पार्षद सदन की हर बैठक में उठा चुके हैं, बावजूद इसके नालों से कब्जे हटाने की कार्रवाई सर्वे व नोटिस देने सहित जांच कमेटियां गठित करने तक सिमटी गई। यही लापरवाही मानसून में जलभराव के रूप में शहर पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि कब्जों के चलते नालों की सही सफाई नहीं हो पाती है।
बता दें कि इस बार निगम अफसरों ने चार मई को शहर के 11-11 वार्ड के दो जोन बांट कुल 104 नालों की सफाई के लिए 1.42 करोड़ एस्टीमेट पर टेंडर किए गए। इसमें जोन-1 में 1 से 11 वार्ड में 61 नाले हैं और उनकी सफाई के खर्च का अनुमान 65.87 लाख रुपये है। ऐसे ही जोन-2 में 12 से 22 वार्ड में 43 नालों की सफाई का खर्च 76.75 लाख अनुमानित है।
वार्ड-8 से पार्षद विनोद मरवाह, वार्ड-13 से पार्षद निर्मल चौहान का आरोप है कि शहर के नालों पर सैकड़ों जगह कब्जे हैं। निगम अफसरों ने भी गत वर्ष अपनी तैयार रिपोर्ट में नौ जगह कब्जे माने थे, जिनमें फैक्ट्ररी, मकान व दुकान भी नाले पर मिले थे। लेकिन यह कब्जे हटाने के बजाए सर्वे करने, नोटिस देने और जांच कमेटियां बनाने तक ही कार्रवाई सिमट कर रह गई। निगम या ठेकेदार के कर्मचारी अवैध रूप से नालों पर रखे स्लैब व पक्के निर्माण के नीचे सफाई नहीं कर पाते हैं। इस तरह इन कब्जों वाले स्थानों पर नालों में काई व गंदगी जमा रहती है। कई जगह तो ईंट-मलबा गिरा मिलता है। खासकर बरसाती सीजन में अधिक पानी आने पर नालों की निकासी में बाधा बनती है और नाले ओवरफ्लो होकर साथ लगती गलियों-सड़कों में जलभराव करते हैं।
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मानसून से पहले नालों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए अफसरों को निर्देश दे चुके हैं। साथ ही नालों पर किए कब्जों पर भी कार्रवाई होगी।
-आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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बता दें कि इस बार निगम अफसरों ने चार मई को शहर के 11-11 वार्ड के दो जोन बांट कुल 104 नालों की सफाई के लिए 1.42 करोड़ एस्टीमेट पर टेंडर किए गए। इसमें जोन-1 में 1 से 11 वार्ड में 61 नाले हैं और उनकी सफाई के खर्च का अनुमान 65.87 लाख रुपये है। ऐसे ही जोन-2 में 12 से 22 वार्ड में 43 नालों की सफाई का खर्च 76.75 लाख अनुमानित है।
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वार्ड-8 से पार्षद विनोद मरवाह, वार्ड-13 से पार्षद निर्मल चौहान का आरोप है कि शहर के नालों पर सैकड़ों जगह कब्जे हैं। निगम अफसरों ने भी गत वर्ष अपनी तैयार रिपोर्ट में नौ जगह कब्जे माने थे, जिनमें फैक्ट्ररी, मकान व दुकान भी नाले पर मिले थे। लेकिन यह कब्जे हटाने के बजाए सर्वे करने, नोटिस देने और जांच कमेटियां बनाने तक ही कार्रवाई सिमट कर रह गई। निगम या ठेकेदार के कर्मचारी अवैध रूप से नालों पर रखे स्लैब व पक्के निर्माण के नीचे सफाई नहीं कर पाते हैं। इस तरह इन कब्जों वाले स्थानों पर नालों में काई व गंदगी जमा रहती है। कई जगह तो ईंट-मलबा गिरा मिलता है। खासकर बरसाती सीजन में अधिक पानी आने पर नालों की निकासी में बाधा बनती है और नाले ओवरफ्लो होकर साथ लगती गलियों-सड़कों में जलभराव करते हैं।
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मानसून से पहले नालों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए अफसरों को निर्देश दे चुके हैं। साथ ही नालों पर किए कब्जों पर भी कार्रवाई होगी।
-आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।