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Yamuna Nagar News: पहाड़ों पर बारिश से खोले बैराज के आठ गेट
Fri, 01 Aug 2025 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:56 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हरियाणा की सीमा के साथ लगती हिमाचल की शिवालिक की पहाड़ियों में हुई भारी बारिश से हथिनी कुंड बैराज का जलस्तर एकाएक बढ़ गया। ऐसे में बैराज पर 33 772 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने के साथ ही बैराज के आठ गेटों को तुरंत खोल पानी को दिल्ली की तरफ डायवर्ट कर दिया गया।
हालांकि अभी बैराज पर एक साथ पहुंचे इतने पानी से कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यदि पहाड़ों पर लगातार बारिश हुई तो बैराज का जलस्तर और बढ़ने की उम्मीद है। बता दें इस सीजन में अभी तक बैराज पर पानी 70 हजार क्यूसेक पानी आया था। दरअसल, इस बार शिवालिक की पहाड़ियों में बारिश रुक-रुक कर हुई है, इसलिए सीजन में बैराज का जलस्तर एक लाख क्यूसेक तक नहीं पहुंच पाया है।
हथिनी कुंड बैराज पर जब भी जलस्तर बढ़ता है, तो उसे पूर्वी व पश्चिमी यमुना में भी छोड़ा जाता है। चूंकि यूपी की पनबिजली योजना इसी जलस्तर पर टिकी हुई है। लेकिन बारिश से हथिनी कुंड बैराज से उत्तर प्रदेश की डिमांड 2010 क्यूसेक से कम होकर 1500 क्यूसेक की जा रही है। वहीं, दक्षिण हरियाणा से भी नहरी पानी की मांग में कमी आई है।
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पश्चिमी यमुना नहर में मांग के अनुसार 12 हजार 700 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जा रही है। बता दें बैराज पर सामान्य दिनों में तीन से पांच हजार क्यूसेक रहता है। मई, जून माह में गर्मी के पड़ने के चलते जलस्तर कम दर्ज होता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की पनबिजली पर इसका असर पड़ने लगता है।
बैराज पर यह सामान्य पानी है। इससे कोई खतरा नहीं है। पहाड़ी इलाकों में बारिश होने से जलस्तर में कुछ बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल सभी गेट खोलने की जरूरत नहीं है। - विजय गर्ग, एक्सईएन सिंचाई विभाग।
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यमुनानगर। हरियाणा की सीमा के साथ लगती हिमाचल की शिवालिक की पहाड़ियों में हुई भारी बारिश से हथिनी कुंड बैराज का जलस्तर एकाएक बढ़ गया। ऐसे में बैराज पर 33 772 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने के साथ ही बैराज के आठ गेटों को तुरंत खोल पानी को दिल्ली की तरफ डायवर्ट कर दिया गया।
हालांकि अभी बैराज पर एक साथ पहुंचे इतने पानी से कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यदि पहाड़ों पर लगातार बारिश हुई तो बैराज का जलस्तर और बढ़ने की उम्मीद है। बता दें इस सीजन में अभी तक बैराज पर पानी 70 हजार क्यूसेक पानी आया था। दरअसल, इस बार शिवालिक की पहाड़ियों में बारिश रुक-रुक कर हुई है, इसलिए सीजन में बैराज का जलस्तर एक लाख क्यूसेक तक नहीं पहुंच पाया है।
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हथिनी कुंड बैराज पर जब भी जलस्तर बढ़ता है, तो उसे पूर्वी व पश्चिमी यमुना में भी छोड़ा जाता है। चूंकि यूपी की पनबिजली योजना इसी जलस्तर पर टिकी हुई है। लेकिन बारिश से हथिनी कुंड बैराज से उत्तर प्रदेश की डिमांड 2010 क्यूसेक से कम होकर 1500 क्यूसेक की जा रही है। वहीं, दक्षिण हरियाणा से भी नहरी पानी की मांग में कमी आई है।
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पश्चिमी यमुना नहर में मांग के अनुसार 12 हजार 700 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जा रही है। बता दें बैराज पर सामान्य दिनों में तीन से पांच हजार क्यूसेक रहता है। मई, जून माह में गर्मी के पड़ने के चलते जलस्तर कम दर्ज होता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की पनबिजली पर इसका असर पड़ने लगता है।
बैराज पर यह सामान्य पानी है। इससे कोई खतरा नहीं है। पहाड़ी इलाकों में बारिश होने से जलस्तर में कुछ बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल सभी गेट खोलने की जरूरत नहीं है। - विजय गर्ग, एक्सईएन सिंचाई विभाग।