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Yamuna Nagar News: बरामदे में चल रही इमरजेंसी, एक बेड पर दो मरीजों का उपचार
Sun, 20 Sep 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 20 Sep 2026 01:26 AM IST
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ट्रामा सेंटर के बरामदे में रखे बेड पर शनिवार को पेंट किया जा रहा था। जिस कारण मरीजों को दूसरी ज
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को बरामदे में स्ट्रेचर और बेड पर दिन काटने पड़ रहे हैं। बरामदे में लगे बेड पर-दो मरीजों को लेटाकर इलाज किया जा रहा है। यह स्थिति तब है जब करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करके ट्रामा सेंटर के नवीनीकरण का काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है।
लगभग 15 वर्ष पुराने ट्रामा सेंटर भवन के जीर्णोद्धार के चलते जून 2024 में इमरजेंसी सेवाओं को जिला नागरिक अस्पताल के ब्लॉक-ए में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया था। पहले जहां ट्रामा सेंटर दो मंजिला भवन में पर्याप्त जगह के साथ संचालित होता था, वहीं अब यह सिर्फ एक कमरे और इसके बाहर बने एक सीमित हॉल तक सिमट कर रह गया है।
अस्पताल में आने वाले हादसों के पीड़ितों और गंभीर मरीजों की संख्या के आगे यह जगह बेहद कम पड़ रही है। मजबूरन स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल के बरामदे में ही चार बेड लगाने पड़े हैं। पूर्व पार्षद निर्मल चौहान, अमन व नवनीत शर्मा का कहना है कि बरामदे में खुले में मरीजों का इलाज होने से संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए ट्रामा सेंटर को जल्द शुरू किया जाए।
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15 सितंबर को गांव मघरपुर स्थित नी आसरे दा आसरा आश्रम में रहने वाले एक लावारिस बुजुर्ग की अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें ट्रामा सेंटर लाया गया था। परंतु उन्हें उपचार के लिए बेड ही नहीं मिला। ऐसे में उनका उपचार स्ट्रेचर पर ही करना पड़ा। उन्हें ड्रिप लगाई गई।
आश्रम से ही साथ आया एक युवक स्ट्रेचर ग्लूकोज की बोतल को हाथ में पकड़ कर खड़ा रहा। बोतल करीब एक घंटे में खत्म हुई। तब तक बोतल युवक के हाथ में ही रही। बाद में बुजुर्ग को किसी तरह बेड पर जगह मिली। हालांकि दो दिन बाद ही हालत में सुधार नहीं होने पर बुजुर्ग की मौत हो गई।
ट्रामा सेंटर के ग्राउंड फ्लोर के सिविल वर्क पर लगभग 82 लाख रुपये की लागत आई थी। इसके बाद इलेक्ट्रिकल विंग का काम अधूरा रहने से प्रोजेक्ट लटक गया। पिछले महीनों में भवन में एयर कंडीशनर, ऑक्सीजन व वैक्यूम पाइपलाइन और अन्य विद्युत उपकरण लगाने के लिए 92 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट भी खर्च किया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने इसे पहले जनवरी 2025 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा था। जब यह समय सीमा बीत गई, तो इसे जनवरी 2026 तक चालू करने का दावा किया गया। फरवरी, मई, अगस्त के दावे भी हवा हवाई ही निकले। कई डेडलाइन बीत जाने के बावजूद भी अभी तक स्वास्थ्य विभाग ट्रामा सेंटर को हैंडओवर लेकर शुरू नहीं कर पाया है।
जल्द शुरू होगा ट्रामा सेंटर : डॉ. दिव्या मंगला
मामले में कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला का कहना है कि ट्रामा सेंटर में एसी और अन्य आवश्यक बिजली कार्य पीडब्ल्यूडी के माध्यम से करवाए जा रहे हैं, जो अब अंतिम चरण में हैं। कार्य पूरा होते ही बेहद जल्द ही ट्रामा सेंटर को उसके मूल भवन में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को बरामदे में स्ट्रेचर और बेड पर दिन काटने पड़ रहे हैं। बरामदे में लगे बेड पर-दो मरीजों को लेटाकर इलाज किया जा रहा है। यह स्थिति तब है जब करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करके ट्रामा सेंटर के नवीनीकरण का काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है।
लगभग 15 वर्ष पुराने ट्रामा सेंटर भवन के जीर्णोद्धार के चलते जून 2024 में इमरजेंसी सेवाओं को जिला नागरिक अस्पताल के ब्लॉक-ए में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया था। पहले जहां ट्रामा सेंटर दो मंजिला भवन में पर्याप्त जगह के साथ संचालित होता था, वहीं अब यह सिर्फ एक कमरे और इसके बाहर बने एक सीमित हॉल तक सिमट कर रह गया है।
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अस्पताल में आने वाले हादसों के पीड़ितों और गंभीर मरीजों की संख्या के आगे यह जगह बेहद कम पड़ रही है। मजबूरन स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल के बरामदे में ही चार बेड लगाने पड़े हैं। पूर्व पार्षद निर्मल चौहान, अमन व नवनीत शर्मा का कहना है कि बरामदे में खुले में मरीजों का इलाज होने से संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए ट्रामा सेंटर को जल्द शुरू किया जाए।
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15 सितंबर को गांव मघरपुर स्थित नी आसरे दा आसरा आश्रम में रहने वाले एक लावारिस बुजुर्ग की अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें ट्रामा सेंटर लाया गया था। परंतु उन्हें उपचार के लिए बेड ही नहीं मिला। ऐसे में उनका उपचार स्ट्रेचर पर ही करना पड़ा। उन्हें ड्रिप लगाई गई।
आश्रम से ही साथ आया एक युवक स्ट्रेचर ग्लूकोज की बोतल को हाथ में पकड़ कर खड़ा रहा। बोतल करीब एक घंटे में खत्म हुई। तब तक बोतल युवक के हाथ में ही रही। बाद में बुजुर्ग को किसी तरह बेड पर जगह मिली। हालांकि दो दिन बाद ही हालत में सुधार नहीं होने पर बुजुर्ग की मौत हो गई।
ट्रामा सेंटर के ग्राउंड फ्लोर के सिविल वर्क पर लगभग 82 लाख रुपये की लागत आई थी। इसके बाद इलेक्ट्रिकल विंग का काम अधूरा रहने से प्रोजेक्ट लटक गया। पिछले महीनों में भवन में एयर कंडीशनर, ऑक्सीजन व वैक्यूम पाइपलाइन और अन्य विद्युत उपकरण लगाने के लिए 92 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट भी खर्च किया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने इसे पहले जनवरी 2025 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा था। जब यह समय सीमा बीत गई, तो इसे जनवरी 2026 तक चालू करने का दावा किया गया। फरवरी, मई, अगस्त के दावे भी हवा हवाई ही निकले। कई डेडलाइन बीत जाने के बावजूद भी अभी तक स्वास्थ्य विभाग ट्रामा सेंटर को हैंडओवर लेकर शुरू नहीं कर पाया है।
जल्द शुरू होगा ट्रामा सेंटर : डॉ. दिव्या मंगला
मामले में कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला का कहना है कि ट्रामा सेंटर में एसी और अन्य आवश्यक बिजली कार्य पीडब्ल्यूडी के माध्यम से करवाए जा रहे हैं, जो अब अंतिम चरण में हैं। कार्य पूरा होते ही बेहद जल्द ही ट्रामा सेंटर को उसके मूल भवन में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

ट्रामा सेंटर के बरामदे में रखे बेड पर शनिवार को पेंट किया जा रहा था। जिस कारण मरीजों को दूसरी ज- फोटो : 1